RBI का विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व पर FAQ: 20% FERR की गणना और दायरा स्पष्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 15 अक्टूबर 2026 को अपने 20 प्रतिशत विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व (FERR) के दायरे, गणना पद्धति और छूट प्राप्त श्रेणियों को लेकर एक विस्तृत FAQ दस्तावेज़ जारी किया। इस स्पष्टीकरण में कुछ हेजिंग सौदों को FERR की बाध्यता से बाहर रखने और ऑप्शंस तथा रोल-ओवर अनुबंधों के साथ व्यवहार को लेकर बैंकिंग क्षेत्र में व्याप्त अस्पष्टता को दूर किया गया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब अधिकृत डीलर बैंक FERR अनुपालन की व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश माँग रहे थे।
FERR का दायरा — कौन से अनुबंध आते हैं इसमें
RBI के अनुसार, FERR की आवश्यकता केवल उन डेरिवेटिव अनुबंधों पर लागू होगी जिनकी सांकेतिक राशि 20 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक है और जिनमें उपयोगकर्ता चालू खाते के लेनदेन से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए रुपए के बदले विदेशी मुद्रा खरीदता है। FAQ में स्पष्ट किया गया है कि रुपए के बदले विदेशी मुद्रा बेचने वाले अनुबंध और पूंजी खाते के लेनदेन की हेजिंग से जुड़े अनुबंध इस दायरे से बाहर हैं।
इसके अतिरिक्त, FERR केवल रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों पर प्रभावी है। बिना भारतीय मुद्रा के किए जाने वाले क्रॉस-करेंसी डेरिवेटिव अनुबंध इसके दायरे में नहीं आएँगे।
छूट प्राप्त श्रेणियाँ — किन्हें मिली राहत
RBI ने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि पूंजी खाते के लेनदेन से उत्पन्न चालू खाते के भुगतान जोखिमों की हेजिंग के लिए किए गए अनुबंध FERR के अधीन नहीं होंगे। इनमें बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) पर ब्याज, अनिवासियों के पास मौजूद निवासी ऋण साधनों पर कूपन भुगतान, और गैर-निवासी निवेशकों को दिए जाने वाले लाभांश शामिल हैं। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत इन्हें चालू खाते के लेनदेन की श्रेणी में रखा गया है।
गौरतलब है कि 20 लाख डॉलर या उससे कम सांकेतिक राशि वाले अनुबंध स्वतः FERR से मुक्त हैं। हालाँकि, RBI ने अधिकृत डीलरों को चेताया है कि वे इन प्रावधानों से बचने के लिए डेरिवेटिव लेनदेन की संरचना में किसी तरह की हेराफेरी के प्रयासों से सतर्क रहें।
FERR की गणना — कैसे होगी राशि तय
FAQ के अनुसार, FERR की राशि प्रत्येक लागू डेरिवेटिव अनुबंध की सांकेतिक राशि के रुपए समतुल्य का 20 प्रतिशत होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि 95 रुपए प्रति डॉलर की अनुबंधित दर पर 1 करोड़ डॉलर की सांकेतिक राशि वाला डेरिवेटिव अनुबंध किया जाए, तो उसकी रुपए में सांकेतिक राशि ₹95 करोड़ होगी। ऐसे में लागू FERR ₹19 करोड़ होगा।
FERR को RBI के पास अधिकृत डीलर के चालू खाते में जमा और बनाए रखना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था प्रतिदिन, सकल आधार पर, प्रत्येक डेरिवेटिव लेनदेन पर अलग-अलग लागू होगी। किसी अनुबंध पर FERR, अनुबंध किए जाने की तारीख के अगले कार्यदिवस से बनाए रखना होगा।
ब्याज और अनुपालन — मुख्य प्रावधान
RBI ने स्पष्ट किया कि RBI के पास बनाए रखे गए FERR पर कोई ब्याज नहीं मिलेगा। किसी अनुबंध के लिए FERR को उस अनुबंध की समाप्ति के एक दिन बाद तक बनाए रखना अनिवार्य होगा। अधिकृत डीलरों को पात्र लेनदेन और उनसे जुड़े FERR का विस्तृत ऑडिट-योग्य रिकॉर्ड रखना होगा।
बैंकों द्वारा अपने स्वयं के मुद्रा जोखिमों की हेजिंग के लिए किए जाने वाले पात्र सौदों पर FERR की आवश्यकता पूर्ववत लागू रहेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह FAQ बैंकिंग क्षेत्र की अनुपालन अनिश्चितता को काफी हद तक कम करेगा और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाज़ार में पारदर्शिता बढ़ाएगा।