RBI ने फ्रीलांसर और सर्विस निर्यातकों को दी राहत, EDF अनुपालन नियम 1 अक्टूबर 2026 से हुए आसान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2 नवंबर 2026 को अधिसूचित संशोधन के ज़रिए सेवाएँ निर्यात करने वाले निवासी व्यक्तियों के लिए 'एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म' (EDF) अनुपालन प्रक्रिया को सरल बना दिया है। अब फ्रीलांसर, यूट्यूबर और स्वतंत्र पेशेवर भुगतान से जुड़ी ज़रूरी जानकारी अपने अधिकृत डीलर (AD) बैंक को उपलब्ध करा देंगे, तो यह माना जाएगा कि उन्होंने EDF जमा कर दिया है। यह संशोधन 1 अक्टूबर 2026 से पूर्वव्यापी रूप से लागू हो चुका है।
मुख्य बदलाव क्या हुए
RBI ने 'विदेशी मुद्रा प्रबंधन (वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात और आयात) (दूसरा संशोधन) विनियम, 2026' जारी किए हैं। इसके तहत 'निवासी व्यक्ति' को भारत में रहने वाले एक वास्तविक व्यक्ति के रूप में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। संशोधन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि EDF कब 'जमा माना जाएगा' — अर्थात बैंक को भुगतान-संबंधी सूचना देना ही पर्याप्त होगा।
गौरतलब है कि सितंबर 2026 में अधिसूचित पुरानी व्यवस्था के तहत सेवा निर्यातकों को इनवॉइस जारी होने वाले महीने की समाप्ति के 30 दिनों के भीतर EDF जमा करना अनिवार्य था। नए नियम उस बाध्यता को व्यक्तिगत निर्यातकों के लिए व्यावहारिक रूप से समाप्त कर देते हैं।
फ्रीलांसर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स पर असर
विदेशी ग्राहकों से आय अर्जित करने वाले फ्रीलांसर, यूट्यूबर और स्वतंत्र सलाहकार — जिन्हें पहले अलग से EDF दाखिल करना पड़ता था — अब इस दायित्व से मुक्त होंगे, बशर्ते वे अपने AD बैंक को भुगतान की जानकारी दें। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में डिजिटल सेवाओं का निर्यात तेज़ी से बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में व्यक्तिगत निर्यातक FEMA अनुपालन की जटिलताओं से जूझ रहे थे।
एक ही महीने में एक या अधिक प्राप्तकर्ताओं को सेवाएँ देने वाले निर्यातक अब सभी निर्यातों के लिए एक ही EDF जमा कर सकते हैं। सॉफ्टवेयर के अलावा अन्य सेवाओं के निर्यातक भुगतान प्राप्त होने की तारीख पर या उससे पहले EDF जमा कर सकते हैं।
अनिवासी निर्यातकों के लिए प्रावधान
यह संशोधन अनिवासी निर्यातकों को भी सुविधा देता है। यदि किसी सेवा के लिए आने वाला भुगतान ₹10 लाख से अधिक नहीं है, तो EDF को स्वतः जमा माना जाएगा। इससे छोटे एवं मध्यम स्तर के विदेश-आधारित भारतीय सेवा प्रदाताओं को भी प्रशासनिक राहत मिलेगी।
AD बैंकों की ज़िम्मेदारी
संशोधित प्रावधान के अनुसार, अधिकृत डीलर बैंकों को IDPMS (Import Data Processing and Monitoring System) में सेवा आयात का विवरण दर्ज करना होगा। यह विवरण उस आयातक द्वारा दिया जाएगा जो 'निवासी व्यक्ति' नहीं है और जहाँ इनवॉइस या अनुबंध का मूल्य ₹10 लाख से अधिक है। बैंक को यह जानकारी प्राप्त होने के पाँच कार्य दिवसों के भीतर इसे दर्ज करना अनिवार्य होगा।
AD बैंक RBI के 'एक्सपोर्ट डेटा प्रोसेसिंग एंड मॉनिटरिंग सिस्टम' (EDPMS) में निर्यात लेनदेन और भुगतान की प्राप्ति को ट्रैक करते रहेंगे, जिससे नीति-निर्माताओं के पास सेवा निर्यात का सटीक डेटा बना रहेगा।
आगे की राह
यह कदम RBI की उस व्यापक नीति दिशा के अनुरूप है जिसके तहत व्यापार से जुड़े FEMA अनुपालन को डिजिटल भुगतान प्रणालियों के साथ एकीकृत किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से भारत की सेवा निर्यात अर्थव्यवस्था में भाग लेने वाले लाखों व्यक्तिगत पेशेवरों को अनुपालन का बोझ कम महसूस होगा, और औपचारिक बैंकिंग चैनलों के माध्यम से भुगतान प्राप्त करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी।