ईरानी स्पीकर गालिबाफ की चेतावनी: युद्ध रोकना अमेरिका की जिम्मेदारी, ईरान 'ट्रिगर पर उंगली' रखे तैयार
सारांश
मुख्य बातें
ईरानी संसद (कंसल्टेटिव असेंबली) के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने 3 नवंबर 2026 को संसद के एक खुले सत्र में स्पष्ट किया कि युद्ध रोकने की जिम्मेदारी ईरान की नहीं, बल्कि अमेरिका की है। गालिबाफ के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी पक्ष को 'एक मजबूत और तर्कसंगत जवाब' दे दिया है और अब 'गेंद अमेरिका के पाले में है।' उन्होंने यह भी साफ किया कि तेहरान किसी भी अमेरिकी धमकी के सामने झुकने को तैयार नहीं है।
गालिबाफ के मुख्य बयान
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'तस्नीम' के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि क्षेत्रीय देशों को यह भली-भाँति पता होना चाहिए कि ईरान ने अमेरिकी पक्ष को एक 'मजबूत और तर्कसंगत' जवाब दिया है। उन्होंने घोषणा की कि ईरान 'ट्रिगर पर उंगली रखे' लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने चेतावनी दी कि वाशिंगटन की ओर से की गई कोई भी 'रणनीतिक गलती' अमेरिकी सैनिकों को एक 'बिल्कुल नए युद्ध क्षेत्र' में उतरने के लिए मजबूर कर देगी। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक गालिबाफ ने यह भी कहा कि ईरान के 'अटल रवैए और हार न मानने वाले जज्बे' ने इजरायली और अमेरिकी प्रशासन को 'हताशा की गर्त में' धकेल दिया है।
ईरान का दावा: विरोधियों को मिली शिकस्त
गालिबाफ के अनुसार, ईरान इस संघर्ष में विजयी रहा है और उनके विरोधियों को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, 'लगातार हार का सामना करने के बाद, वे कभी-कभी धमकियों और सैन्य ताकत के जरिए ईरानी राष्ट्र को घुटने टेकने पर मजबूर करने की कोशिश करते हैं, लेकिन उनका यह आकलन गलत है, क्योंकि ईरान कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि 'अनुचित मांगों का दौर अब खत्म हो चुका है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में क्षेत्रीय तनाव अपने उच्चतम स्तर पर बना हुआ है।
भौगोलिक सीमाओं से परे कार्रवाई की चेतावनी
ईरानी स्पीकर ने स्पष्ट किया कि ईरान के सशस्त्र बल किसी भी भौगोलिक सीमा की परवाह किए बिना, 'अप्रत्याशित तरीके से' कार्रवाई करने में सक्षम हैं। गालिबाफ ने कहा, 'दुश्मन को किसी भी गलतफहमी का शिकार नहीं होना चाहिए। ईरान उनके गलत आकलनों का अंत कर देगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'हम मैदान और सैन्य क्षेत्र में अपनी रक्षा तैयारियों को सर्वोच्च स्तर पर रखते हैं।' गौरतलब है कि यह बयान ईरान की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें कथित तौर पर प्रतिरोध की धुरी के ज़रिए क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखने पर ज़ोर दिया जाता है।
क्षेत्रीय संदर्भ और आगे की स्थिति
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव चरम पर है और मध्य-पूर्व में संघर्ष की आशंकाएँ गहरी हो रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कड़े बयान घरेलू दर्शकों को संबोधित करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वार्ता में ईरान की सौदेबाजी की स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से भी दिए जाते हैं। आने वाले हफ्तों में ईरान-अमेरिका संबंधों की दिशा पर क्षेत्रीय देशों की पैनी नज़र बनी रहेगी।