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सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव्स नियम सरल किए, अनहेजेड पोजीशन के लिए $50 लाख की सीमा निर्धारित

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सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव्स नियम सरल किए, अनहेजेड पोजीशन के लिए $50 लाख की सीमा निर्धारित

सारांश

सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव्स में अनहेजेड पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की एकीकृत सीमा तय कर बाज़ार को परिचालन स्पष्टता दी है। साथ ही FATF देशों के निवेशकों को डिजिटल KYC की राहत से विदेशी निवेश प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

सेबी ने 5 नवंबर 2026 को अनहेजेड भारतीय रुपया करेंसी पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की एकीकृत सीमा तय की।
यह सीमा FPI और घरेलू निवेशकों दोनों पर लागू होगी; सभी मान्यता प्राप्त एक्सचेंजों की पोजीशन एकत्रित जोड़ी जाएगी।
FPI की शॉर्ट पोजीशन किसी एकल एक्सचेंज पर 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं हो सकती; लॉन्ग पोजीशन के लिए अंडरलाइंग एक्सपोजर अनिवार्य।
इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड यूनिट्स FPI के लिए वैध अंडरलाइंग एक्सपोजर माने जाएंगे।
FATF -अनुपालक देशों के NRI, OCI और विदेशी नागरिकों को डिजिटल KYC की सुविधा मिलेगी; गैर-अनुपालक देशों पर पुरानी शर्तें जारी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 5 नवंबर 2026 को करेंसी डेरिवेटिव्स बाज़ार में नियामकीय राहत देते हुए अनहेजेड भारतीय रुपया करेंसी पोजीशन के लिए $50 लाख (5 मिलियन डॉलर) की एकीकृत सीमा तय की है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सर्कुलर के माध्यम से जारी यह निर्देश घरेलू निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) दोनों पर लागू होगा।

नई सीमा की संरचना

नए नियमों के अनुसार, कोई भी निवेशक — घरेलू या विदेशी — किसी भी समय 5 मिलियन डॉलर तक की अनहेजेड भारतीय रुपया करेंसी पोजीशन बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर की शर्त के रख सकता है। यह सीमा आउटस्टैंडिंग एक्सपोजर पर भी समान रूप से लागू रहेगी।

इस $50 लाख की गणना सभी भारतीय रुपया करेंसी पेयर — जिनमें अन्य विदेशी मुद्राएँ भी शामिल हैं — को मिलाकर की जाएगी। गौरतलब है कि सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर मौजूद पोजीशन को एकत्रित रूप से जोड़ा जाएगा, अर्थात् किसी एक एक्सचेंज पर सीमा से बाहर जाकर दूसरे पर पोजीशन नहीं ली जा सकेगी।

FPI के लिए विशेष प्रावधान

विदेशी मुद्रा–भारतीय रुपया कॉन्ट्रैक्ट्स में FPI की शॉर्ट पोजीशन किसी भी एकल एक्सचेंज पर 5 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं हो सकती। वहीं, इस सीमा से अधिक की लॉन्ग पोजीशन लेने के लिए FPI को भारतीय डेट या इक्विटी प्रतिभूतियों में अंडरलाइंग एक्सपोजर प्रमाणित करना होगा।

इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड यूनिट्स को भी FPI के लिए वैध अंडरलाइंग एक्सपोजर के रूप में स्वीकृत किया गया है। घरेलू क्लाइंट RBI की निर्धारित शर्तों के अधीन 5 मिलियन डॉलर से अधिक की पोजीशन बनाए रख सकते हैं।

सेबी की KYC राहत — FATF देशों को छूट

इससे एक दिन पहले, सेबी ने बुधवार को भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों (PROI) के लिए KYC नियमों में भी ढील दी। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के नियमों का अनुपालन करने वाले देशों में रहने वाले पात्र विदेशी निवेशक अब बिना भारत आए डिजिटल माध्यम से KYC प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

यह सुविधा अनिवासी भारतीयों (NRI), भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) और विदेशी नागरिकों को भारतीय वित्तीय बाज़ारों में निवेश की प्रक्रिया सरल बनाने के उद्देश्य से लाई गई है। हालाँकि, FATF अनुपालन न करने वाले देशों के निवेशकों पर पुरानी KYC आवश्यकताएँ यथावत लागू रहेंगी।

आम निवेशकों और बाज़ार पर असर

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय रुपया वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दबाव में रहा है और करेंसी हेजिंग लागत बढ़ी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, $50 लाख की स्पष्ट सीमा से बाज़ार सहभागियों को परिचालन स्पष्टता मिलेगी और करेंसी डेरिवेटिव्स बाज़ार में तरलता बढ़ सकती है।

विदेशी निवेशकों के लिए डिजिटल KYC की सुविधा से FPI प्रवाह में इज़ाफा होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया में आने वाली भौतिक बाधाएँ कम होंगी। आगे इन नियमों के क्रियान्वयन की निगरानी और बाज़ार प्रतिक्रिया पर नज़र रखी जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बड़े संस्थागत खिलाड़ियों के लिए यह अभी भी प्रतिबंधात्मक हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या यह राहत पर्याप्त है या बाज़ार फिर से पुराने स्तर की सक्रियता पर लौट सकेगा — खासकर तब, जब वैश्विक करेंसी अस्थिरता बनी हुई है और हेजिंग लागत ऊँची है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने करेंसी डेरिवेटिव्स में 5 मिलियन डॉलर की सीमा क्यों तय की?
सेबी ने अनहेजेड भारतीय रुपया करेंसी पोजीशन के लिए 5 मिलियन डॉलर की सीमा तय कर बाज़ार सहभागियों को परिचालन स्पष्टता देने और करेंसी डेरिवेटिव्स बाज़ार में तरलता बढ़ाने का प्रयास किया है। यह फैसला RBI के सर्कुलर के माध्यम से 5 नवंबर 2026 को जारी किया गया।
FPI के लिए नई करेंसी पोजीशन सीमा क्या है?
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर के 5 मिलियन डॉलर तक की अनहेजेड रुपया पोजीशन रख सकते हैं। इससे अधिक लॉन्ग पोजीशन के लिए उन्हें भारतीय डेट, इक्विटी या म्यूचुअल फंड यूनिट्स में अंडरलाइंग एक्सपोजर प्रमाणित करना होगा।
सेबी की KYC राहत किन निवेशकों को मिलेगी?
FATF के नियमों का अनुपालन करने वाले देशों में रहने वाले NRI, OCI और विदेशी नागरिकों को डिजिटल माध्यम से भारत में बिना शारीरिक उपस्थिति के KYC पूरी करने की सुविधा मिलेगी। FATF अनुपालन न करने वाले देशों के निवेशकों पर पुरानी KYC शर्तें लागू रहेंगी।
5 मिलियन डॉलर की सीमा की गणना कैसे होगी?
यह सीमा सभी भारतीय रुपया करेंसी पेयर — जिनमें अन्य विदेशी मुद्राएँ भी शामिल हैं — को मिलाकर कुल आउटस्टैंडिंग एक्सपोजर पर लागू होगी। सभी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर मौजूद पोजीशन को एकत्रित जोड़कर इस सीमा की जाँच की जाएगी।
घरेलू निवेशक 5 मिलियन डॉलर से अधिक की पोजीशन कब ले सकते हैं?
घरेलू क्लाइंट RBI द्वारा निर्धारित विशेष शर्तों के अधीन 5 मिलियन डॉलर से अधिक की करेंसी पोजीशन ले सकते हैं। इन शर्तों का विवरण RBI के संबंधित दिशानिर्देशों में उल्लिखित है।
राष्ट्र प्रेस
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