8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेबी का बड़ा फैसला: एफपीआई पंजीकरण फीस अब डॉलर की जगह रुपए में, ₹90,000 से शुरू

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेबी का बड़ा फैसला: एफपीआई पंजीकरण फीस अब डॉलर की जगह रुपए में, ₹90,000 से शुरू

सारांश

सेबी ने एफपीआई और एफवीसीआई की पंजीकरण फीस डॉलर की जगह रुपए में तय कर दी है — कैटेगरी-I के लिए ₹2.3 लाख और अन्य के लिए ₹90,000। यह बदलाव मैनुअल अकाउंटिंग और रिपोर्टिंग देरी जैसी पुरानी परिचालन बाधाओं को दूर करेगा और छह महीने बाद लागू होगा।

मुख्य बातें

सेबी ने 8 जुलाई 2025 को एफपीआई और एफवीसीआई की पंजीकरण फीस डॉलर से रुपए में बदलने की अधिसूचना जारी की।
सामान्य एफपीआई के लिए फीस 1,000 डॉलर से बदलकर ₹90,000 और कैटेगरी-I के लिए 2,500 डॉलर से ₹2.3 लाख की गई।
कस्टोडियन को अब सालाना ₹10 लाख एकमुश्त के बजाय प्रतिमाह ₹85,000 जमा करने होंगे।
डिपॉजिटरी को संग्रहीत फीस पंजीकरण के पाँच कार्य दिवसों के भीतर सेबी को जमा करनी होगी।
नई व्यवस्था अधिसूचना के लगभग छह महीने बाद लागू होगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में सेबी ने एफपीआई-एफवीसीआई से जीएसटी सहित 1.298 करोड़ डॉलर शुल्क संग्रहीत किया।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 8 जुलाई 2025 को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और विदेशी वेंचर कैपिटल निवेशकों (एफवीसीआई) के पंजीकरण शुल्क ढाँचे में आमूल बदलाव करते हुए डॉलर-आधारित प्रणाली को रुपए-आधारित प्रणाली से बदल दिया है। यह संशोधन अधिसूचना जारी होने के करीब छह महीने बाद लागू होगा, ताकि विदेशी निवेशकों को नई व्यवस्था के अनुरूप ढलने का पर्याप्त समय मिल सके।

नई फीस संरचना: क्या बदला

सेबी की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पहले जो पंजीकरण शुल्क 1,000 डॉलर था, उसे अब ₹90,000 कर दिया गया है। कैटेगरी-I एफपीआई और एफवीसीआई के लिए यह शुल्क 2,500 डॉलर से बढ़ाकर ₹2.3 लाख निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही लेट फीस और कंटिन्यूएशन फीस में भी समानुपातिक संशोधन किए गए हैं।

कस्टोडियन के लिए भुगतान की पद्धति में भी बदलाव किया गया है — अब उन्हें सालाना एकमुश्त ₹10 लाख के बजाय प्रतिमाह ₹85,000 जमा करने होंगे, जिससे नकदी प्रवाह अधिक नियमित और पारदर्शी होगा।

डिपॉजिटरी की जिम्मेदारी और समयसीमा

संशोधित नियमों के तहत, डिपॉजिटरी को एफपीआई और एफवीसीआई से संग्रहीत फीस, पंजीकरण प्रदान होने के पाँच कार्य दिवसों के भीतर सेबी के पास जमा करनी अनिवार्य होगी। यह प्रावधान राशि संग्रह और हस्तांतरण के बीच की देरी को समाप्त करने के लिए लाया गया है।

पंजीकरण प्रक्रिया में सरलीकरण

नियामक ने एफपीआई पंजीकरण के लिए कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म में भी संशोधन किया है। अब इसमें व्यक्तिगत निवेशकों के लिए जन्म तिथि और संस्थागत निवेशकों के लिए कंपनी के गठन की तिथि को शामिल करना अनिवार्य होगा। यह कदम मार्च 2025 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा जारी उस अधिसूचना के अनुरूप है, जिसमें परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) आवेदन प्रक्रिया को सुगम बनाने के निर्देश दिए गए थे।

परिचालन दिक्कतें दूर करने की कोशिश

सेबी ने स्पष्ट किया है कि डॉलर-आधारित शुल्क प्रणाली में मैनुअल अकाउंटिंग, इनवॉइसिंग में जटिलता, रियल-टाइम लेखांकन सूचना का अभाव और वित्तीय रिपोर्टिंग में देरी जैसी परिचालन बाधाएँ लंबे समय से बनी हुई थीं। रुपए में फीस तय करने से ये समस्याएँ स्वतः समाप्त होंगी और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।

गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सेबी ने एफपीआई और एफवीसीआई से पंजीकरण, कंटिन्यूएशन और अन्य शुल्कों के रूप में जीएसटी सहित 1.298 करोड़ डॉलर (लगभग ₹108 करोड़) संग्रहीत किए। यह आँकड़ा इस सुधार की प्रशासनिक महत्ता को रेखांकित करता है।

आगे की राह

यह बदलाव भारत के पूँजी बाज़ार नियामक ढाँचे को अधिक रुपया-केंद्रित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सुविचारित कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे विदेशी निवेशकों को मुद्रा विनिमय दर के उतार-चढ़ाव से जुड़ी अनिश्चितता भी कम होगी। छह महीने की संक्रमण अवधि के बाद इस नई प्रणाली का क्रियान्वयन बाज़ार नियमन की पारदर्शिता और कुशलता दोनों को मज़बूत करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संकेत भी है — भारत अपने पूँजी बाज़ार नियमन को धीरे-धीरे डॉलर-निर्भरता से मुक्त कर रहा है। फीस को रुपए में तय करने से विनिमय दर की अनिश्चितता समाप्त होगी, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ₹90,000 और ₹2.3 लाख की नई दरें वर्तमान डॉलर दरों के सटीक समतुल्य हैं या समय के साथ मुद्रास्फीति के अनुरूप इनकी समीक्षा होगी। यदि रुपए के अवमूल्यन के साथ इन दरों को अद्यतन नहीं किया गया, तो विदेशी निवेशकों के लिए वास्तविक लागत में कमी आ सकती है — जो नीतिगत इरादे के अनुरूप नहीं होगा।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने एफपीआई पंजीकरण फीस में क्या बदलाव किया है?
सेबी ने एफपीआई और एफवीसीआई की पंजीकरण फीस डॉलर की जगह रुपए में तय कर दी है। सामान्य एफपीआई के लिए यह फीस ₹90,000 और कैटेगरी-I एफपीआई व एफवीसीआई के लिए ₹2.3 लाख होगी।
नई फीस व्यवस्था कब से लागू होगी?
यह नई व्यवस्था अधिसूचना जारी होने के लगभग छह महीने बाद लागू होगी। विदेशी निवेशकों को नई प्रणाली के अनुरूप तैयारी के लिए यह संक्रमण अवधि दी गई है।
सेबी ने डॉलर की जगह रुपए में फीस क्यों की?
सेबी के अनुसार, डॉलर-आधारित प्रणाली में मैनुअल अकाउंटिंग, इनवॉइसिंग में जटिलता, रियल-टाइम लेखांकन सूचना का अभाव और वित्तीय रिपोर्टिंग में देरी जैसी परिचालन बाधाएँ थीं। रुपए में फीस तय करने से ये समस्याएँ दूर होंगी और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
कस्टोडियन के लिए फीस भुगतान में क्या बदलाव हुआ है?
कस्टोडियन को अब सालाना एकमुश्त ₹10 लाख के बजाय हर महीने ₹85,000 जमा करने होंगे। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक नियमित और पारदर्शी होगी।
डिपॉजिटरी को सेबी को फीस कितने समय में जमा करनी होगी?
संशोधित नियमों के तहत डिपॉजिटरी को एफपीआई और एफवीसीआई से संग्रहीत फीस, पंजीकरण मिलने के पाँच कार्य दिवसों के भीतर सेबी को जमा करनी अनिवार्य होगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले