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आरबीआई गवर्नर का बड़ा ऐलान: एनआरआई और ओसीआई की इक्विटी निवेश सीमा बढ़ी, एफपीआई प्रतिबंध भी हटे

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आरबीआई गवर्नर का बड़ा ऐलान: एनआरआई और ओसीआई की इक्विटी निवेश सीमा बढ़ी, एफपीआई प्रतिबंध भी हटे

सारांश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने MPC बैठक के बाद NRI, OCI और PROI की इक्विटी निवेश सीमा बढ़ाने, FPI प्रतिबंध हटाने और FAR के तहत G-Sec का दायरा विस्तारित करने की घोषणा की — विदेशी पूंजी आकर्षित करने की यह सबसे व्यापक नीतिगत पहल है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 जून 2025 को MPC बैठक के बाद NRI और OCI की SEBI पंजीकरण-रहित इक्विटी निवेश सीमा बढ़ाने की घोषणा की।
यही सुविधा अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवासी व्यक्तियों (PROI) को भी उपलब्ध होगी।
PSU के ECB को प्रोत्साहन देने के लिए और AD बैंकों को FCNR(B) डिपॉजिट हेतु रियायती सुविधाएँ 30 सितंबर 2026 तक जारी रहेंगी।
FAR के तहत 15, 30 और 40 वर्ष की नई सरकारी प्रतिभूतियाँ 'निर्दिष्ट प्रतिभूतियों' में शामिल की जाएंगी।
FPI के लिए General Route के तहत अल्पकालिक निवेश, एकाग्रता और व्यक्तिगत प्रतिभूति सीमाएँ हटाई गईं ।
निर्यात आय प्राप्ति की समयसीमा पुनः 9 महीने की जाएगी; विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 जून 2025 को मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद अपने संबोधन में घोषणा की कि शेयर बाज़ार में कारोबार होने वाले इक्विटी साधनों में सेबी (SEBI) पंजीकरण के बिना निवेश करने के लिए अनिवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (OCI) की निवेश सीमा बढ़ाई जा रही है। यह निर्णय विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रोत्साहित करने और भारत के भुगतान संतुलन को मज़बूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

एनआरआई, ओसीआई और पीआरओआई के लिए नई सुविधाएँ

गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि यही सुविधा अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवासी व्यक्तियों (PROI) को भी NRI और OCI के समान उपलब्ध कराई जाएगी। इससे भारतीय इक्विटी बाज़ार में विदेशी भागीदारी का दायरा उल्लेखनीय रूप से विस्तृत होगा। गौरतलब है कि अब तक SEBI पंजीकरण की अनिवार्यता कई संभावित निवेशकों के लिए एक बड़ी बाधा थी।

पीएसयू के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप और एफसीएनआर सुविधा

गवर्नर ने कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) द्वारा बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB) को प्रोत्साहित करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।" इसके साथ ही, अधिकृत डीलर (AD) बैंकों को 3 से 5 वर्ष की नई FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने के लिए पूरी हेजिंग लागत वहन करने की सुविधा भी 30 सितंबर 2026 तक दी जाएगी। यह कदम प्रवासी भारतीयों की बचत को देश में वापस लाने के प्रयासों को गति देगा।

एफएआर के तहत सरकारी प्रतिभूतियों का दायरा बढ़ा

विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से RBI ने पूरी तरह सुलभ मार्ग (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों के लिए 'निर्दिष्ट प्रतिभूतियों' का दायरा विस्तारित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों (G-Sec) को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, सामान्य मार्ग (General Route) के तहत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के निवेश पर लागू अल्पकालिक निवेश सीमा, निवेश एकाग्रता सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से जुड़ी सीमाएँ भी हटाई जा रही हैं।

निर्यात आय और विनिमय दर नीति पर स्पष्टता

मल्होत्रा ने बताया कि निर्यात आय की प्राप्ति के लिए समयसीमा को पुनः 9 महीने करने का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विनिमय दर (Exchange Rate) नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उनके शब्दों में, "हम किसी विशेष विनिमय दर या उसकी किसी सीमा को लक्ष्य नहीं बनाते। विनिमय दर का निर्धारण बाज़ार की ताकतों के आधार पर होने दिया जाता है।"

बाज़ार स्थिरता पर आरबीआई की प्रतिबद्धता

गवर्नर ने स्वीकार किया कि बढ़ी हुई अनिश्चितता के दौरान सट्टेबाज़ी के दबाव के कारण बाज़ार में ऐसे उतार-चढ़ाव आते हैं जो आर्थिक बुनियादी कारकों के अनुरूप नहीं होते। उन्होंने कहा कि RBI का उद्देश्य बाज़ार द्वारा तय किए गए स्वाभाविक बदलावों को रोकना नहीं है, लेकिन अत्यधिक अस्थिरता और अव्यवस्थित बाज़ार गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ये उपाय और सरकार द्वारा उसी दिन घोषित कर लाभ (Tax Benefit) मिलकर सरकारी उधारी के लिए विदेशी पूंजी आकर्षित करने में सहायक होंगे। आने वाले समय में RBI निर्यात को बढ़ावा देने और पूंजी प्रवाह आकर्षित करने के लिए आगे भी आवश्यक नीतिगत बदलाव करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

या कर संरचना और प्रत्यावर्तन की जटिलताएँ ज़्यादा बड़ी रुकावट हैं। FPI पर से एकाग्रता सीमाएँ हटाना दीर्घकालिक G-Sec बाज़ार में गहराई लाने की दिशा में सही कदम है, पर इसके साथ सट्टेबाज़ी के जोखिम भी बढ़ते हैं जिनका ज़िक्र खुद गवर्नर ने किया। भुगतान संतुलन की चुनौतियों के बीच ये घोषणाएँ समयोचित हैं, लेकिन इनका प्रभाव तभी टिकाऊ होगा जब क्रियान्वयन की रूपरेखा पारदर्शी और त्वरित हो।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरबीआई ने एनआरआई और ओसीआई की इक्विटी निवेश सीमा क्यों बढ़ाई?
RBI ने यह कदम विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ाने और भारत के भुगतान संतुलन को मज़बूत करने के लिए उठाया है। SEBI पंजीकरण की अनिवार्यता हटाने से NRI, OCI और PROI के लिए शेयर बाज़ार में निवेश करना अधिक सुलभ हो जाएगा।
पीआरओआई (PROI) को एनआरआई जैसी सुविधा मिलने का क्या मतलब है?
अब सभी व्यक्तिगत विदेशी निवासी व्यक्ति (PROI) भी SEBI पंजीकरण के बिना भारतीय इक्विटी साधनों में उसी सीमा तक निवेश कर सकेंगे जितना NRI और OCI कर सकते हैं। इससे भारतीय बाज़ार में विदेशी भागीदारी का आधार व्यापक होगा।
एफएआर (FAR) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में क्या बदलाव हुआ?
RBI ने FAR के अंतर्गत 'निर्दिष्ट प्रतिभूतियों' में 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाली सभी नई सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक G-Sec में निवेश के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
एफपीआई पर से कौन-सी सीमाएँ हटाई गई हैं?
General Route के तहत FPI के निवेश पर लागू अल्पकालिक निवेश सीमा, निवेश एकाग्रता सीमा और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से जुड़ी सीमाएँ हटा दी गई हैं। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में अधिक लचीलेपन के साथ निवेश करने की सुविधा मिलेगी।
आरबीआई की विनिमय दर नीति में कोई बदलाव हुआ है?
नहीं, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि विनिमय दर नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विनिमय दर बाज़ार की ताकतों द्वारा निर्धारित होती रहेगी, हालाँकि अत्यधिक अस्थिरता की स्थिति में RBI हस्तक्षेप करने का अधिकार सुरक्षित रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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