एफसीएनआर(बी) प्रोत्साहन योजना समय से पहले नहीं होगी बंद: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि फॉरेन करेंसी नॉन-रेज़िडेंट (बैंक) — यानी एफसीएनआर(बी) — जमा प्रोत्साहन योजना को निर्धारित समय से पहले समाप्त करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह बात कही और संकेत दिया कि योजना अपनी निर्धारित अवधि तक पूरी तरह जारी रहेगी।
योजना की उपलब्धियाँ अब तक
31 जुलाई 2026 तक भारतीय बैंक एफसीएनआर जमा के माध्यम से $36.7 अरब (लगभग ₹3 लाख करोड़) जुटाने में सफल रहे हैं। यह प्रवाह ऐसे समय में आया जब वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव बन रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार इस पूंजी प्रवाह की बदौलत भारत का विदेशी मुद्रा भंडार आने वाले कुछ सप्ताहों में $700 अरब के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकता है।
देश के प्रमुख वाणिज्यिक बैंक — भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और ICICI बैंक — इस विशेष डॉलर जुटाने की पहल के तहत आए कुल निवेश का आधे से अधिक हिस्सा अकेले आकर्षित करने में सफल रहे हैं।
शून्य-लागत स्वैप सुविधा भी जारी
RBI द्वारा बैंकों को उपलब्ध कराई गई रियायती शून्य-लागत स्वैप (जीरो-कॉस्ट स्वैप) सुविधा भी पूरी तरह सक्रिय है। यह सुविधा अपनी निर्धारित अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। इसी समयसीमा तक ब्याज दर संबंधी छूट भी प्रभावी है।
ब्याज दर प्रतिबंधों में दी गई ढील
विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत बनाने के उद्देश्य से RBI ने अनिवासी भारतीयों (NRI) की जमा योजनाओं पर ब्याज दर संबंधी कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी थी। इसके तहत तीन वर्ष से अधिक और पाँच वर्ष तक की अवधि वाले नए एफसीएनआर(बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा हटा दी गई है। इसके अलावा, तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि वाले नए नॉन-रेज़िडेंट एक्सटर्नल (NRE) जमा पर ब्याज दर प्रतिबंध भी समाप्त कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि पहले बैंकों को यह सुनिश्चित करना पड़ता था कि NRE जमा पर दी जाने वाली ब्याज दरें समान अवधि की घरेलू सावधि जमा (FD) से अधिक न हों। वहीं, 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले एफसीएनआर(बी) जमा पर ब्याज दर की सीमा लागू संदर्भ दर (रेफरेंस रेट) के साथ 350 बेसिस पॉइंट जोड़कर तय की जाती थी।
आरबीआई गवर्नर के प्रमुख बयान
मल्होत्रा ने कहा, 'इन उपायों के लागू होने से पहले भी भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति काफी मज़बूत और संतोषजनक थी। इन कदमों ने इसे और अधिक सुदृढ़ बनाया है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि RBI किसी विशेष विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) को लक्ष्य बनाकर काम नहीं करता — केंद्रीय बैंक की नीति यह है कि बाज़ार तय दायरे के भीतर रुपये की कीमत निर्धारित करे।
उन्होंने आगे कहा, 'हम केवल तब हस्तक्षेप करते हैं, जब बाज़ार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव हो या सट्टेबाज़ी का दबाव तेज़ी से बढ़ने लगे।' मल्होत्रा ने भरोसा दिलाया कि केंद्रीय बैंक रुपये की चाल को व्यवस्थित बनाए रखेगा ताकि विनिमय दर में असामान्य उतार-चढ़ाव और अनावश्यक अटकलों का माहौल न बने।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बीच भारत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को और मज़बूत करने की कोशिश में है। 30 सितंबर 2026 की समयसीमा नज़दीक आने के साथ बाज़ार की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि RBI इस योजना की समाप्ति के बाद पूंजी प्रवाह को बनाए रखने के लिए क्या वैकल्पिक कदम उठाता है।