20 सितंबर 2026
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टाटा संस चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का बड़ा बयान: भारत सबसे तेज विकास के दौर में, एआई से उभरेंगे नए सेक्टर

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टाटा संस चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का बड़ा बयान: भारत सबसे तेज विकास के दौर में, एआई से उभरेंगे नए सेक्टर

सारांश

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चेन्नई की साईं यूनिवर्सिटी में कहा कि भारत अपने इतिहास की सबसे तेज आर्थिक वृद्धि के दौर में कदम रख रहा है। एआई को खतरा नहीं, अवसर बताते हुए उन्होंने युवाओं को 'डुअल रेस' अपनाने और क्रिएटिविटी विकसित करने की सलाह दी।

मुख्य बातें

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने 20 सितंबर 2026 को साईं यूनिवर्सिटी, चेन्नई में दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि 'हमारे अपने इतिहास और दुनिया के किसी भी हिस्से से बेमिसाल' होगी और कई दशकों तक जारी रह सकती है।
एआई के कारण भविष्य में ऐसे नए सेक्टर उभरेंगे जिनकी अभी कल्पना कठिन है — रोज़गार का खतरा नहीं, बल्कि अवसर अधिक हैं।
ग्रेजुएट्स को 'डुअल रेस' अपनाने की सलाह — दीर्घकालिक लक्ष्य और अल्पकालिक उपलब्धियाँ, दोनों साथ-साथ।
उन्होंने जिज्ञासा, क्रिएटिविटी और विविध हुनर वाले लोगों के साथ काम करने पर विशेष जोर दिया।

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने 20 सितंबर 2026 को चेन्नई स्थित साईं यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत अपने इतिहास के सबसे तेज आर्थिक विकास के दौर में प्रवेश करने की कगार पर है। उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), उभरती टेक्नोलॉजी और नए नियामक बदलाव मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का पुनर्गठन करेंगे और ऐसे नए क्षेत्र सामने लाएंगे जिनकी फिलहाल कल्पना करना कठिन है।

भारत की विकास-यात्रा पर चंद्रशेखरन का दृष्टिकोण

चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत आज 'बहुत मजबूत स्थिति' में है और देश की आर्थिक वृद्धि 'हमारे अपने इतिहास में और दुनिया के किसी भी हिस्से के मुकाबले बेमिसाल होगी।' उन्होंने यह भी कहा कि यह विकास-गाथा कई दशकों तक जारी रह सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारत अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि-पथ पर बना हुआ है।

एआई और नई टेक्नोलॉजी: खतरा नहीं, अवसर

एआई के कारण रोज़गार घटने की बहस पर चंद्रशेखरन ने संतुलित दृष्टिकोण रखा। उन्होंने स्वीकार किया कि इस विषय पर व्यापक चर्चा जारी है, लेकिन साथ ही जोर देकर कहा कि नई टेक्नोलॉजी अपने साथ कई बड़े अवसर भी लेकर आती है। उनके अनुसार एआई आने वाले समय में ऐसे नए सेक्टर पैदा करेगा जिनका आज अंदाजा लगाना मुश्किल है — यानी नुकसान से ज़्यादा संभावनाएं हैं।

ग्रेजुएट्स को 'डुअल रेस' की सलाह

चंद्रशेखरन ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित ग्रेजुएट्स को 'डुअल रेस' की अवधारणा समझाई — यानी दीर्घकालिक लक्ष्यों पर काम करते हुए अल्पकालिक उपलब्धियाँ भी हासिल करना, ताकि करियर में गति और प्रेरणा बनी रहे। उन्होंने मैराथन दौड़ का उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति को दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी खुद की तरक्की के पैमाने पर खुद को आँकना चाहिए।

युवाओं के लिए संदेश: जिज्ञासा, क्रिएटिविटी और सहयोग

उन्होंने ग्रेजुएट्स को नई चीजें सीखने की उत्सुकता बनाए रखने, विविध हुनर वाले लोगों के साथ काम करने और क्रिएटिविटी विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया — विशेषकर व्यापार के क्षेत्र में। उन्होंने कहा, 'बिजनेस में क्रिएटिविटी बहुत कीमती है।' साथ ही उन्होंने अपने कार्यों और उनसे मिली सीख पर निरंतर चिंतन करने की भी सलाह दी।

क्या होगा आगे

टाटा संस के शीर्ष नेतृत्व का यह आशावादी बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत में तकनीकी क्षेत्र में निवेश और एआई-आधारित स्टार्टअप की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चंद्रशेखरन का यह संबोधन युवा पेशेवरों को न केवल करियर की दिशा देता है, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका पर उद्योग जगत के विश्वास को भी रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऐसे परिवर्तन अक्सर असमान रूप से फायदा पहुँचाते हैं — उच्च-कौशल श्रमिकों को अधिक और अल्प-कौशल श्रमिकों को कम। युवाओं को 'डुअल रेस' और क्रिएटिविटी की सलाह प्रेरणादायक है, किंतु जब तक नीतिगत स्तर पर कौशल-उन्नयन और रोज़गार-सृजन की ठोस योजनाएँ नहीं बनतीं, यह संदेश कॉर्पोरेट प्रेरणा से आगे नहीं जाएगा।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एन चंद्रशेखरन ने भारत के विकास के बारे में क्या कहा?
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत अपने इतिहास की सबसे तेज आर्थिक वृद्धि के दौर में प्रवेश करने वाला है, जो 'हमारे इतिहास में और दुनिया के किसी भी हिस्से के मुकाबले बेमिसाल' होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह वृद्धि कई दशकों तक जारी रह सकती है।
चंद्रशेखरन के अनुसार एआई से भारत में क्या बदलाव आएगा?
उनके अनुसार एआई आने वाले समय में ऐसे नए सेक्टर पैदा करेगा जिनका अभी अंदाजा लगाना मुश्किल है। उन्होंने एआई को नौकरियों के लिए खतरा बताने की बजाय इसे बड़े अवसरों का स्रोत बताया।
'डुअल रेस' की अवधारणा क्या है जो चंद्रशेखरन ने समझाई?
'डुअल रेस' का अर्थ है दीर्घकालिक लक्ष्यों पर काम करते हुए अल्पकालिक उपलब्धियाँ भी हासिल करना, ताकि करियर में गति और प्रेरणा बनी रहे। चंद्रशेखरन ने यह सलाह साईं यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स को दी।
चंद्रशेखरन ने युवाओं को करियर में क्या सलाह दी?
उन्होंने युवाओं को जिज्ञासा बनाए रखने, विविध हुनर वाले लोगों के साथ काम करने, क्रिएटिविटी विकसित करने और मुश्किलों से निराश न होने की सलाह दी। साथ ही कहा कि दूसरों से तुलना के बजाय अपनी खुद की प्रगति को पैमाना बनाएं।
यह भाषण कहाँ और कब दिया गया?
यह भाषण 20 सितंबर 2026 को चेन्नई स्थित साईं यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में दिया गया, जहाँ एन चंद्रशेखरन मुख्य अतिथि थे।
राष्ट्र प्रेस
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