20 सितंबर 2026
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इंजीनियरिंग की सीमाएं तोड़ें युवा: मिजोरम राज्यपाल विजय कुमार सिंह का IEI समिट में आह्वान

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इंजीनियरिंग की सीमाएं तोड़ें युवा: मिजोरम राज्यपाल विजय कुमार सिंह का IEI समिट में आह्वान

सारांश

मिजोरम राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह ने नई दिल्ली में IEI की 18वीं समिट में साफ कहा — अगली पीढ़ी के इंजीनियरों को एकल-विषयक दक्षता की दीवारें तोड़नी होंगी। UPI से अंतरिक्ष कार्यक्रम तक, उन्होंने भारत की इंजीनियरिंग ताकत को रेखांकित किया और डिज़ाइन थिंकिंग व फील्ड एक्सपोज़र को शिक्षा की धुरी बनाने की वकालत की।

मुख्य बातें

मिजोरम राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें IEI इंडस्ट्री एक्सीलेंस समिट को संबोधित किया।
उन्होंने युवा इंजीनियरों से इंटरडिसिप्लिनरी सोच अपनाने और पारंपरिक एकेडमिक सीमाओं से आगे बढ़ने का आग्रह किया।
समिट की थीम 'इंजीनियरिंग इंडियाज ग्लोबल फुटप्रिंट: टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रस्ट' रही।
राज्यपाल ने UPI और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को सीमित संसाधनों में उन्नत इंजीनियरिंग के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण बताया।
इंजीनियरिंग शिक्षा में डिज़ाइन थिंकिंग , फील्ड एक्सपोज़र और इंटरडिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट पर जोर देने की वकालत की गई।

मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह ने 20 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें IEI इंडस्ट्री एक्सीलेंस समिट एंड अवार्ड्स 2026 को संबोधित करते हुए भारत के युवा इंजीनियरों से अपील की कि वे पारंपरिक एकेडमिक और प्रोफेशनल सीमाओं से आगे निकलकर इंटरडिसिप्लिनरी सोच अपनाएं। उन्होंने कहा कि देश के तकनीकी नेतृत्व का भविष्य उन्हीं इंजीनियरों के हाथों में होगा जो अलग-अलग विषयों को जोड़कर असल दुनिया की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हों।

समिट की थीम और संदर्भ

इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) (IEI) द्वारा आयोजित यह समिट 'इंजीनियरिंग इंडियाज ग्लोबल फुटप्रिंट: टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रस्ट' (भारत की वैश्विक पहचान बनाना: टेक्नोलॉजी, प्रतिभा और भरोसा) थीम पर केंद्रित रही। राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने इंजीनियरिंग को भारत के विकास की रीढ़ बताते हुए युवा प्रोफेशनल्स से इस विरासत को आगे ले जाने का आग्रह किया।

गौरतलब है कि IEI भारत की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थाओं में से एक है, और यह समिट हर वर्ष उद्योग और अकादमिक जगत के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनती है।

भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ

राज्यपाल ने कहा कि भारत की इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ आज बांध, स्टील प्लांट, राष्ट्रीय राजमार्ग, मेट्रो नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, दूरसंचार, अंतरिक्ष कार्यक्रम, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे में स्पष्ट रूप से दिखती हैं। उन्होंने विशेष रूप से यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को इंजीनियरिंग की बड़ी सफलता बताया।

उनके अनुसार UPI को अक्सर केवल फिनटेक इनोवेशन के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे इंटरऑपरेबिलिटी, डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी, रियल-टाइम प्रोसेसिंग और विशाल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी उन्नत इंजीनियरिंग है। इसी तरह, उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को असाधारण इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण बताया।

विषयों की सीमाएं मिट रही हैं

जनरल विजय कुमार सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं के बीच की सीमाएं तेज़ी से धुंधली पड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि आज सिविल इंजीनियरों को जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS), सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाइमेट मॉडलिंग जैसी तकनीकों में दक्षता हासिल करनी होगी।

मैकेनिकल इंजीनियर रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर एनर्जी स्टोरेज और स्मार्ट-ग्रिड तकनीक पर कार्यरत हैं, तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर हार्डवेयर सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी और भौतिक बुनियादी ढाँचे से तेज़ी से जुड़ रहे हैं। यह बदलाव स्पष्ट संकेत देता है कि एकल-विषयक दक्षता अब पर्याप्त नहीं।

शिक्षा प्रणाली में सुधार की ज़रूरत

राज्यपाल ने इंजीनियरिंग शिक्षा में डिज़ाइन थिंकिंग, फील्ड एक्सपोज़र, इंटरडिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट और प्रोटोटाइपिंग पर अधिक जोर देने की वकालत की। उनके अनुसार ग्रेजुएट्स को सीमित स्पेशलाइजेशन से आगे बढ़कर नए विचारों के साथ प्रयोग करने और व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के साथ-साथ मौजूदा संपत्तियों के रखरखाव पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए।

आगे की राह

राज्यपाल विजय कुमार सिंह का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब भारत 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है और तकनीकी मानव संसाधन की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। IEI जैसे मंचों से उठने वाली यह आवाज़ें नीति-निर्माताओं और शिक्षा संस्थानों के लिए दिशा-संकेत का काम कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मौजूदा विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम और फैकल्टी प्रशिक्षण इस बदलाव के लिए तैयार हैं। केवल मंच से आह्वान करने से बात नहीं बनेगी — NEP 2020 के तहत पाठ्यक्रम सुधारों की गति और उद्योग-शिक्षा साझेदारी की गुणवत्ता ही इस विज़न को ज़मीन पर उतारेगी।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ IEI इंडस्ट्री एक्सीलेंस समिट 2026 क्या था?
यह इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित वार्षिक समिट है, जो इंजीनियरिंग क्षेत्र में उत्कृष्टता को सम्मानित करती है और उद्योग-शिक्षा संवाद को बढ़ावा देती है। 2026 के संस्करण की थीम 'इंजीनियरिंग इंडियाज ग्लोबल फुटप्रिंट: टेक्नोलॉजी, टैलेंट एंड ट्रस्ट' रखी गई थी।
राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने इंजीनियरिंग शिक्षा में क्या बदलाव सुझाए?
उन्होंने डिज़ाइन थिंकिंग, फील्ड एक्सपोज़र, इंटरडिसिप्लिनरी प्रोजेक्ट और प्रोटोटाइपिंग को पाठ्यक्रम में केंद्रीय स्थान देने की वकालत की। साथ ही उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को सीमित स्पेशलाइजेशन से आगे बढ़कर व्यावहारिक समाधान खोजने की क्षमता विकसित करनी होगी।
UPI को इंजीनियरिंग की सफलता क्यों बताया गया?
राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने कहा कि UPI को आमतौर पर फिनटेक इनोवेशन माना जाता है, लेकिन इसके पीछे इंटरऑपरेबिलिटी, डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम, साइबर सिक्योरिटी और रियल-टाइम प्रोसेसिंग जैसी उन्नत इंजीनियरिंग है। इसलिए यह भारत की तकनीकी क्षमता का प्रतीक है।
इंजीनियरिंग में इंटरडिसिप्लिनरी सोच क्यों ज़रूरी है?
राज्यपाल के अनुसार इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं की सीमाएं तेज़ी से खत्म हो रही हैं — सिविल इंजीनियर को AI और GIS की ज़रूरत है, सॉफ्टवेयर इंजीनियर साइबर सिक्योरिटी और भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ रहा है। ऐसे में एकल-विषयक दक्षता अब भविष्य की चुनौतियों के लिए पर्याप्त नहीं रही।
मिजोरम के राज्यपाल जनरल विजय कुमार सिंह कौन हैं?
जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं, जो वर्तमान में मिजोरम के राज्यपाल के पद पर कार्यरत हैं। रक्षा, तकनीक और राष्ट्रीय विकास के मुद्दों पर उनके विचारों को व्यापक महत्व दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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