20 सितंबर 2026
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सीएम योगी का ऐलान: अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, हर सप्ताह होगा भर्ती इवेंट

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सीएम योगी का ऐलान: अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, हर सप्ताह होगा भर्ती इवेंट

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में 912 पुलिसकर्मियों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए ऐलान किया कि अगले छह महीनों में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी और हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती इवेंट होगा। 2027 चुनाव से पहले यह रोज़गार आक्रामकता भाजपा की रणनीतिक धुरी बनती दिख रही है।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर 2026 को घोषणा की कि अगले 6 महीनों में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी।
लोक भवन, लखनऊ में आयोजित समारोह में 912 अभ्यर्थियों को पुलिस उपनिरीक्षक एवं सहायक उपनिरीक्षक के पदों पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।
19 सितंबर को 818 और 22 सितंबर को अगले चरण में नियुक्ति पत्र वितरण निर्धारित है।
महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 10,000 से कम से बढ़कर 44,000 से अधिक हुई; इस वर्ष के अंत तक 50,000 का लक्ष्य।
पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 6,000 से बढ़कर 60,000 एक साथ हुई; 110 एकड़ भूमि पर UP स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट स्थापित।
पेपर लीक और भर्ती घोटालों के दोषियों के लिए आजीवन कारावास और संपत्ति जब्ती का कानून लागू।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर 2026 को लखनऊ के लोक भवन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में घोषणा की कि अगले छह महीनों में प्रदेश के 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी और हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती इवेंट आयोजित किया जाएगा। यह समारोह उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के तहत आयोजित किया गया, जिसमें 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

नियुक्ति पत्र वितरण का क्रम

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि शनिवार, 19 सितंबर को 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए गए और रविवार, 20 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि 22 सितंबर को पुनः नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। योगी ने कहा, 'विपक्ष गिनता जाए, सरकार नियुक्तियाँ देती जाएगी।'

2017 से पहले की भर्ती प्रक्रिया की खामियाँ

मुख्यमंत्री ने 2017 से पूर्व की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, उस दौर में भाई-भतीजावाद इतना हावी था कि पारदर्शी भर्ती की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस में ऐसी भर्तियाँ हुईं जिनमें परीक्षा कोई और देता था और नियुक्ति पत्र किसी और को मिलता था — यहाँ तक कि जो अभ्यर्थी आवेदन तक नहीं करते थे, उन्हें भी नियुक्ति पत्र बाँट दिए जाते थे।

गौरतलब है कि उस समय प्रदेश में पेपर लीक के मामले सामने आना सामान्य बात हो गई थी और भर्तियाँ न्यायालयों में वर्षों तक अटकी रहती थीं। योगी के अनुसार, 2017 में यूपी पुलिस के आधे से अधिक पद रिक्त थे — प्रदेश में 4 लाख पुलिसकर्मियों की आवश्यकता के विरुद्ध 2 लाख से भी कम तैनात थे।

भर्ती सुधार और पारदर्शिता

योगी सरकार ने 2017 के बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लोक सेवा आयोग, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और शिक्षा-संबंधी भर्ती प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार किए। समूह 'ग' और 'घ' की भर्ती से साक्षात्कार समाप्त किया गया। पेपर लीक और अवैध भर्ती गतिविधियों में संलिप्त लोगों के लिए आजीवन कारावास और संपत्ति जब्ती तक के प्रावधान वाला कड़ा कानून बनाया गया।

प्रशिक्षण क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले एक साथ केवल 6,000 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने की क्षमता थी, जो अब बढ़कर 60,000 हो गई है। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 10,000 से कम से बढ़कर 44,000 से अधिक हो गई है और वर्तमान भर्ती पूरी होने के बाद इस वर्ष के अंत तक यह संख्या 50,000 तक पहुँचने का अनुमान है।

यूपी पुलिस का आधुनिकीकरण

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है और एयरपोर्ट के पास 110 एकड़ भूमि को कब्जे से मुक्त कराकर इसके लिए उपयोग में लाया गया है। प्रत्येक रेंज में फॉरेंसिक लैब स्थापित है, सात शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है और हर जिले में साइबर थाने तथा प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क बनाई गई है। पीएसी की 34 समाप्त कंपनियाँ पुनर्गठित की गई हैं और तीन महिला पीएसी बटालियन बनाई गई हैं, जिन्हें बढ़ाकर छह किया जा रहा है। 56 जिलों में सबसे ऊँची इमारत पुलिस बैरक या आवासीय सुविधा की है।

विपक्ष पर तीखा प्रहार

मुख्यमंत्री योगी ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिन्होंने अपनी अकर्मण्यता और अक्षमता से उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' बनाया, उन्हें यूपी पुलिस या प्रदेश की व्यवस्था पर बोलने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बरेली, अलीगढ़, मेरठ और मुजफ्फरनगर समेत कई हिस्सों में दंगों की स्थिति रहती थी और महीनों कर्फ्यू लगा रहता था। आज प्रदेश 'कर्फ्यू मुक्त और माफिया मुक्त' बन चुका है और महाकुंभ जैसे विशाल आयोजन सकुशल संपन्न हो रहे हैं।

यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ परदे के पीछे शुरू हो चुकी हैं — रोज़गार और कानून-व्यवस्था दोनों ही भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दे रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

भर्ती की समयसीमा और बजटीय प्रावधान का कोई विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 44,000 पार करना और प्रशिक्षण क्षमता का 10 गुना बढ़ना निर्विवाद उपलब्धियाँ हैं, परन्तु इन्हें 2027 के पहले जनता के सामने और अधिक ज़ोर से रखा जाएगा — यह तय है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम योगी ने 1 लाख सरकारी नौकरियों का ऐलान कब और कहाँ किया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 सितंबर 2026 को लखनऊ के लोक भवन में आयोजित यूपी पुलिस नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगले छह महीनों में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जाएगी और हर सप्ताह एक बड़ा भर्ती इवेंट होगा।
20 सितंबर 2026 को कितने अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिले?
20 सितंबर को पुलिस उपनिरीक्षक गोपनीय, पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक और पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लेखा के पदों पर चयनित 912 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इससे एक दिन पहले 19 सितंबर को 818 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके थे।
2017 से पहले यूपी पुलिस भर्ती में क्या खामियाँ थीं?
सीएम योगी के अनुसार, 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद हावी था — परीक्षा कोई और देता था और नियुक्ति पत्र किसी और को मिलता था। पेपर लीक सामान्य थे, भर्तियाँ न्यायालयों में वर्षों तक अटकी रहती थीं और प्रदेश में 4 लाख की ज़रूरत के मुकाबले 2 लाख से भी कम पुलिसकर्मी तैनात थे।
उत्तर प्रदेश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या कितनी हो गई है?
2017 से पहले प्रदेश में 10,000 से भी कम महिला पुलिसकर्मी थीं। अब यह संख्या 44,000 से अधिक हो चुकी है। वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं के पूरा होने पर इस वर्ष के अंत तक यह संख्या 50,000 तक पहुँचने का अनुमान है।
यूपी पुलिस में पेपर लीक के दोषियों को क्या सजा का प्रावधान है?
योगी सरकार ने पेपर लीक और भर्ती से जुड़े अवैध धंधे में शामिल लोगों के लिए एक कड़ा कानून बनाया है, जिसमें आजीवन कारावास की सजा और पूरी संपत्ति जब्त करने तक का प्रावधान है।
राष्ट्र प्रेस
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