योगी का ऐलान: अगले 6 महीने में 1 लाख से अधिक नियुक्तियाँ, 2017 से पहले भर्ती में होती थी 'लूट'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया कि अगले छह महीनों में राज्य सरकार एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देगी। इसके साथ ही उन्होंने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता से नहीं, बल्कि 'लूट' के आधार पर चलती थी।
नियुक्तियों की संख्या और वर्तमान उपलब्धि
मुख्यमंत्री योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में नियुक्ति-पत्र दे चुकी है। उन्होंने कहा, 'ये साढ़े 9 लाख नियुक्ति-पत्र जो हमने पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में दिए हैं, उसके परिणाम हमारे सामने हैं।'
19 सितंबर के इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियाँ प्रदान की गईं। योगी ने विपक्ष को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि जो लोग उनकी सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, वे बस नियुक्तियों की संख्या गिनते रहें।
2017 से पहले की व्यवस्था पर हमला
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती बोर्डों और आयोगों में 'भाई-भतीजों' को बैठाकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को बदनाम कर दिया गया था। उनके अनुसार, उस दौर में एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी, जिससे युवा पलायन के लिए मजबूर हो जाते थे।
उन्होंने कहा, 'युवा पलायन करता था, उसके सामने एक तरफ कुआं था, दूसरी तरफ खाई थी।' योगी ने यह भी दावा किया कि उस समय उत्तर प्रदेश के नाम पर किसी व्यक्ति को कहीं स्थान नहीं मिलता था और युवाओं के सामने पहचान का गहरा संकट था।
समाजवादी पार्टी पर सीधा निशाना
मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नौकरियों में पहले 'डकैती डालने के लिए चाचा-भतीजे की जोड़ी निकल पड़ती थी' और आज वही लोग उपदेशक की भूमिका में आ गए हैं। उन्होंने कहा, '2027 के बाद उपदेशक भी नहीं रह पाएंगे।'
योगी ने यह भी आरोप लगाया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) का अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो उस पद के लिए स्वयं योग्य नहीं था। उनके अनुसार, मामला न्यायालय तक पहुँचा और अदालत को उस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश देना पड़ा।
पारदर्शी भर्ती व्यवस्था का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भर्ती बोर्ड और आयोग राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होते हैं और परीक्षाएं पारदर्शी तथा निष्पक्ष तरीके से संपन्न होती हैं, तो परिणाम भी उसी तरह सामने आते हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था और भर्ती व्यवस्था दोनों में बुनियादी बदलाव किए हैं।
गौरतलब है कि योगी ने कहा कि प्रदेश बीमार नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की 'मानसिकता बीमार' थी और उनकी कार्यप्रणाली भ्रष्ट थी। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं और सरकारी रोज़गार का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में केंद्रीय स्थान ले चुका है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार के अनुसार अगले छह महीनों में एक लाख से अधिक युवाओं को नौकरी देने का अभियान शुरू किया जाएगा। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब विपक्षी दलों ने भर्ती घोटालों और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखा है। यदि सरकार यह लक्ष्य हासिल कर लेती है, तो यह आगामी चुनाव प्रचार में एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में काम आ सकता है।