19 सितंबर 2026
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योगी का ऐलान: अगले 6 महीने में 1 लाख से अधिक नियुक्तियाँ, 2017 से पहले भर्ती में होती थी 'लूट'

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योगी का ऐलान: अगले 6 महीने में 1 लाख से अधिक नियुक्तियाँ, 2017 से पहले भर्ती में होती थी 'लूट'

सारांश

योगी आदित्यनाथ का यह ऐलान महज एक प्रशासनिक घोषणा नहीं — यह 2027 चुनावों से पहले रोज़गार की राजनीति पर सीधा दांव है। साढ़े नौ लाख नियुक्तियों के दावे और अगले छह महीनों में एक लाख और नौकरियों के वादे के साथ, उन्होंने विपक्ष को उसी मैदान पर चुनौती दी है जहाँ वह सबसे कमज़ोर है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में अगले 6 महीनों में 1 लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियों का ऐलान किया।
उनके अनुसार, वर्तमान सरकार अब तक करीब साढ़े 9 लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से नियुक्ति-पत्र दे चुकी है।
योगी ने दावा किया कि 2017 से पहले भर्ती बोर्डों और आयोगों में राजनीतिक 'भाई-भतीजावाद' और भ्रष्टाचार हावी था।
उन्होंने समाजवादी पार्टी पर 'चाचा-भतीजे की जोड़ी' का हवाला देते हुए नौकरियों में 'डकैती' का आरोप लगाया।
UPPSC के पूर्व अध्यक्ष की नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय तक पहुँचा और अदालत को कड़ी कार्रवाई का निर्देश देना पड़ा।
योगी ने 2027 विधानसभा चुनावों का अप्रत्यक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि विपक्ष '2027 के बाद उपदेशक भी नहीं रह पाएगा।'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित नियुक्ति-पत्र वितरण कार्यक्रम में बड़ा ऐलान किया कि अगले छह महीनों में राज्य सरकार एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी देगी। इसके साथ ही उन्होंने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती प्रक्रिया पारदर्शिता से नहीं, बल्कि 'लूट' के आधार पर चलती थी।

नियुक्तियों की संख्या और वर्तमान उपलब्धि

मुख्यमंत्री योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में नियुक्ति-पत्र दे चुकी है। उन्होंने कहा, 'ये साढ़े 9 लाख नियुक्ति-पत्र जो हमने पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में दिए हैं, उसके परिणाम हमारे सामने हैं।'

19 सितंबर के इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियाँ प्रदान की गईं। योगी ने विपक्ष को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि जो लोग उनकी सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाते हैं, वे बस नियुक्तियों की संख्या गिनते रहें।

2017 से पहले की व्यवस्था पर हमला

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में भर्ती बोर्डों और आयोगों में 'भाई-भतीजों' को बैठाकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को बदनाम कर दिया गया था। उनके अनुसार, उस दौर में एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी, जिससे युवा पलायन के लिए मजबूर हो जाते थे।

उन्होंने कहा, 'युवा पलायन करता था, उसके सामने एक तरफ कुआं था, दूसरी तरफ खाई थी।' योगी ने यह भी दावा किया कि उस समय उत्तर प्रदेश के नाम पर किसी व्यक्ति को कहीं स्थान नहीं मिलता था और युवाओं के सामने पहचान का गहरा संकट था।

समाजवादी पार्टी पर सीधा निशाना

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नौकरियों में पहले 'डकैती डालने के लिए चाचा-भतीजे की जोड़ी निकल पड़ती थी' और आज वही लोग उपदेशक की भूमिका में आ गए हैं। उन्होंने कहा, '2027 के बाद उपदेशक भी नहीं रह पाएंगे।'

योगी ने यह भी आरोप लगाया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) का अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो उस पद के लिए स्वयं योग्य नहीं था। उनके अनुसार, मामला न्यायालय तक पहुँचा और अदालत को उस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश देना पड़ा।

पारदर्शी भर्ती व्यवस्था का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भर्ती बोर्ड और आयोग राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होते हैं और परीक्षाएं पारदर्शी तथा निष्पक्ष तरीके से संपन्न होती हैं, तो परिणाम भी उसी तरह सामने आते हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था और भर्ती व्यवस्था दोनों में बुनियादी बदलाव किए हैं।

गौरतलब है कि योगी ने कहा कि प्रदेश बीमार नहीं था, बल्कि तत्कालीन सरकारों की 'मानसिकता बीमार' थी और उनकी कार्यप्रणाली भ्रष्ट थी। यह बयान ऐसे समय आया है जब 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं और सरकारी रोज़गार का मुद्दा प्रदेश की राजनीति में केंद्रीय स्थान ले चुका है।

आगे क्या होगा

राज्य सरकार के अनुसार अगले छह महीनों में एक लाख से अधिक युवाओं को नौकरी देने का अभियान शुरू किया जाएगा। यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब विपक्षी दलों ने भर्ती घोटालों और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखा है। यदि सरकार यह लक्ष्य हासिल कर लेती है, तो यह आगामी चुनाव प्रचार में एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में काम आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कितने पहले से रिक्त थे? असली सवाल यह है कि क्या अगले छह महीनों में एक लाख नियुक्तियों का लक्ष्य विभागवार समयसीमा के साथ बाध्यकारी है या फिर यह चुनावी मौसम का एक और वादा बनकर रह जाएगा। पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं की शिकायतें वर्तमान सरकार के कार्यकाल में भी आई हैं — इस विरोधाभास को मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कितनी नई नियुक्तियों का ऐलान किया?
मुख्यमंत्री योगी ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में अगले छह महीनों में एक लाख से अधिक सरकारी नियुक्तियाँ देने का ऐलान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संख्या एक लाख से 'कम नहीं, बल्कि उससे अधिक' होगी।
योगी सरकार अब तक कितने युवाओं को नौकरी दे चुकी है?
मुख्यमंत्री के दावे के अनुसार उनकी सरकार अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को पारदर्शी तरीके से विभिन्न विभागों में नियुक्ति-पत्र दे चुकी है। यह आँकड़ा सरकार का स्वयं का दावा है।
योगी ने 2017 से पहले की भर्ती व्यवस्था पर क्या आरोप लगाए?
योगी ने आरोप लगाया कि 2017 से पहले भर्ती बोर्डों और आयोगों में 'भाई-भतीजों' को बैठाकर पूरी प्रक्रिया भ्रष्ट की गई थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी, जिससे युवा रोज़गार के लिए पलायन करने पर मजबूर होते थे।
UPPSC के बारे में योगी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो उस पद के लिए योग्य नहीं था। उनके अनुसार, मामला न्यायालय तक पहुँचा और अदालत को उस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश देना पड़ा।
यह नियुक्ति घोषणा राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और सरकारी रोज़गार का मुद्दा युवा मतदाताओं के लिए बेहद संवेदनशील है। योगी ने विपक्ष को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि '2027 के बाद वे उपदेशक भी नहीं रह पाएंगे', जो इस घोषणा के चुनावी आयाम को स्पष्ट करता है।
राष्ट्र प्रेस
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