IIT मद्रास टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन 2026: धर्मेंद्र प्रधान बोले, रिसर्च अकादमिक सीमाओं से बाहर निकलकर समाज को दे ठोस समाधान

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IIT मद्रास टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन 2026: धर्मेंद्र प्रधान बोले, रिसर्च अकादमिक सीमाओं से बाहर निकलकर समाज को दे ठोस समाधान

सारांश

IIT मद्रास का पहला टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन महज एक आयोजन नहीं था — यह भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा का सार्वजनिक एलान था। धर्मेंद्र प्रधान की चेतावनी कि भारतीय नवाचार विदेश में परिपक्व होकर वापस आयात होता है, एक गहरी खामी की ओर इशारा करती है — और 'बोधन AI' जैसी पहलें उसी खाई को पाटने की कोशिश हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 5 मई 2026 को नई दिल्ली में IIT मद्रास के पहले टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन किया।
सम्मेलन में AI, सेमीकंडक्टर, हेल्थ टेक और सस्टेनेबिलिटी को प्रमुख तकनीकी प्राथमिकताएँ बताया गया।
IIT मद्रास ने 240 से अधिक पेटेंट और 40 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स की उपलब्धि प्रदर्शित की।
'बोधन एआई' उत्कृष्टता केंद्र की घोषणा; 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को AI-आधारित शिक्षण प्रशिक्षण का लक्ष्य।
सरकार ने R&D के लिए बड़े निवेश कोष की योजना बताई, जिसमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को केंद्रीय भूमिका मिलेगी।
कामाकोटी ने उद्योग और नीति निर्माताओं से 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य हेतु सामूहिक प्रयास की अपील की।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 5 मई 2026 को नई दिल्ली में आईआईटी मद्रास के पहले टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि अनुसंधान और नवाचार को अकादमिक सीमाओं से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन के ठोस समाधानों में बदलना अब समय की माँग है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि भारतीय प्रतिभा विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है, परंतु देश के भीतर उसी स्तर का नवाचार अभी पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाया है।

शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

आईआईटी मद्रास द्वारा आयोजित यह पहला टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन 'आईआईटीएम का योगदान, भारत के लिए सब मिलकर करें निर्माण' थीम के तहत आयोजित किया गया। संस्थान के अनुसार यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की भावी तकनीकी रूपरेखा तैयार करने का एक गंभीर और व्यापक प्रयास है। इसमें सरकार, उद्योग जगत और शिक्षा जगत की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। सम्मेलन का मूल उद्देश्य भारत को 'विकसित राष्ट र' बनाने के लिए प्रौद्योगिकी को केंद्रीय भूमिका में स्थापित करना है।

प्रमुख तकनीकी प्राथमिकताएँ

शिखर सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थ सर्विसेज टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, सस्टेनेबिलिटी और अन्य उभरते तकनीकी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। शिक्षा मंत्री प्रधान ने इस अवसर पर संकेत दिया कि भारतीयों द्वारा विकसित तकनीक अक्सर विदेशी बाज़ारों में परिपक्व होती है, और बाद में भारतीय उद्योगों को उसी तकनीक को आयात करना पड़ता है। उन्होंने इस स्थिति को देश के लिए एक साथ चुनौती और अवसर दोनों बताया।

सरकार की R&D निवेश योजना

प्रधान ने बताया कि सरकार अनुसंधान एवं विकास को नई गति देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की योजना बना रही है। इसमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को प्रमुख भूमिका दी जाएगी। प्रस्तावित बड़े कोष के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने, अनुसंधान अवसंरचना को मज़बूत करने और तकनीक को बाज़ार तक पहुँचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है।

IIT मद्रास की उपलब्धियाँ

आईआईटी मद्रास ने इस सम्मेलन के दौरान अपनी अनुसंधान क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। संस्थान के 15 उत्कृष्टता केंद्र, 240 से अधिक पेटेंट और 40 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बना रहे हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी ने कहा कि आईआईटी मद्रास अब केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने वाला अग्रणी संस्थान बन चुका है। उन्होंने उद्योग, कॉर्पोरेट जगत और नीति निर्माताओं से अपील की कि वे मिलकर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को साकार करें।

बोधन AI और डिजिटल शिक्षा की नई पहल

सम्मेलन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि शिक्षा में AI को बढ़ावा देने के लिए 'बोधन एआई' नामक नए उत्कृष्टता केंद्र की घोषणा रही। इस पहल के तहत 2027 तक 10 लाख से अधिक शिक्षकों को AI-आधारित शिक्षण के लिए प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही एक डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा जो शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाएगा। उद्योग जगत के साथ नई साझेदारियों के तहत स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी और सस्टेनेबल विकास के क्षेत्रों में नए अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह सम्मेलन भारत के तकनीकी भविष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दशकों पुरानी नीतिगत विफलता को रेखांकित करती है — और महज एक शिखर सम्मेलन से यह नहीं बदलेगी। '240 पेटेंट और 40 स्टार्टअप्स' की उपलब्धियाँ प्रभावशाली हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि इनमें से कितने बाज़ार में टिके और कितनों ने रोज़गार सृजित किए। 'बोधन AI' जैसी पहलें तभी सार्थक होंगी जब उनके पीछे दीर्घकालिक वित्त पोषण और जवाबदेही ढाँचा हो — जिसका ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IIT मद्रास टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन 2026 क्या है?
यह IIT मद्रास द्वारा नई दिल्ली में 5 मई 2026 को आयोजित पहला टेक्नोलॉजी शिखर सम्मेलन है, जिसमें AI, सेमीकंडक्टर, हेल्थ टेक और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत की सामूहिक भागीदारी रही। इसका उद्देश्य भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रौद्योगिकी को केंद्रीय भूमिका में स्थापित करना है।
बोधन एआई उत्कृष्टता केंद्र क्या है और इसका लक्ष्य क्या है?
'बोधन एआई' IIT मद्रास द्वारा शिक्षा में AI को बढ़ावा देने के लिए घोषित नया उत्कृष्टता केंद्र है। इसके तहत 2027 तक 10 लाख से अधिक शिक्षकों को AI-आधारित शिक्षण के लिए प्रशिक्षित करने और एक डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय नवाचार पर क्या चिंता जताई?
शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि भारतीय प्रतिभा वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट है, लेकिन देश के भीतर नवाचार पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाया है। उन्होंने संकेत दिया कि भारतीयों द्वारा विकसित तकनीक अक्सर विदेशी बाज़ारों में परिपक्व होती है और बाद में भारतीय उद्योगों को उसी तकनीक को आयात करना पड़ता है।
IIT मद्रास ने अब तक कितने पेटेंट और स्टार्टअप्स हासिल किए हैं?
IIT मद्रास ने पिछले कुछ वर्षों में 240 से अधिक पेटेंट हासिल किए हैं और 40 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स को जन्म दिया है। संस्थान के 15 उत्कृष्टता केंद्र देश में उच्चस्तरीय अनुसंधान के मज़बूत आधार का प्रमाण हैं।
सरकार R&D निवेश के लिए क्या योजना बना रही है?
केंद्र सरकार अनुसंधान एवं विकास को नई गति देने के लिए एक बड़े निवेश कोष की योजना बना रही है, जिसमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स को प्रमुख भूमिका दी जाएगी। इस कोष का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान अवसंरचना को मज़बूत करना और तकनीक को बाज़ार तक पहुँचाना है, हालाँकि अभी तक इसकी विस्तृत राशि सार्वजनिक नहीं की गई है।
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