क्या केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अगले 25 साल का शैक्षणिक रोडमैप तैयार किया?

सारांश
Key Takeaways
- 25 वर्ष का रोडमैप तैयार किया गया है।
- IIT को समावेशी और शोध-संचालित बनाना है।
- शैक्षणिक प्रगति का जायजा लिया गया।
- प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्यों के अनुरूप विकास की दिशा में कार्य होगा।
- आईआईटी को देश की उच्च शिक्षा का हीरा बताया गया।
नई दिल्ली, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में सोमवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान परिषद की 56वीं बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में शैक्षणिक प्रगति के लिए अगले 25 वर्षों का रोडमैप तैयार किया गया है। इस बात की जानकारी धर्मेंद्र प्रधान ने साझा की।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि शैक्षणिक प्रगति का मूल्यांकन करने और भविष्य के लिए रोडमैप तैयार करने हेतु 56वीं IIT परिषद बैठक की अध्यक्षता करना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने बताया कि हमारे IIT को अधिक समावेशी, शोध-संचालित और 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना आवश्यक है, और ये प्रतिष्ठित संस्थान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर बताए गए रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप 2047 तक भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक प्रगति का नेतृत्व करेंगे।
उन्होंने बताया कि हमारे IIT हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली के मुकुट रत्न हैं। ये 'समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने में एक केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के 100 साल पूरे होने तक IIT इंजीनियरिंग शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक और सामाजिक विकास की दिशा तय करेंगे। उन्होंने IIT संस्थानों को देश की उच्च शिक्षा प्रणाली का हीरा बताया।
हाल ही में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने IIT दिल्ली के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अटूट समर्थन से, हमारे प्रतिभाशाली युवाशक्ति टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और उद्यमिता के नए नियम लिखेंगे और एक 'समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत' का निर्माण करेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे IIT संस्थान आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बनेंगे।
केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि हमारी युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ता और संकल्प, आत्मनिर्भरता की खोज के साथ मिलकर भारत की क्षमताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ उसकी तकनीकी और आर्थिक संप्रभुता को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।