मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने IIT खड़गपुर स्पिक मैके सम्मेलन के लिए 18 सदस्यीय दल को रवाना किया
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शनिवार, 24 मई 2025 को इंफाल के लोक भवन में आयोजित एक विदाई समारोह में युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आग्रह किया। इस अवसर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर में आयोजित होने वाले 11वें स्पिक मैके इंटरनेशनल कन्वेंशन के लिए मणिपुर के 18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को आधिकारिक रूप से रवाना किया।
स्पिक मैके और इस सम्मेलन का महत्व
स्पिक मैके — यानी 'सोसायटी फॉर प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंग यूथ' — एक स्वैच्छिक और गैर-राजनीतिक सांस्कृतिक आंदोलन है, जो युवाओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, योग, ध्यान और वैश्विक सांस्कृतिक धरोहरों से जोड़ने का काम करता है।
25 से 31 मई तक चलने वाला यह सप्ताहभर का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत सहित कई देशों के युवाओं को एक मंच पर लाएगा। यह आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कला-शिक्षण और विविध पृष्ठभूमि के युवाओं के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
मणिपुर का प्रतिनिधिमंडल
मणिपुर से इस सम्मेलन में भाग लेने वाले 18 सदस्यों में मणिपुर यूनिवर्सिटी ऑफ कल्चर के छात्र और शिक्षक, तथा असम राइफल्स पब्लिक स्कूल, मणिपुखरी और केइथेलमनबी के विद्यार्थी शामिल हैं। यह प्रतिनिधिमंडल मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेगा।
राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल भल्ला ने छात्रों और शिक्षकों से सीधे संवाद करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आधुनिक और वैश्विक परिवेश में आगे बढ़ना आवश्यक है, परंतु अपनी जड़ों और परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए।
भल्ला ने प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे सम्मेलन में आयोजित कार्यशालाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विभिन्न सत्रों का अधिकतम लाभ उठाएं और अन्य राज्यों व देशों से आए प्रतिभागियों के साथ संवाद कर नए अनुभव अर्जित करें। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऐसे मंच युवाओं में सांस्कृतिक विविधता के प्रति सम्मान, समाज में एकता, रचनात्मकता और आपसी समझ को सुदृढ़ करते हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य
विदाई समारोह में असम राइफल्स के कई वरिष्ठ अधिकारी, स्पिक मैके इंफाल चैप्टर के पदाधिकारी और संबंधित विद्यालयों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। यह आयोजन मणिपुर में सांस्कृतिक संरक्षण और युवा सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर सामाजिक तनाव से उबरने की कोशिश कर रहा है — और सांस्कृतिक एकता के ऐसे प्रयास राज्य की युवा पीढ़ी के लिए एक नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।