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विदेशी निवेश को बढ़ावा: PROI सीमा 10%, FAR विस्तार और टैक्स छूट — वित्त मंत्रालय के बड़े सुधार

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विदेशी निवेश को बढ़ावा: PROI सीमा 10%, FAR विस्तार और टैक्स छूट — वित्त मंत्रालय के बड़े सुधार

सारांश

भारत ने विदेशी निवेशकों के लिए दरवाजे और चौड़े कर दिए — पीआरओआई की निवेश सीमा दोगुनी, एफएआर में दीर्घकालिक बॉन्ड शामिल, और सरकारी प्रतिभूतियों पर ब्याज व कैपिटल गेन टैक्स माफ। यह एकसाथ कई मोर्चों पर उठाया गया कदम है, जो भारत को वैश्विक बॉन्ड और इक्विटी बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्रालय ने 5 जून 2026 को भारतीय इक्विटी और सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश के लिए व्यापक सुधारों की घोषणा की।
व्यक्तिगत पीआरओआई की एकल कंपनी में निवेश सीमा 5% से बढ़ाकर 10% और कुल सीमा 10% से बढ़ाकर 24% की जाएगी।
एफएआर में 15, 30 और 40 वर्षीय सरकारी प्रतिभूतियाँ और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स शामिल किए जाएंगे।
जनरल रूट के तहत एफपीआई पर लागू तीन प्रमुख प्रतिबंध — अल्पकालिक सीमा, एकाग्रता सीमा, प्रतिभूति-विशिष्ट सीमा — हटाए जाएंगे।
सरकारी प्रतिभूतियों पर एफपीआई के ब्याज और कैपिटल गेन को आयकर से छूट , 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी।
डीईए शीघ्र ही FEMA (गैर-ऋण साधन) (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी करेगा।

वित्त मंत्रालय ने 5 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार और सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को सुगम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों की घोषणा की। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य स्थिर और दीर्घकालिक विदेशी पूंजी प्रवाह को भारतीय बाजारों की ओर आकर्षित करना है।

पीआरओआई के लिए नई निवेश सुविधा

वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषणा की थी कि भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत विदेशी नागरिक (पीआरओआई — Persons Resident Outside India) को अब सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयरों में पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से निवेश की अनुमति दी जाएगी। इससे पहले यह सुविधा केवल अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) और भारतीय मूल के विदेशी नागरिकों (ओसीआई) तक सीमित थी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, किसी एक कंपनी में व्यक्तिगत पीआरओआई की निवेश सीमा 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत की जाएगी। इसके साथ ही सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 24 प्रतिशत कर दी जाएगी।

नियामकीय बदलाव और अधिसूचना

इन सुधारों को कानूनी रूप देने के लिए आर्थिक मामलों का विभाग (डीईए) विदेशी मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण साधन) (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि सरल पंजीकरण प्रक्रिया और कम अनुपालन आवश्यकताओं से कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी और अपेक्षाकृत स्थिर विदेशी व्यक्तिगत निवेशकों का दायरा व्यापक होगा।

एफएआर का विस्तार और एफपीआई प्रतिबंध हटाए गए

सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की सरकारी प्रतिभूतियों में भागीदारी बढ़ाने के लिए पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर — Fully Accessible Route) का दायरा भी विस्तारित कर रही है। इसमें 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली नई सरकारी प्रतिभूतियों के साथ-साथ एफएआर पात्र अवधि वाले सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स को भी शामिल किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने सामान्य मार्ग (जनरल रूट) के तहत एफपीआई निवेश पर लागू तीन प्रमुख प्रतिबंध हटाने का निर्णय लिया है — अल्पकालिक निवेश सीमा, निवेश एकाग्रता सीमा और प्रतिभूति-विशिष्ट निवेश सीमा। हालाँकि, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों के बकाया स्टॉक के 6 प्रतिशत और राज्य सरकार की प्रतिभूतियों (एसजीएस) के 2 प्रतिशत की कुल निवेश सीमा यथावत बनी रहेगी।

कर छूट और दीर्घकालिक निवेशकों को प्रोत्साहन

सरकार ने घोषणा की है कि सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई द्वारा किए गए निवेश पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) को आयकर से छूट दी जाएगी। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी माना जाएगा।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन उपायों से सरकारी बॉन्ड बाजार में बेहतर यील्ड कर्व विकसित होगा और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे दीर्घकालिक एवं स्थिर निवेशकों का निवेश बढ़ेगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

आगे की राह

गौरतलब है कि ये सुधार भारत के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं जिसके तहत देश के वित्तीय बाजारों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि इन सभी बदलावों का लक्ष्य परिचालन संबंधी जटिलताओं को कम करना, बाजार तक पहुँच आसान बनाना और निवेशकों को ऐसा अनुभव देना है जो दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के बराबर हो। डीईए की अधिसूचना जारी होते ही ये प्रावधान औपचारिक रूप से लागू हो जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — डीईए की अधिसूचना अभी लंबित है और बाजार इसी का इंतजार कर रहा है। पीआरओआई की सीमा बढ़ाना सही दिशा में कदम है, पर यह वर्ग एनआरआई-ओसीआई की तुलना में आकार में छोटा है, इसलिए इक्विटी प्रवाह पर तत्काल असर सीमित हो सकता है। एफपीआई को टैक्स छूट देना अधिक प्रभावशाली संकेत है — यह वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की महत्वाकांक्षा से सीधे जुड़ता है। सवाल यह है कि क्या ये बदलाव पर्याप्त रूप से समन्वित हैं, या अलग-अलग घोषणाओं की भीड़ में निवेशक भ्रमित होंगे।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीआरओआई को भारतीय शेयर बाजार में निवेश की नई अनुमति क्या है?
भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तिगत विदेशी नागरिक (पीआरओआई) अब पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के जरिए सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों में निवेश कर सकेंगे। एकल कंपनी में उनकी सीमा 5% से बढ़कर 10% और कुल सीमा 10% से बढ़कर 24% होगी।
एफपीआई को सरकारी प्रतिभूतियों पर टैक्स छूट कब से मिलेगी?
सरकारी प्रतिभूतियों में एफपीआई के निवेश पर ब्याज और पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) को आयकर से छूट 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। यह घोषणा वित्त मंत्रालय ने 5 जून 2026 को की।
पूरी तरह सुलभ मार्ग (एफएआर) में क्या नया जोड़ा गया है?
एफएआर में अब 15 वर्ष, 30 वर्ष और 40 वर्ष की अवधि वाली नई सरकारी प्रतिभूतियाँ और एफएआर पात्र अवधि वाले सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स शामिल किए जाएंगे। इससे दीर्घकालिक विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड बाजार में अधिक विकल्प मिलेंगे।
जनरल रूट के तहत एफपीआई पर कौन से प्रतिबंध हटाए गए हैं?
सरकार ने जनरल रूट के तहत एफपीआई निवेश पर लागू तीन प्रतिबंध हटाए हैं — अल्पकालिक निवेश सीमा, निवेश एकाग्रता सीमा और प्रतिभूति-विशिष्ट निवेश सीमा। हालाँकि केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों की 6% और राज्य सरकार की प्रतिभूतियों की 2% की कुल सीमा बनी रहेगी।
इन सुधारों से भारतीय बाजार को क्या फायदा होगा?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन बदलावों से सरकारी बॉन्ड बाजार में बेहतर यील्ड कर्व विकसित होगा और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों व सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे स्थिर दीर्घकालिक निवेशकों का प्रवाह बढ़ेगा। साथ ही देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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