7 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

डीआईआई ने वित्त वर्ष 26 में ₹8.5 लाख करोड़ लगाए, एफपीआई की बिकवाली का असर किया बेअसर: सेबी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
डीआईआई ने वित्त वर्ष 26 में ₹8.5 लाख करोड़ लगाए, एफपीआई की बिकवाली का असर किया बेअसर: सेबी

सारांश

वित्त वर्ष 26 में घरेलू निवेशकों ने ₹8.5 लाख करोड़ लगाकर एफपीआई की ₹1.8 लाख करोड़ की बिकवाली को बेअसर किया। सेबी की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय बाजार अब विदेशी पूंजी पर कम और घरेलू बचत पर अधिक टिका है — यह बदलाव बाजार की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए निर्णायक है।

मुख्य बातें

डीआईआई ने वित्त वर्ष 26 में भारतीय शेयर बाजार में ₹8.5 लाख करोड़ का निवेश किया।
एफपीआई की ₹1.8 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली के बावजूद बाजार स्थिर रहा।
NSE पर डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 17% ; एफपीआई की हिस्सेदारी घटकर 15 महीने के निचले स्तर 15.8% पर।
म्यूचुअल फंड ने अकेले ₹6.4 लाख करोड़ का योगदान दिया, जिसमें SIP प्रमुख चालक रहा।
देश में डीमैट खातों की संख्या 22.5 करोड़ तक पहुँची।
कॉरपोरेट भारत ने सार्वजनिक इक्विटी पेशकशों से रिकॉर्ड ₹2.35 लाख करोड़ जुटाए — पिछले वर्ष से 11.7% अधिक।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय शेयर बाजार में ₹8.5 लाख करोड़ का निवेश किया, जिसने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ₹1.8 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली के बाजार पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक सीमित कर दिया। नई दिल्ली से जारी इस रिपोर्ट ने भारतीय पूंजी बाजार की बढ़ती घरेलू मजबूती को रेखांकित किया है।

डीआईआई और एफपीआई की बदलती हिस्सेदारी

घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी के चलते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत पर पहुँच गई है। इसके विपरीत, एफपीआई की हिस्सेदारी घटकर 15 महीने के निचले स्तर 15.8 प्रतिशत पर आ गई — जो इस बात का संकेत है कि बाजार का संतुलन धीरे-धीरे घरेलू पूंजी की ओर खिसक रहा है।

म्यूचुअल फंड और एसआईपी की अहम भूमिका

डीआईआई के कुल निवेश में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही। म्यूचुअल फंड ने अकेले ₹6.4 लाख करोड़ का योगदान दिया, जिसमें सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए लगातार प्रवाह और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी प्रमुख कारण रहे। गौरतलब है कि SIP संस्कृति के विस्तार ने छोटे शहरों और कस्बों के निवेशकों को भी बाजार से जोड़ा है।

डीमैट खाते और डिजिटल विस्तार

वित्त वर्ष 26 के दौरान देश में डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 22.5 करोड़ हो गई। सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, यह विस्तार डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं के सरलीकरण और बाजार तक आसान पहुँच का परिणाम है, जो व्यापक जन-भागीदारी को दर्शाता है।

पूंजी जुटाने में रिकॉर्ड प्रदर्शन

कॉरपोरेट भारत ने इस वित्त वर्ष में सार्वजनिक इक्विटी पेशकशों के माध्यम से रिकॉर्ड ₹2.35 लाख करोड़ जुटाए — जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है। इसमें आईपीओ, फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) और राइट्स इश्यू शामिल हैं।

एसएमई सेगमेंट में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई: रिकॉर्ड 257 कंपनियों ने एसएमई प्लेटफॉर्म के ज़रिए ₹11,587 करोड़ जुटाए। राइट्स इश्यू के माध्यम से जुटाई गई पूंजी 134.2 प्रतिशत की छलांग के साथ ₹46,168 करोड़ पर पहुँची। प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट से प्राप्त राशि 76.3 प्रतिशत बढ़कर ₹1.48 लाख करोड़ हो गई, जबकि शेयर बायबैक 143.6 प्रतिशत उछलकर ₹19,238 करोड़ पर पहुँचा।

डेट बाजार में भी सकारात्मक रुझान रहा — सार्वजनिक डेट इश्यू के ज़रिए फंड जुटाने में 39.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह ₹11,343 करोड़ हो गया।

सेबी का आकलन: परिपक्व और स्थिर बाजार की ओर

सेबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ये घटनाक्रम भारतीय पूंजी बाजार की बढ़ती परिपक्वता और मजबूती के प्रमाण हैं, जहाँ घरेलू बचत वैश्विक निवेश प्रवाह के उतार-चढ़ाव के असर को कम कर रही है। बाजार नियामक के अनुसार, घरेलू भागीदारी में वृद्धि, रिटेल निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी और पूंजी जुटाने के विविध माध्यमों ने मिलकर एक बड़े और अधिक स्थिर बाजार पारिस्थितिकी तंत्र को आकार दिया है — और यह तब हुआ जब विदेशी निवेशक पूरे वर्ष शुद्ध विक्रेता बने रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह घरेलू पूंजी का प्रवाह टिकाऊ है या SIP की लहर पर सवार एक अस्थायी उछाल। म्यूचुअल फंड का ₹6.4 लाख करोड़ का योगदान काफी हद तक खुदरा निवेशकों की उस पीढ़ी पर निर्भर है जिसने कभी बड़ी बाजार गिरावट नहीं देखी। यदि वैश्विक मंदी या घरेलू आर्थिक दबाव SIP रद्दीकरण को बढ़ाते हैं, तो यह 'मजबूत स्तंभ' कितना टिकेगा, यह परखा जाएगा। सेबी की रिपोर्ट सफलता की कहानी तो बताती है, पर तनाव-परीक्षण का ज़िक्र नहीं करती।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 26 में डीआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में कितना निवेश किया?
सेबी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने वित्त वर्ष 26 में भारतीय शेयर बाजार में ₹8.5 लाख करोड़ का निवेश किया। इसने एफपीआई की ₹1.8 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक बेअसर कर दिया।
एफपीआई की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार स्थिर कैसे रहा?
घरेलू संस्थागत निवेशकों — विशेष रूप से म्यूचुअल फंड — की मजबूत खरीदारी ने एफपीआई की बिकवाली की भरपाई की। म्यूचुअल फंड ने अकेले ₹6.4 लाख करोड़ का योगदान दिया, जिसमें SIP के ज़रिए नियमित प्रवाह और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी अहम रही।
NSE पर डीआईआई और एफपीआई की हिस्सेदारी अभी कितनी है?
सेबी की रिपोर्ट के अनुसार, NSE पर सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है। वहीं, एफपीआई की हिस्सेदारी घटकर 15 महीने के निचले स्तर 15.8 प्रतिशत पर आ गई है।
वित्त वर्ष 26 में भारत में डीमैट खातों की संख्या कितनी हो गई?
वित्त वर्ष 26 के दौरान देश में डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 22.5 करोड़ हो गई। सेबी के अनुसार, यह वृद्धि डिजिटल ऑनबोर्डिंग की सुगमता और बाजार तक आसान पहुँच के कारण हुई है।
वित्त वर्ष 26 में कॉरपोरेट भारत ने पूंजी बाजार से कितनी राशि जुटाई?
कॉरपोरेट भारत ने वित्त वर्ष 26 में सार्वजनिक इक्विटी पेशकशों (आईपीओ, एफपीओ, राइट्स इश्यू) के ज़रिए रिकॉर्ड ₹2.35 लाख करोड़ जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 11.7 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, 257 कंपनियों ने एसएमई प्लेटफॉर्म से ₹11,587 करोड़ जुटाए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 11 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले