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डीआईआई का लगातार तीसरे साल ₹5 लाख करोड़ पार, 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश

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डीआईआई का लगातार तीसरे साल ₹5 लाख करोड़ पार, 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश

सारांश

लगातार तीसरे साल डीआईआई ने ₹5 लाख करोड़ का आँकड़ा पार किया — 2026 में अब तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश। पिछले 36 महीनों में ₹19.21 लाख करोड़ के घरेलू निवेश ने एफपीआई की ₹10 लाख करोड़ की बिकवाली को संतुलित किया, जो भारतीय बाजार में घरेलू पूंजी की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।

मुख्य बातें

घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश किया।
यह लगातार तीसरा वर्ष है जब डीआईआई निवेश ₹5 लाख करोड़ के पार पहुँचा; 2025 में पूरे वर्ष ₹7.88 लाख करोड़ और 2024 में ₹5.26 लाख करोड़ रहा था।
पिछले 36 महीनों में डीआईआई का कुल निवेश ₹19.21 लाख करोड़ रहा, जबकि एफपीआई ने इसी अवधि में ₹10 लाख करोड़ के शेयर बेचे।
जून 2026 तिमाही में डीआईआई ने पीएसयू बैंक, ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अधिक निवेश किया।
लगातार चार महीने की बिकवाली के बाद एफआईआई ने दोबारा खरीदारी शुरू की, जिससे बाजार की धारणा मजबूत हुई।

भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश दर्ज किया है, जिससे यह लगातार तीसरा वर्ष बन गया है जब घरेलू निवेश ₹5 लाख करोड़ के पार पहुँचा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का प्रवाह अनिश्चित बना हुआ है।

निवेश के आँकड़े: तीन साल का सफर

स्टॉक एक्सचेंज के आँकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 की समान अवधि में डीआईआई ने ₹4.48 लाख करोड़ का निवेश किया था, जबकि इस वर्ष यह आँकड़ा उससे कहीं अधिक है। पूरे वर्ष 2025 में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹7.88 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश किया था, और वर्ष 2024 में यह ₹5.26 लाख करोड़ रहा था। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेशकों का भरोसा साल-दर-साल मजबूत होता जा रहा है।

विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की भूमिका

पिछले 36 महीनों — यानी अगस्त 2023 से अब तक — डीआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में कुल ₹19.21 लाख करोड़ का निवेश किया है। इसके विपरीत, इसी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने लगभग ₹10 लाख करोड़ के भारतीय शेयर बेचे हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू निवेशकों ने इस भारी विदेशी बिकवाली के प्रभाव को संतुलित करने और बाजार को स्थिरता देने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

निवेश प्रवाह के पीछे की वजहें

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती और म्यूचुअल फंडों के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इस निवेश प्रवाह की रीढ़ रही है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जीएसटी संग्रह हाल के महीनों में मजबूत बना हुआ है और आर्थिक मोर्चे पर कोई बड़ी नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी, ऊर्जा कीमतों में नरमी, कॉरपोरेट आय में सुधार और 2024 के उच्च स्तरों की तुलना में शेयरों के मूल्यांकन में आए सुधार ने भारतीय इक्विटी को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद बाजार में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है।

सेक्टरवार निवेश का रुझान

जून 2026 तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने उपभोक्ता क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक), ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और प्रौद्योगिकी कंपनियों में अधिक निवेश किया। वहीं निजी बैंक, एनबीएफसी, कैपिटल गुड्स, केमिकल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल शेयरों में अपेक्षाकृत कम निवेश बनाए रखा गया।

एफआईआई का रुख और आगे की राह

इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी सकारात्मक होता नजर आ रहा है — लगातार चार महीने की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की है, जिससे बाजार की धारणा और मजबूत हुई है। म्यूचुअल फंड उद्योग में इक्विटी और बैलेंस्ड फंड योजनाओं में निरंतर प्रवाह बना हुआ है, जिससे फंड हाउसों के पास बाजार में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी डीआईआई निवेश का यह सिलसिला जारी रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा यह है कि यह प्रवाह म्यूचुअल फंड की एसआईपी संस्कृति पर कितना निर्भर है — जो बाजार में तेज गिरावट आने पर अचानक कमजोर पड़ सकती है। एफपीआई की ₹10 लाख करोड़ की बिकवाली को घरेलू पूंजी ने थाम लिया, यह सकारात्मक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बाजार बाहरी झटकों से प्रतिरक्षित है। सेक्टरवार रुझान में पीएसयू बैंकों और ऊर्जा पर जोर बताता है कि घरेलू निवेशक सरकारी-नीति-संचालित दांव लगा रहे हैं — जो नीतिगत बदलाव के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए जरूरी है कि यह निवेश प्रवाह केवल बाजार के उत्साह पर नहीं, बल्कि कॉरपोरेट आय की वास्तविक वृद्धि पर टिका हो।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 2026 में कितना निवेश किया है?
स्टॉक एक्सचेंज के आँकड़ों के अनुसार, डीआईआई ने कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश किया है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब यह आँकड़ा ₹5 लाख करोड़ के पार पहुँचा है।
डीआईआई में कौन-कौन से निवेशक शामिल होते हैं?
घरेलू संस्थागत निवेशकों में बैंक, घरेलू वित्तीय संस्थान (डीएफआई), बीमा कंपनियाँ, पेंशन फंड और म्यूचुअल फंड शामिल हैं। ये सभी मिलकर भारतीय शेयर बाजार में घरेलू पूंजी प्रवाह का प्रमुख स्रोत बनते हैं।
एफपीआई की बिकवाली के बावजूद बाजार कैसे स्थिर रहा?
अगस्त 2023 से अब तक के 36 महीनों में एफपीआई ने लगभग ₹10 लाख करोड़ के शेयर बेचे, लेकिन इसी अवधि में डीआईआई ने ₹19.21 लाख करोड़ का निवेश किया। इस तरह घरेलू निवेशकों ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को संतुलित कर बाजार को स्थिरता प्रदान की।
2026 में डीआईआई ने किन सेक्टरों में सबसे अधिक निवेश किया?
जून 2026 तिमाही में डीआईआई ने उपभोक्ता क्षेत्र, पीएसयू बैंक, ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और प्रौद्योगिकी कंपनियों में अधिक निवेश किया। वहीं निजी बैंक, एनबीएफसी, कैपिटल गुड्स, केमिकल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल में निवेश अपेक्षाकृत कम रहा।
क्या आने वाले महीनों में भी डीआईआई का निवेश जारी रहेगा?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि मजबूत जीएसटी संग्रह, कॉरपोरेट आय में सुधार और म्यूचुअल फंड में निरंतर प्रवाह को देखते हुए डीआईआई निवेश का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। इसके अलावा, एफआईआई द्वारा दोबारा खरीदारी शुरू करने से बाजार की धारणा और मजबूत हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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