डीआईआई का लगातार तीसरे साल ₹5 लाख करोड़ पार, 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने कैलेंडर वर्ष 2026 में 7 अगस्त तक ₹5.13 लाख करोड़ का शुद्ध इक्विटी निवेश दर्ज किया है, जिससे यह लगातार तीसरा वर्ष बन गया है जब घरेलू निवेश ₹5 लाख करोड़ के पार पहुँचा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है जब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का प्रवाह अनिश्चित बना हुआ है।
निवेश के आँकड़े: तीन साल का सफर
स्टॉक एक्सचेंज के आँकड़ों के अनुसार, कैलेंडर वर्ष 2025 की समान अवधि में डीआईआई ने ₹4.48 लाख करोड़ का निवेश किया था, जबकि इस वर्ष यह आँकड़ा उससे कहीं अधिक है। पूरे वर्ष 2025 में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹7.88 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश किया था, और वर्ष 2024 में यह ₹5.26 लाख करोड़ रहा था। इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेशकों का भरोसा साल-दर-साल मजबूत होता जा रहा है।
विदेशी बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों की भूमिका
पिछले 36 महीनों — यानी अगस्त 2023 से अब तक — डीआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में कुल ₹19.21 लाख करोड़ का निवेश किया है। इसके विपरीत, इसी अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने लगभग ₹10 लाख करोड़ के भारतीय शेयर बेचे हैं। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू निवेशकों ने इस भारी विदेशी बिकवाली के प्रभाव को संतुलित करने और बाजार को स्थिरता देने में निर्णायक भूमिका निभाई है।
निवेश प्रवाह के पीछे की वजहें
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती और म्यूचुअल फंडों के जरिए खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी इस निवेश प्रवाह की रीढ़ रही है। विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जीएसटी संग्रह हाल के महीनों में मजबूत बना हुआ है और आर्थिक मोर्चे पर कोई बड़ी नकारात्मक स्थिति सामने नहीं आई है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक जोखिमों में कमी, ऊर्जा कीमतों में नरमी, कॉरपोरेट आय में सुधार और 2024 के उच्च स्तरों की तुलना में शेयरों के मूल्यांकन में आए सुधार ने भारतीय इक्विटी को निवेशकों के लिए और आकर्षक बना दिया है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद बाजार में निवेशकों का विश्वास बना हुआ है।
सेक्टरवार निवेश का रुझान
जून 2026 तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने उपभोक्ता क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक), ऊर्जा, दूरसंचार, धातु और प्रौद्योगिकी कंपनियों में अधिक निवेश किया। वहीं निजी बैंक, एनबीएफसी, कैपिटल गुड्स, केमिकल, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर और ऑटोमोबाइल शेयरों में अपेक्षाकृत कम निवेश बनाए रखा गया।
एफआईआई का रुख और आगे की राह
इस बीच, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख भी सकारात्मक होता नजर आ रहा है — लगातार चार महीने की बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों ने दोबारा खरीदारी शुरू की है, जिससे बाजार की धारणा और मजबूत हुई है। म्यूचुअल फंड उद्योग में इक्विटी और बैलेंस्ड फंड योजनाओं में निरंतर प्रवाह बना हुआ है, जिससे फंड हाउसों के पास बाजार में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में भी डीआईआई निवेश का यह सिलसिला जारी रह सकता है।