रुपया 56 पैसे उछलकर 93.91 पर बंद, 12 अक्टूबर के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी तेजी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रुपया शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 56 पैसे की जोरदार बढ़त के साथ 93.91 प्रति डॉलर पर बंद हुआ — 12 अक्टूबर 2026 के बाद की यह सबसे बड़ी एकदिनी तेजी है। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.47 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
कारोबारी सत्र का हाल
इंट्राडे कारोबार के दौरान रुपया मजबूत होकर 94.04 के उच्चतम स्तर तक पहुंचा, जो पिछले छह महीनों का शिखर रहा। इस स्तर से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को 93.88 के आसपास डॉलर खरीदते हुए देखा गया, जिसने मुद्रा में अत्यधिक उछाल पर लगाम लगाई। पूरे सप्ताह के आधार पर रुपए की बढ़त करीब 1.2 प्रतिशत रही, जिससे यह इस अवधि में एशिया की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई।
तेजी के प्रमुख कारण
बाज़ार प्रतिभागियों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का घरेलू शेयर बाज़ार में लगातार पूंजी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी रुपए की मजबूती के दो मुख्य कारण रहे। विदेशी बैंक FPI की ओर से सक्रिय रूप से डॉलर बेच रहे थे, जिसने रुपए की माँग को और बल दिया। कच्चे तेल के सस्ते होने से भारत के आयात बिल पर दबाव भी घटा।
विश्लेषकों ने कहा, 'विदेशी निवेश के भारी प्रवाह और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपए को मजबूती मिली। घरेलू शेयर बाज़ार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े निवेश को लेकर सकारात्मक धारणा और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं में कमी के चलते बाज़ार का उत्साह काफी बढ़ा।'
दीर्घकालिक परिदृश्य
हालिया उछाल के बावजूद, दीर्घकालिक नज़रिये से रुपया अभी भी दबाव में है। कैलेंडर वर्ष 2026 में अब तक रुपए में 4.3 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और पिछले एक साल में यह 5.6 प्रतिशत कमज़ोर हुआ है। हालाँकि, चालू वित्त वर्ष में रुपए ने करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है।
आगे का तकनीकी रुझान
बाज़ार विशेषज्ञों ने संकेत दिया कि निकट अवधि में रुपए के लिए 93.50 पर मज़बूत समर्थन (सपोर्ट) और 94.30 पर प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) देखा जा रहा है। गौरतलब है कि RBI की सतर्क मौजूदगी और वैश्विक जोखिम के प्रति बदलते रुझान यह तय करेंगे कि यह बढ़त टिकाऊ है या अल्पकालिक।