कर्नाटक ने केंद्र से माँगे ₹22,000 करोड़ सूखा राहत, किसानों को मिलेंगे ₹5,000 प्रति व्यक्ति
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के दिशानिर्देशों के तहत केंद्र सरकार से ₹22,000 करोड़ की सूखा राहत की माँग की है, जबकि राज्य में अनुमानित फसल क्षति ₹62,000 करोड़ आँकी गई है। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 6 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में मीडिया को यह जानकारी दी। साथ ही राज्य सरकार ने प्रत्येक प्रभावित किसान को कुल ₹5,000 की सहायता राशि देने का ऐलान किया है।
मुख्य घटनाक्रम
परमेश्वर ने बताया कि राज्य सरकार पहले से ही केंद्र को तीन ज्ञापन सौंप चुकी है और प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री तथा केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात का समय माँगा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समय मिला तो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय नेतृत्व से मिलेगा, अन्यथा मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल अपना अनुरोध प्रस्तुत करेगा।
NDRF मानदंडों के अनुसार केंद्र से संपूर्ण अनुमानित नुकसान की भरपाई की माँग नहीं की जा सकती — इसीलिए ₹62,000 करोड़ की कुल क्षति के बावजूद ₹22,000 करोड़ का पात्र दावा प्रस्तुत किया गया है।
किसानों को सहायता का विवरण
राज्य सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से प्रति किसान ₹2,500 की पहली किस्त के रूप में ₹1,250 करोड़ पहले ही जारी कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि अकेले यादगिर जिले में 3 लाख से अधिक किसानों को यह राशि प्राप्त हो चुकी है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के तहत राहत राशि में वृद्धि के बाद प्रति किसान ₹2,500 अतिरिक्त देने की सहमति दी है। इस दूसरी किस्त के लिए ₹1,250 करोड़ की और आवश्यकता होगी, जिसे एक सप्ताह से 15 दिनों के भीतर जारी किया जाएगा — इस तरह प्रत्येक किसान को कुल ₹5,000 की राहत मिलेगी।
स्थानीय स्तर पर आवंटन
सूखा राहत के व्यापक ढाँचे के तहत राज्य सरकार ने पेयजल व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को ₹1 करोड़ और जिलों को ₹4 करोड़ से ₹5 करोड़ आवंटित किए हैं। प्रस्तावित केंद्रीय बैठक नई दिल्ली या मैसूरु में हो सकती है, जो अपॉइंटमेंट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक विवाद और सरकार का पक्ष
परिवहन किराए तथा दूध एवं दही की कीमतों में हालिया वृद्धि पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आलोचना का जवाब देते हुए परमेश्वर ने कहा कि राज्य के वित्त प्रबंधन में समाज के सभी वर्गों — सूखा प्रभावित किसानों, गन्ना उत्पादकों और महंगाई भत्ता पाने वाले सरकारी कर्मचारियों — की ज़रूरतों को एक साथ देखना पड़ता है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र में BJP के सत्ता में आने के बाद से ईंधन की कीमतें लगभग 14 बार बढ़ाई जा चुकी हैं, जिससे परिवहन और कृषि लागत — विशेष रूप से डीजल पर निर्भर ट्रैक्टर संचालन — दोनों प्रभावित हुए हैं। BJP ने इन दावों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।
राज्य की राजस्व स्थिति
परमेश्वर ने बताया कि वाणिज्यिक करों, उत्पाद शुल्क और स्टाम्प एवं पंजीकरण शुल्कों से अच्छे संग्रह के कारण राज्य की राजस्व स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर है। उन्होंने ज़ोर दिया कि सरकार के सभी निर्णय उपलब्ध संसाधनों का सावधानीपूर्वक आकलन करने के बाद ही लिए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य की पाँच गारंटी योजनाओं पर बड़े व्यय ने राजकोषीय स्थान को लेकर बहस छेड़ रखी है।