कर्नाटक सूखा राहत: केंद्रीय टीम का तीन दिवसीय दौरा, CM शिवकुमार ने माँगे ₹3,705 करोड़
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की अंतर मंत्रालयी सूखा आकलन टीम 3 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक पहुँची, जहाँ वह तीन दिनों तक राज्य के सूखाग्रस्त इलाकों का जमीनी सर्वेक्षण करेगी। टीम के प्रमुख और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव अजीत कुमार साहू ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार के आँकड़ों और फील्ड पड़ताल के आधार पर एक निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के नियमों के तहत ₹3,705.30 करोड़ की राहत राशि की माँग की है।
बैठक में क्या हुआ
यह अहम बैठक बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास कम कार्यालय 'कृष्णा' में हुई। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्रीय टीम के समक्ष कर्नाटक की सूखे की गंभीर स्थिति का विस्तृत विवरण रखा और NDRF नियमों के अंतर्गत ₹3,705.30 करोड़ की विशेष सहायता की माँग की।
साहू ने आश्वस्त किया कि केंद्रीय टीम तीन दिनों में राज्य के प्रभावित जिलों का भ्रमण करेगी, संबंधित विभागों से आवश्यक डेटा एकत्र करेगी और रिपोर्ट तैयार करने से पहले फील्ड सत्यापन करेगी।
सूखे की भयावहता: 240 में से 217 तालुक प्रभावित
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बताया कि केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के तहत वैज्ञानिक पद्धति से किए गए आकलन के बाद राज्य के 240 तालुकों में से 217 को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया, "बिना किसी दबाव में आए, केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए और वैज्ञानिक तरीके से आकलन करके सूखा प्रभावित तालुकों की पहचान की गई।"
गौरतलब है कि कृष्णा बेसिन को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में जलाशयों में पानी की आवक सामान्य से कम है। मलनाड और तटीय क्षेत्रों में भी वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है।
किसानों और अर्थव्यवस्था पर असर
शिवकुमार ने चेताया कि किसानों की परेशानी का राज्य की समग्र अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने बाने पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा, "अगर किसान परेशान हैं, तो सब कुछ ठप हो जाता है। इसलिए केंद्र सरकार को कर्नाटक के किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।"
गन्ना उत्पादक अधिक समर्थन मूल्य की माँग कर रहे हैं, जबकि दूध उत्पादक दूध की कीमतों में कम से कम ₹10 प्रति लीटर की बढ़ोतरी चाहते हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को ₹2,500 की अंतरिम राहत राशि घोषित की है, लेकिन केंद्र से बड़े पैकेज की उम्मीद बनी हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण राज्य पर कावेरी नदी में पानी छोड़ने का दबाव बना रहा है, जिससे पहले से जल संकट से जूझ रहे राज्य की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
विधायकों का विशेष सत्र और प्रशासनिक तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने किसानों और चुने हुए प्रतिनिधियों की समस्याएँ समझने के लिए एक विशेष विधानसभा सत्र बुलाया था, जिसमें 150 विधायकों ने अपने अपने निर्वाचन क्षेत्रों की दिक्कतें सामने रखीं। मंत्रियों ने प्रभावित जिलों का दौरा कर जमीनी हकीकत जानी है, और बुवाई के फैसलों पर किसानों को परामर्श भी दिया गया है।
बैठक में उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एल.के. अतीक, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. उमा महादेवन, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव तुषार गिरिनाथ, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रितेश कुमार सिंह और राजस्व विभाग के प्रधान सचिव मनोज कुमार मीना उपस्थित थे।
आगे क्या होगा
केंद्रीय टीम अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा करने के बाद केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर NDRF सहायता की मंजूरी पर निर्णय लिया जाएगा। शिवकुमार ने दोहराया कि इस कठिन परिस्थिति में केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा, ताकि किसानों और प्रभावित जनता को समय पर राहत मिल सके।