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कर्नाटक सूखा: केंद्रीय टीमें 177 तालुकों का निरीक्षण कर रहीं, ₹11,000 करोड़ मुआवजे की माँग — जी. परमेश्वर

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कर्नाटक सूखा: केंद्रीय टीमें 177 तालुकों का निरीक्षण कर रहीं, ₹11,000 करोड़ मुआवजे की माँग — जी. परमेश्वर

सारांश

कर्नाटक में ऐतिहासिक सूखे के बाद ₹46,000 करोड़ के नुकसान का दावा करते हुए राज्य ने केंद्र से ₹11,000 करोड़ माँगे हैं। केंद्रीय टीमें 177 तालुकों का जायजा ले रही हैं। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने चेतावनी दी कि इसका असर जीएसटी संग्रह पर भी पड़ सकता है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार की तीन टीमें 3 से 6 अक्टूबर 2026 के बीच कर्नाटक के 177 तालुकों में सूखे की स्थिति का निरीक्षण कर रही हैं।
राज्य को ₹46,000 करोड़ का नुकसान; केंद्र से ₹10,000–₹11,000 करोड़ मुआवजे की माँग।
परमेश्वर ने चेतावनी दी कि सूखे का असर राज्य के जीएसटी संग्रह पर भी पड़ सकता है।
कर्नाटक जीएसटी संग्रह में लगातार देश में दूसरे स्थान पर; सरकार ने राजस्व गिरावट के लिए बफर बनाए रखा।
भूमि सुधार अधिनियम की धारा 79ए व 79बी पर पुनर्विचार की अर्जियाँ मिली हैं; कैबिनेट में जाने की संभावना।
फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग पर चुनाव आयोग को सबूत सहित शिकायत दर्ज।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में बताया कि सूखे से प्रभावित इलाकों की ज़मीनी स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की तीन टीमें 3 से 6 अक्टूबर के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रही हैं। राज्य ने सूखे से हुए करीब ₹46,000 करोड़ के नुकसान के एवज में केंद्र से ₹10,000 से ₹11,000 करोड़ के मुआवजे की माँग रखी है।

केंद्रीय टीमों का निरीक्षण दायरा

परमेश्वर के अनुसार केंद्रीय टीमों को तीन समूहों में बाँटकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया है। प्रत्येक टीम तीन से चार जिलों का दौरा कर रही है। पहले चरण में सूखाग्रस्त घोषित किए गए 101 तालुकों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उन्होंने स्वयं केंद्रीय टीमों का स्वागत किया और उन्हें राज्य में सूखे की समग्र स्थिति से अवगत कराया। साथ ही दूसरे चरण में सूखाग्रस्त घोषित किए गए शेष 77 तालुकों का भी निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया। केंद्रीय टीम के सदस्यों ने कई स्थानों पर किसानों से सीधे बातचीत भी की।

मुआवजे की माँग और नुकसान का आकलन

परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि 177 तालुकों में सूखे के कारण राज्य को करीब ₹46,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके आधार पर राज्य सरकार ने केंद्र से ₹10,000 से ₹11,000 करोड़ के मुआवजे की माँग की है और यही माँग केंद्रीय टीमों के सामने भी रखी गई।

निरीक्षण पूरा होने के बाद केंद्रीय टीमें केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी, और उसी रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की राशि पर अंतिम फैसला होगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पहले से ही राजस्व दबाव का सामना कर रही है।

जीएसटी संग्रह पर संभावित असर

उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि सूखे के कारण फसलों को हुए नुकसान का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा, जिसमें जीएसटी संग्रह भी शामिल है। उन्होंने कहा कि वित्तीय विशेषज्ञ पहले ही इस गिरावट की आशंका जता चुके हैं।

कर्नाटक लगातार जीएसटी संग्रह में देश में दूसरे स्थान पर बना रहा है। परमेश्वर ने कहा कि राज्य बिना किसी कमी या अनियमितता के केंद्र के नियमों के अनुसार जीएसटी एकत्र कर रहा है और हर जीएसटी काउंसिल बैठक में राज्य का पक्ष रखा गया है। सरकार ने संभावित राजस्व गिरावट के लिए ज़रूरी बफर बनाए रखा है और जीएसटी संग्रह बढ़ाने के उपायों की भी समीक्षा की जा रही है।

सेवा शुल्क और भूमि सुधार अधिनियम पर स्थिति

राजस्व विभाग की सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि जीवन-यापन की बढ़ती लागत और केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी को देखते हुए कुछ सर्विस चार्ज में मामूली बढ़ोतरी की गई है, ताकि राज्य के राजस्व स्रोतों को मजबूत किया जा सके।

कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम की धारा 79ए और 79बी पर पुनर्विचार की संभावना के बारे में उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को पहले कई कारणों से हटाया गया था, लेकिन सरकार को इन्हें बहाल करने की माँग वाली अनेक अर्जियाँ मिली हैं। मामले की जाँच की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

फॉर्म 7 विवाद और चुनाव आयोग को शिकायत

फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग पर चुनाव आयोग को दी गई शिकायत के बारे में परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने अपनी शिकायत के साथ ठोस सबूत भी पेश किए हैं। उन्होंने कहा, 'हमने लोगों को फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा और सबूत सौंपे।' आगे केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट आने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ नुकसान और ₹11,000 करोड़ मुआवजे का दावा राज्य-केंद्र वित्तीय संबंधों की पुरानी खींचतान को फिर उजागर करता है — जहाँ केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट अक्सर राज्य के अनुमानों से काफी नीचे आती है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र इस बार ₹11,000 करोड़ की पूरी माँग स्वीकार करेगा, या पिछले वर्षों की तरह राशि में कटौती होगी। इसके साथ ही परमेश्वर की जीएसटी गिरावट की चेतावनी राज्य की राजकोषीय स्थिति के लिए दोहरे दबाव का संकेत है — जब एक ओर राजस्व घट रहा हो और दूसरी ओर राहत व्यय बढ़ रहा हो, तो सेवा शुल्क बढ़ाना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा लेकिन वित्तीय रूप से अपरिहार्य कदम बन जाता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक सूखे में केंद्रीय टीमें क्या कर रही हैं?
केंद्र सरकार की तीन टीमें 3 से 6 अक्टूबर 2026 के बीच कर्नाटक के सूखाग्रस्त जिलों का दौरा कर रही हैं। ये टीमें 177 तालुकों में ज़मीनी स्थिति का आकलन करेंगी और केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगी, जिसके आधार पर मुआवजे का फैसला होगा।
कर्नाटक ने केंद्र से कितने मुआवजे की माँग की है?
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से ₹10,000 से ₹11,000 करोड़ के मुआवजे की माँग की है। राज्य के अनुसार 177 सूखाग्रस्त तालुकों में करीब ₹46,000 करोड़ का नुकसान हुआ है।
सूखे का जीएसटी संग्रह पर क्या असर पड़ेगा?
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि फसल नुकसान का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा और जीएसटी संग्रह में गिरावट आ सकती है। वित्तीय विशेषज्ञ भी यही संभावना जता रहे हैं; सरकार ने इसके लिए ज़रूरी बफर बनाए रखा है।
कर्नाटक में सूखाग्रस्त तालुकों की संख्या कितनी है?
पहले चरण में 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था और दूसरे चरण में 77 और तालुके जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 177 हो गई। केंद्रीय टीमों से दोनों चरणों के तालुकों का निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया है।
कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम की धारा 79ए और 79बी क्या है और इस पर पुनर्विचार क्यों?
ये प्रावधान गैर-कृषकों द्वारा कृषि भूमि खरीद पर प्रतिबंध से संबंधित थे और पहले कई कारणों से हटाए गए थे। सरकार को इन्हें बहाल करने की माँग वाली अनेक अर्जियाँ मिली हैं, जिनकी जाँच की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर मामला कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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