कर्नाटक सूखा: केंद्रीय टीमें 177 तालुकों का निरीक्षण कर रहीं, ₹11,000 करोड़ मुआवजे की माँग — जी. परमेश्वर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में बताया कि सूखे से प्रभावित इलाकों की ज़मीनी स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की तीन टीमें 3 से 6 अक्टूबर के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर रही हैं। राज्य ने सूखे से हुए करीब ₹46,000 करोड़ के नुकसान के एवज में केंद्र से ₹10,000 से ₹11,000 करोड़ के मुआवजे की माँग रखी है।
केंद्रीय टीमों का निरीक्षण दायरा
परमेश्वर के अनुसार केंद्रीय टीमों को तीन समूहों में बाँटकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भेजा गया है। प्रत्येक टीम तीन से चार जिलों का दौरा कर रही है। पहले चरण में सूखाग्रस्त घोषित किए गए 101 तालुकों की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उन्होंने स्वयं केंद्रीय टीमों का स्वागत किया और उन्हें राज्य में सूखे की समग्र स्थिति से अवगत कराया। साथ ही दूसरे चरण में सूखाग्रस्त घोषित किए गए शेष 77 तालुकों का भी निरीक्षण करने का अनुरोध किया गया। केंद्रीय टीम के सदस्यों ने कई स्थानों पर किसानों से सीधे बातचीत भी की।
मुआवजे की माँग और नुकसान का आकलन
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि 177 तालुकों में सूखे के कारण राज्य को करीब ₹46,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसके आधार पर राज्य सरकार ने केंद्र से ₹10,000 से ₹11,000 करोड़ के मुआवजे की माँग की है और यही माँग केंद्रीय टीमों के सामने भी रखी गई।
निरीक्षण पूरा होने के बाद केंद्रीय टीमें केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी, और उसी रिपोर्ट के आधार पर मुआवजे की राशि पर अंतिम फैसला होगा। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पहले से ही राजस्व दबाव का सामना कर रही है।
जीएसटी संग्रह पर संभावित असर
उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि सूखे के कारण फसलों को हुए नुकसान का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ेगा, जिसमें जीएसटी संग्रह भी शामिल है। उन्होंने कहा कि वित्तीय विशेषज्ञ पहले ही इस गिरावट की आशंका जता चुके हैं।
कर्नाटक लगातार जीएसटी संग्रह में देश में दूसरे स्थान पर बना रहा है। परमेश्वर ने कहा कि राज्य बिना किसी कमी या अनियमितता के केंद्र के नियमों के अनुसार जीएसटी एकत्र कर रहा है और हर जीएसटी काउंसिल बैठक में राज्य का पक्ष रखा गया है। सरकार ने संभावित राजस्व गिरावट के लिए ज़रूरी बफर बनाए रखा है और जीएसटी संग्रह बढ़ाने के उपायों की भी समीक्षा की जा रही है।
सेवा शुल्क और भूमि सुधार अधिनियम पर स्थिति
राजस्व विभाग की सेवाओं के शुल्क में बढ़ोतरी के सवाल पर परमेश्वर ने कहा कि जीवन-यापन की बढ़ती लागत और केंद्र से मिलने वाले फंड में कमी को देखते हुए कुछ सर्विस चार्ज में मामूली बढ़ोतरी की गई है, ताकि राज्य के राजस्व स्रोतों को मजबूत किया जा सके।
कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम की धारा 79ए और 79बी पर पुनर्विचार की संभावना के बारे में उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों को पहले कई कारणों से हटाया गया था, लेकिन सरकार को इन्हें बहाल करने की माँग वाली अनेक अर्जियाँ मिली हैं। मामले की जाँच की जा रही है और ज़रूरत पड़ने पर इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
फॉर्म 7 विवाद और चुनाव आयोग को शिकायत
फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग पर चुनाव आयोग को दी गई शिकायत के बारे में परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने अपनी शिकायत के साथ ठोस सबूत भी पेश किए हैं। उन्होंने कहा, 'हमने लोगों को फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल करते हुए रंगे हाथों पकड़ा और सबूत सौंपे।' आगे केंद्रीय टीमों की रिपोर्ट आने के बाद मुआवजे की प्रक्रिया में तेज़ी आने की उम्मीद है।