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कर्नाटक सूखा 2026: 177 तालुक प्रभावित, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र से ₹7,142 करोड़ की राहत माँगी

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कर्नाटक सूखा 2026: 177 तालुक प्रभावित, उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र से ₹7,142 करोड़ की राहत माँगी

सारांश

कर्नाटक में 177 तालुक सूखाग्रस्त, फसल नुकसान ₹46,324 करोड़ से ऊपर — और संख्या अभी बढ़ रही है। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री चौहान को पत्र लिखकर ₹7,142 करोड़ की तत्काल केंद्रीय मदद माँगी है। मानसून समाप्त होते-होते प्रभावित तालुकों की संख्या 220 पार जाने की आशंका है।

मुख्य बातें

कर्नाटक में 177 तालुक आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित; मानसून के अंत तक संख्या 220 से अधिक होने की आशंका।
कुल 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल क्षति, अनुमानित आर्थिक नुकसान ₹46,324.5 करोड़ ।
खरीफ 2026 में कुल फसल क्षति 55 लाख हेक्टेयर से अधिक होने की आशंका।
परमेश्वर ने केंद्र से NDRF के तहत ₹7,142.64 करोड़ की राहत माँगी — इनपुट सब्सिडी ₹4,998.60 करोड़ और अन्य उपाय ₹2,144.04 करोड़ ।
तुअर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन और प्याज, सुपारी, लाल मिर्च जैसी फसलें सर्वाधिक प्रभावित।
परमेश्वर ने SDRF/NDRF इनपुट सब्सिडी मानदंडों में संशोधन और केंद्रीय आकलन टीम की प्रक्रिया में तेज़ी लाने की भी माँग की।

कर्नाटक में खरीफ 2026 का सूखा गंभीर संकट का रूप ले चुका है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 1 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखकर प्रभावित किसानों के लिए तत्काल केंद्रीय सहायता की माँग की है। अब तक 177 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है और मानसून समाप्त होते-होते यह संख्या 220 से अधिक होने की आशंका है।

सूखे का दायरा और फसल क्षति

राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, सभी 177 सूखा प्रभावित तालुकों में कुल मिलाकर 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल क्षति दर्ज की गई है। इससे अनुमानित आर्थिक नुकसान ₹46,324.5 करोड़ तक पहुँच गया है। खरीफ 2026 के दौरान कुल फसल क्षति 55 लाख हेक्टेयर से अधिक होने की आशंका है।

नवघोषित 76 तालुकों में अकेले 26.08 लाख हेक्टेयर खेतिहर फसलों और 1.49 लाख हेक्टेयर बागवानी फसलों को नुकसान पहुँचा है। इन तालुकों में आर्थिक नुकसान ₹27,576.2 करोड़ आँका गया है।

फसल क्षति का दायरा 33 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक है, जिसमें प्रभावित क्षेत्र के बड़े हिस्से में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान दर्ज है। तुअर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन और हरी मूंग जैसी प्रमुख खरीफ फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, वहीं प्याज, सुपारी और लाल मिर्च जैसी बागवानी फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है।

केंद्र से माँगी गई राहत राशि

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के मानदंडों के तहत दो चरणों में कुल ₹7,142.64 करोड़ की माँग की है। इसमें किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी के रूप में ₹4,998.60 करोड़ और चारा व पेयजल आपूर्ति सहित अन्य आपदा-राहत उपायों के लिए ₹2,144.04 करोड़ शामिल हैं।

इससे पहले राज्य सरकार 101 प्रारंभिक सूखा प्रभावित तालुकों के लिए ₹3,705.30 करोड़ का ज्ञापन केंद्र को भेज चुकी है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) मानदंडों के तहत नव घोषित 76 तालुकों के लिए इनपुट सब्सिडी ₹2,981.34 करोड़ अनुमानित है।

केंद्रीय मंत्रियों को लिखे पत्रों का मज़मून

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में परमेश्वर ने SDRF और NDRF राहत मानदंडों में — विशेष रूप से किसानों के लिए इनपुट सब्सिडी में — लंबित संशोधन को शीघ्रता से पूरा करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि मौजूदा सहायता राशि खेती की वास्तविक लागत और फसल नुकसान की तुलना में 'अपर्याप्त' है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे अलग पत्र में परमेश्वर ने कर्नाटक में केंद्रीय सूखा-आकलन दल के दौरे का स्वागत किया और राहत सामग्री की शीघ्र रिलीज़ के लिए प्रक्रिया में तेज़ी लाने का अनुरोध किया। परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि 'किसानों को समय पर और पर्याप्त सहायता मिलनी चाहिए और दी जाने वाली राहत में उनके वास्तविक नुकसान की भरपाई होनी चाहिए।'

आगे का परिदृश्य

गौरतलब है कि 40 अन्य तालुकों में जमीनी स्तर पर सर्वेक्षण अभी भी जारी है। यदि ये तालुक भी सूखा प्रभावित घोषित होते हैं, तो कुल प्रभावित तालुकों की संख्या 220 से ऊपर जा सकती है, जो राज्य के इतिहास के बड़े सूखा-वर्षों में से एक होगा। परमेश्वर ने ज़ोर देकर कहा कि सूखे की व्यापकता और गंभीरता को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकारों को समन्वय में काम करना होगा। केंद्र के जवाब और राहत राशि जारी होने की गति पर किसान संगठनों की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

142 करोड़ की माँग सिर्फ एक बजट अनुरोध नहीं — यह NDRF और SDRF मानदंडों की पुरानी खामियों पर राज्य का सीधा आरोप-पत्र भी है, जो दशकों से खेती की बढ़ती लागत के साथ नहीं चले। विपक्ष-शासित राज्यों और केंद्र के बीच आपदा-राहत वितरण की राजनीति यहाँ भी दाँव पर है — कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और दिल्ली में भाजपा के बीच यह तनाव नया नहीं है। असली परीक्षा यह है कि केंद्रीय आकलन दल कितनी तेज़ी से रिपोर्ट देता है और राहत राशि बुवाई से पहले किसानों तक पहुँचती है या नहीं — क्योंकि देरी हुई तो अगला रबी सीज़न भी संकट में पड़ सकता है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में खरीफ 2026 का सूखा कितना गंभीर है?
खरीफ 2026 में कर्नाटक के 177 तालुक आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित हो चुके हैं और मानसून के अंत तक यह संख्या 220 से अधिक होने की आशंका है। कुल 47.09 लाख हेक्टेयर में फसल क्षति दर्ज हुई है, जिससे अनुमानित आर्थिक नुकसान ₹46,324.5 करोड़ तक पहुँच गया है।
कर्नाटक सरकार ने केंद्र से कितनी राहत राशि माँगी है?
राज्य सरकार ने NDRF मानदंडों के तहत दो चरणों में कुल ₹7,142.64 करोड़ की माँग की है — ₹4,998.60 करोड़ इनपुट सब्सिडी के लिए और ₹2,144.04 करोड़ चारा व पेयजल सहित अन्य उपायों के लिए। इससे पहले 101 तालुकों के लिए ₹3,705.30 करोड़ का ज्ञापन भी भेजा जा चुका है।
किन फसलों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है?
तुअर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन और हरी मूंग सबसे अधिक प्रभावित खेतिहर फसलें हैं। बागवानी फसलों में प्याज, सुपारी और लाल मिर्च को भारी नुकसान हुआ है। फसल क्षति 33% से लेकर 100% तक दर्ज की गई है।
उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्रीय मंत्रियों से क्या माँग की है?
जी. परमेश्वर ने गृह मंत्री अमित शाह को SDRF/NDRF इनपुट सब्सिडी मानदंडों में लंबित संशोधन शीघ्र पूरा करने का अनुरोध किया है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में उन्होंने केंद्रीय सूखा-आकलन दल के दौरे का स्वागत करते हुए राहत प्रक्रिया में तेज़ी लाने की माँग की है।
क्या राज्य सरकार का अपना राहत कोष पर्याप्त है?
राज्य सरकार के अनुसार, SDRF मानदंडों के तहत नव घोषित 76 तालुकों के लिए अनुमानित इनपुट सब्सिडी ₹2,981.34 करोड़ है। हालाँकि परमेश्वर ने स्वीकार किया कि मौजूदा सहायता राशि खेती की वास्तविक लागत और नुकसान की तुलना में 'अपर्याप्त' है, इसीलिए केंद्रीय NDRF सहायता अपरिहार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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