कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला: केंद्र का इंतजार किए बिना किसानों को मिलेगी ₹2,500 की पहली राहत किस्त
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 7 अक्टूबर 2026 को ऐलान किया कि वह केंद्र सरकार की सहायता राशि का इंतजार किए बिना राज्य के अपने संसाधनों से सूखाग्रस्त किसानों को राहत की पहली किस्त के रूप में ₹2,500 प्रति किसान देगी। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने बल्लारी जिले के सूखाग्रस्त गाँवों का दौरा करने के बाद मीडिया से बातचीत में यह घोषणा की। कर्नाटक में पिछले लगभग 75 वर्षों के सबसे गंभीर सूखों में से एक के कारण राज्य की करीब 90 प्रतिशत फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
सूखे की भयावह तस्वीर
राज्य के कुल लगभग 240 तालुकों में से 217 तालुकों को पहले ही आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। शेष 23 तालुकों में स्थिति का आकलन जारी है और परमेश्वर के अनुसार 10 से 15 और तालुकों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जा सकता है।
परमेश्वर ने हलाकुंडी गाँव में तूर की फसल का निरीक्षण करने के बाद बताया कि समस्या केवल वर्षा आधारित खेती तक सीमित नहीं है — सिंचित क्षेत्र भी संकट में हैं। किसानों ने पहले तूर की बुवाई की, पर पर्याप्त बारिश न होने से फसल बर्बाद हो गई। बाद में कुछ वर्षा होने पर ज्वार जैसी वैकल्पिक फसलें बोई गईं, लेकिन वे भी विफल रहीं। बल्लारी, विजयनगर और आसपास के इलाकों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है।
राज्य सरकार की तत्काल राहत कार्रवाई
परमेश्वर ने स्पष्ट कहा, 'केंद्र की सहायता का इंतजार किए बिना राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से किसानों को राहत राशि की पहली किस्त के रूप में ₹2,500 देने का निर्णय लिया है।' इस संबंध में सरकारी आदेश जारी किया जा चुका है और उपायुक्तों को राशि तत्काल जारी करने के निर्देश दिए जाने हैं।
सूखे का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ा है। कई गाँवों में पानी की किल्लत हो गई है। सरकार ने पेयजल आपूर्ति सहित तत्काल राहत उपायों के लिए धन जारी कर दिया है और उपायुक्तों को उपलब्ध राशि का उपयोग करके जनता की सहायता करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा बैंकों को कृषि ऋण वसूली स्थगित करने तथा ऋण पुनर्गठन और पुनर्वित्त की दिशा में कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
केंद्र से राहत और राजनीतिक पेच
राज्य सरकार ने 177 तालुकों को शामिल करते हुए केंद्र को दो ज्ञापन सौंपे हैं। फसल और सूखे से हुए कुल नुकसान का अनुमान करीब ₹46,000 करोड़ लगाया गया है। एनडीआरएफ के दिशानिर्देशों के तहत राज्य ने केंद्र से लगभग ₹11,000 से ₹11,500 करोड़ की सहायता माँगी है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की राहत दी जाती है। परमेश्वर ने कहा कि ज्ञापन सौंपने के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक कोई राशि जारी नहीं की है। इससे पहले 2023 के सूखे के दौरान राज्य को करीब ₹49,000 करोड़ का नुकसान हुआ था और केंद्र से ₹18,000 करोड़ की माँग की गई थी। तब न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मात्र ₹3,500 करोड़ ही मिले थे। परमेश्वर के शब्दों में, 'हम केवल यह कहकर नहीं बैठ सकते कि केंद्र ने एक भी रुपया जारी नहीं किया।'
आगे की राह और प्राथमिकताएँ
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में किसानों को अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी। कृषि ऋण माफी और ब्याज माफी जैसी माँगों पर भविष्य में विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार की तीन टीमें पहले ही राज्य के सूखाग्रस्त क्षेत्रों का नमूना-आधारित निरीक्षण कर चुकी हैं और केंद्र के पास उपग्रह-आधारित फसल व सूखे के आँकड़े भी उपलब्ध हैं।
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि सड़क निर्माण और अन्य विकास परियोजनाएँ प्रतीक्षा कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल किसानों की सुरक्षा और सहायता सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह देखना अहम होगा कि केंद्र राज्य के ज्ञापनों पर कब और कितनी राशि स्वीकृत करता है।