कर्नाटक सूखा: केंद्रीय टीमों का आकलन शुरू, फसल नुकसान ₹60,000 करोड़ तक संभव — डिप्टी सीएम परमेश्वर
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 3 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार की तीन विशेष टीमें राज्य में सूखे की स्थिति और फसल नुकसान का ज़मीनी आकलन शुरू कर चुकी हैं। उनके अनुसार, सभी 217 सूखाग्रस्त तालुकों का मूल्यांकन पूरा होने पर कुल फसल एवं संबंधित नुकसान ₹50,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ तक पहुँच सकता है।
केंद्रीय टीमों का दायरा और क्षेत्र-वितरण
परमेश्वर के अनुसार, इन तीन केंद्रीय दलों में कृषि मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय सहित केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हैं। पहली टीम तुमकुरु, चित्रदुर्ग और दावणगेरे क्षेत्र का दौरा करेगी; दूसरी टीम उत्तरी कर्नाटक जाएगी; और तीसरी टीम मैसूरु क्षेत्र का निरीक्षण करेगी।
फील्ड विजिट से पहले राज्य सरकार इन टीमों को मई से सितंबर 2026 के दौरान दर्ज वर्षा और सूखे के आँकड़ों की विस्तृत जानकारी देगी। टीमें जिला उपायुक्तों और स्थानीय अधिकारियों से भी बातचीत कर राज्य द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की पुष्टि करेंगी।
मुख्य घटनाक्रम: तीन ज्ञापन, बढ़ता नुकसान
कर्नाटक सरकार सूखा राहत के लिए केंद्र को पहले ही दो ज्ञापन सौंप चुकी है। दूसरे ज्ञापन में 177 तालुकों को शामिल किया गया था और नुकसान का अनुमान लगभग ₹46,000 करोड़ आँका गया था।
राज्य के कुल 240 तालुकों में से 217 को अब तक सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। शेष 40 तालुकों को 1 अक्टूबर 2026 को सूखाग्रस्त घोषित किया गया और उनका आकलन अभी जारी है। जैसे ही केंद्रीय टीमें अपना मूल्यांकन पूरा करेंगी, राज्य सरकार सभी 217 तालुकों को समेटते हुए तीसरा और अंतिम ज्ञापन केंद्र को सौंपेगी।
हालिया बारिश का आकलन पर असर नहीं
परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि हाल में हुई बारिश से सूखे के आकलन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'सूखे की स्थिति का आकलन सिर्फ हाल की बारिश के आधार पर नहीं किया जाएगा।' यद्यपि इस बारिश से पेयजल उपलब्धता में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन जो फसलें पहले ही नष्ट हो चुकी हैं, उन्हें इससे कोई विशेष लाभ नहीं होगा।
बचे हुए 22 तालुकों — जिन्हें अभी सूखाग्रस्त नहीं माना गया है — के बारे में डिप्टी सीएम ने कहा कि ग्राउंड-ट्रूथिंग के बाद उनमें से कुछ सूखा-प्रभावित श्रेणी में आ सकते हैं, जबकि तटीय क्षेत्र के कुछ तालुक निर्धारित मानदंड पूरे नहीं कर पाएंगे।
राजनीतिक संदर्भ: चुनाव सूची विवाद
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में परमेश्वर ने फॉर्म-7 के ज़रिए योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोपों पर कहा कि मामले की सच्चाई जानने के लिए जाँच होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की इस आलोचना को भी खारिज किया कि कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर में विरोध-प्रदर्शन किया। परमेश्वर ने कहा, 'हम चुनाव आयोग को मेमोरेंडम सौंपने गए थे। चूँकि हमें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, इसलिए हम तब तक वहाँ डटे रहे जब तक उन्होंने जवाब नहीं दिया।'
आगे क्या होगा
केंद्रीय टीमों के आकलन के बाद राज्य सरकार अंतिम ज्ञापन केंद्र को भेजेगी और राहत राशि की माँग रखेगी। यह ऐसे समय में आया है जब गौरतलब है कि कर्नाटक पहले भी सूखा राहत के लिए केंद्र से पर्याप्त सहयोग न मिलने की शिकायत करता रहा है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि अंतिम ज्ञापन से केंद्र से अतिरिक्त राहत पैकेज मिल सकेगा, जो प्रभावित किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए निर्णायक साबित होगा।