22 अक्टूबर 2026
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कर्नाटक सूखा: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र से माँगे ₹20,585 करोड़, NDRF से तत्काल राहत की अपील

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कर्नाटक सूखा: उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र से माँगे ₹20,585 करोड़, NDRF से तत्काल राहत की अपील

सारांश

कर्नाटक में 1956 के बाद दूसरी सबसे कम मानसून वर्षा ने 57.93 लाख हेक्टेयर फसलें तबाह कर दी हैं। उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र से ₹20,585 करोड़ की NDRF राहत माँगी है — 61.91 लाख छोटे किसानों की आजीविका दाँव पर है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी.
परमेश्वर ने 22 अक्टूबर 2026 को PM मोदी , अमित शाह और शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर NDRF से ₹20,585.73 करोड़ की तत्काल सहायता माँगी।
2026 मानसून में 35% वर्षा की कमी — सामान्य 852 मिमी के मुकाबले सिर्फ 551 मिमी ; 1956 के बाद दूसरी और 1901 के बाद सातवीं सबसे कम वर्षा।
राज्य के 226 तालुक सूखाग्रस्त घोषित; 57.93 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित; कुल नुकसान ₹62,481.88 करोड़ आँका गया।
माँग में 61.91 लाख छोटे-सीमांत किसानों के लिए ₹12,146.99 करोड़ आजीविका सहायता और ₹6,128.70 करोड़ इनपुट सब्सिडी शामिल।
पुराने 2015-16 कृषि जनगणना डेटा के उपयोग से ₹1,669.50 करोड़ कम सहायता मिलने की आशंका; FRUITS डेटाबेस अपनाने की माँग।
3-6 अक्टूबर 2026 को राज्य दौरे पर आई IMCT की सिफारिशें जल्द उच्च-स्तरीय समिति को भेजने और राहत बिना देरी जारी करने का आग्रह।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने 22 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अलग-अलग पत्र लिखकर राज्य में गहराते सूखे से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत ₹20,585 करोड़ से अधिक की सहायता राशि तत्काल जारी करने की माँग की है। 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून में 35 प्रतिशत की भारी कमी के चलते राज्य में 57.93 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बुरी तरह प्रभावित हुई है।

सूखे की गंभीरता: ऐतिहासिक संदर्भ

परमेश्वर ने अपने पत्रों में विस्तार से बताया कि 2026 के मानसून सीजन में कर्नाटक में सामान्य 852 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 551 मिमी बारिश दर्ज हुई — जो 1956 के बाद दूसरी सबसे कम और 1901 के बाद सातवीं सबसे कम मानसून वर्षा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के अन्य हिस्सों में भी जलवायु विषमताएँ तेज़ होती दिख रही हैं।

राज्य सरकार ने 226 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित किया है। कुल कृषि नुकसान में 53.92 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलें और 4.01 लाख हेक्टेयर में बागवानी फसलें बर्बाद हुई हैं। कृषि इनपुट लागत के आधार पर कुल आर्थिक नुकसान ₹62,481.88 करोड़ आँका गया है।

माँगी गई सहायता का ब्यौरा

राज्य सरकार ने केंद्र को सौंपे विस्तृत ज्ञापन में ₹20,585.73 करोड़ की माँग को चार श्रेणियों में विभाजित किया है। फसल नुकसान पर इनपुट सब्सिडी के लिए ₹6,128.70 करोड़, 61.91 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका सहायता के लिए ₹12,146.99 करोड़, पेयजल आपूर्ति के लिए ₹1,727 करोड़ और पशुपालन व पशुधन सुरक्षा के लिए ₹583.04 करोड़ की अलग-अलग माँग की गई है।

आजीविका सहायता की गणना 60 दिनों के लिए ₹327 प्रतिदिन की दर से की गई है। पशुधन की रक्षा के लिए 476 पशु शिविर और 583 चारा बैंक स्थापित करने हेतु भी केंद्र से सहयोग माँगा गया है।

डेटा विवाद और FRUITS डेटाबेस की माँग

गौरतलब है कि परमेश्वर ने फसल नुकसान पर इनपुट सब्सिडी तय करने के लिए 2015-16 की पुरानी कृषि जनगणना के डेटा के उपयोग पर गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार, पुराने आँकड़ों के आधार पर गणना होने से कर्नाटक को मिलने वाली सहायता में लगभग ₹1,669.50 करोड़ की कमी आ सकती है।

इसके बदले उन्होंने केंद्र से राज्य के अद्यतन 'फार्मर्स रजिस्ट्रेशन एंड यूनिफाइड बेनिफिशियरी इंफॉर्मेशन सिस्टम' (FRUITS) डेटाबेस का उपयोग करने का आग्रह किया, ताकि लाभार्थी किसानों की सटीक पहचान और राहत की ज़रूरतों का सही आकलन किया जा सके।

पोषण और अतिरिक्त माँगें

राज्य ने पीएम पोषण योजना के तहत ₹427.20 करोड़ की अतिरिक्त माँग भी रखी है, जिससे गर्मियों की छुट्टियों के दौरान सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा, जरूरतमंद लाभार्थियों की पोषण संबंधी ज़रूरतें पूरी करने के लिए 'सप्लीमेंट्री न्यूट्रिशन प्रोग्राम' के तहत ₹70.96 करोड़ की भी माँग की गई है।

परमेश्वर ने खेती की बढ़ती लागत और 16वें वित्त आयोग की अवधि को देखते हुए फसल नुकसान पर इनपुट सब्सिडी के मौजूदा नियमों में संशोधन की माँग भी की।

केंद्रीय टीम के दौरे के बाद तेज़ी की अपील

सूखे की स्थिति का जमीनी आकलन करने के लिए 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक कर्नाटक के दौरे पर आई 'इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम' (IMCT) का हवाला देते हुए परमेश्वर ने केंद्र से राज्य के राहत ज्ञापन की जाँच प्रक्रिया में तेज़ी लाने का आग्रह किया। उन्होंने माँग की कि IMCT की सिफारिशें शीघ्र उच्च-स्तरीय समिति को सौंपी जाएँ और वित्तीय सहायता बिना किसी विलंब के जारी की जाए।

परमेश्वर ने कहा कि किसानों का कल्याण राजनीतिक और प्रशासनिक सीमाओं से ऊपर है और केंद्र व राज्य सरकारों को 'सहयोगात्मक संघवाद' की भावना से मिलकर काम करना होगा। समय पर वित्तीय सहायता न मिलने से लाखों किसान परिवारों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट आ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या NDRF की ढाँचागत सीमाएँ और IMCT की सिफारिशों पर कार्रवाई की रफ्तार इस संकट की तात्कालिकता के अनुरूप होगी। ₹62,481 करोड़ के नुकसान के मुकाबले ₹20,585 करोड़ की माँग पहले से ही रियायती है; केंद्र अगर इसे भी समय पर न दे, तो 'सहयोगात्मक संघवाद' की बात खोखली साबित होगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक ने केंद्र से कितने रुपए की सूखा राहत माँगी है?
कर्नाटक सरकार ने NDRF के तहत ₹20,585.73 करोड़ की सहायता राशि तत्काल जारी करने की माँग की है। यह माँग उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे अलग-अलग पत्रों में रखी है।
कर्नाटक में 2026 मानसून में वर्षा की कितनी कमी रही?
2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून में कर्नाटक में सामान्य 852 मिमी के मुकाबले केवल 551 मिमी वर्षा हुई — यानी 35 प्रतिशत की कमी। यह 1956 के बाद दूसरी और 1901 के बाद सातवीं सबसे कम मानसून वर्षा है।
कर्नाटक सूखे से कितने किसान और कितनी फसल प्रभावित हुई है?
राज्य में 57.93 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है, जिसमें 53.92 लाख हेक्टेयर खेती और 4.01 लाख हेक्टेयर बागवानी शामिल है। 61.91 लाख छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है और कुल आर्थिक नुकसान ₹62,481.88 करोड़ आँका गया है।
FRUITS डेटाबेस क्या है और कर्नाटक इसे क्यों अपनाने की माँग कर रहा है?
'फार्मर्स रजिस्ट्रेशन एंड यूनिफाइड बेनिफिशियरी इंफॉर्मेशन सिस्टम' (FRUITS) कर्नाटक का अद्यतन किसान डेटाबेस है। परमेश्वर का कहना है कि 2015-16 की पुरानी कृषि जनगणना के आधार पर गणना करने से राज्य को लगभग ₹1,669.50 करोड़ कम सहायता मिल सकती है, इसलिए सटीक लाभार्थी पहचान के लिए FRUITS को आधार बनाया जाए।
कर्नाटक के सूखे का आकलन करने केंद्रीय टीम कब आई थी?
सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए 'इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम' (IMCT) 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक कर्नाटक दौरे पर आई थी। परमेश्वर ने केंद्र से इस टीम की सिफारिशें जल्द उच्च-स्तरीय समिति को सौंपने और राहत राशि बिना विलंब जारी करने का आग्रह किया है।
राष्ट्र प्रेस
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