मोदी-टस्क शिखर वार्ता: भारत-पोलैंड व्यापार 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य, AI और सेमीकंडक्टर पर भी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया, जिसमें दोनों देशों ने 2030 तक भारत-पोलैंड द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इस बैठक में निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष और कनेक्टिविटी जैसे व्यापक क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर सहमति बनी।
व्यापार और FTA पर मुख्य निर्णय
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर शीघ्र हस्ताक्षर, स्वीकृति और समयबद्ध क्रियान्वयन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। दोनों नेताओं का मानना है कि यह FTA व्यापार और निवेश के नए द्वार खोलेगा, महत्वपूर्ण वैल्यू चेन को विविध और मज़बूत बनाएगा तथा नए बाज़ारों तक पहुँच सुनिश्चित करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को भारत में निवेश और कारोबार विस्तार के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल बाज़ार, कुशल कार्यबल, तेज़ी से बढ़ता विनिर्माण क्षेत्र और नवाचार-आधारित इकोसिस्टम विदेशी कंपनियों के लिए अपार अवसर प्रदान करता है। वहीं, टस्क ने कहा कि पोलैंड, मध्य और पूर्वी यूरोप तथा व्यापक यूरोपीय बाज़ार में विस्तार की इच्छुक भारतीय कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेशद्वार बन सकता है।
तकनीक और नवाचार में सहयोग
दोनों देशों ने माना कि डिजिटल प्रौद्योगिकियाँ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आर्थिक विकास, उत्पादकता और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती हैं। भारत-EU व्यापक रणनीतिक एजेंडे को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों ने AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम प्रौद्योगिकियों पर संयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहित करने तथा स्टार्टअप सहयोग मज़बूत करने पर सहमति जताई।
गौरतलब है कि यह सहमति ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला को लेकर भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ है और भारत अपनी चिप-निर्माण क्षमता को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है।
उद्योग क्षेत्रों में साझेदारी
दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-पोलैंड बिजनेस फोरम का स्वागत किया, जिसमें दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उद्योग जगत को औद्योगिक मशीनरी, रक्षा, अवसंरचना, फार्मास्यूटिकल्स, खनन, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सहित कई क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
इसके अलावा, दोनों देशों ने सर्कुलर इकोनॉमी, बैटरी रीसाइक्लिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स के प्रसंस्करण में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। भू-विज्ञान, खनन और क्रिटिकल मिनरल्स पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर बातचीत भी जारी है।
कनेक्टिविटी और IMEC पर जोर
दोनों नेताओं ने भारत और पोलैंड के बीच सीधी उड़ानों की संभावनाओं का स्वागत किया और नागर विमानन प्राधिकरणों को इस दिशा में सीधी वार्ता आगे बढ़ाने के लिए कहा। समुद्री परिवहन और समुद्री सुरक्षा में भी सहयोग बढ़ाने की बात की गई।
दोनों नेताओं ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) जैसी पहलों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी भू-राजनीतिक व्यवधानों के बीच आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक विकास में भी योगदान देगी।
कृषि और अंतरिक्ष में नई पहल
कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय कार्य समूह की गतिविधियाँ फिर से शुरू की जाएंगी, जिससे कृषि व्यापार और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिलेगी। अंतरिक्ष क्षेत्र को भी रणनीतिक साझेदारी का अहम हिस्सा बताया गया; दोनों पक्षों ने संस्थागत और उद्योग स्तर पर सहयोग को मज़बूत करने तथा परस्पर लाभकारी अंतरिक्ष परियोजनाओं की पहचान करने पर सहमति जताई।
यह शिखर वार्ता भारत और पोलैंड के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, जहाँ द्विपक्षीय सहयोग पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी और रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुँच रहा है।