मोदी टस्क वार्ता: भारत पोलैंड ने रक्षा, अंतरिक्ष व परमाणु ऊर्जा सहयोग पर बनाई सहमति
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों ने रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को और अधिक गहरा करने पर सहमति जताई। मोदी ने इस अवसर पर कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत और पोलैंड दोनों "विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्रों" के रूप में उभर रहे हैं।
रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
मोदी ने बैठक में याद दिलाया कि वर्ष 2024 में उनकी पोलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में इस साझेदारी को उल्लेखनीय नई गति मिली है।
यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप भू राजनीतिक दबावों से जूझ रहा है और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में है। गौरतलब है कि पोलैंड नाटो का सदस्य है और पूर्वी यूरोप में एक प्रमुख औद्योगिक एवं सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है।
मानवीय विरासत और ऐतिहासिक बंधन
मोदी ने द्वितीय विश्व युद्ध के उस ऐतिहासिक प्रसंग का उल्लेख किया जब जामनगर और कोल्हापुर के शाही परिवारों ने हजारों पोलिश बच्चों और परिवारों को भारत में शरण दी थी। उन्होंने कहा कि भारत पोलैंड मित्रता केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह "मानवता और संवेदना की साझी विरासत पर आधारित है।"
यह संदर्भ महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपनी विदेश नीति में ऐतिहासिक सांस्कृतिक जुड़ावों को कूटनीतिक पूँजी के रूप में तेजी से उपयोग कर रहा है।
आर्थिक अवसर और भारत EU FTA
मोदी ने बताया कि भारत ने पिछली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, और उन्होंने पोलैंड की अर्थव्यवस्था के एक ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के ऐतिहासिक स्तर को पार करने पर प्रधानमंत्री टस्क को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि भारत यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लागू होने के बाद मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए पोलैंड का बाजार और अधिक खुल जाएगा। यह FTA दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को संरचनागत आधार देता है।
रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा में सह उत्पादन
वार्ता में दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत पोलैंड की कंपनियों को इन क्षेत्रों में सह विकास और सह उत्पादन के लिए आमंत्रित करता है।
उन्नत प्रौद्योगिकियों में यह साझेदारी दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ दे सकती है — विशेष रूप से तब जब भारत अपने रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ के लक्ष्य की ओर ले जाने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक शांति और यूक्रेन संकट पर भारत का रुख
मोदी ने बैठक में वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि चाहे यूक्रेन संकट हो या पश्चिम एशिया का संघर्ष, भारत शांति स्थापित करने के हर सार्थक प्रयास का समर्थन करता रहेगा।
पोलैंड, जो यूक्रेन की सीमा से सटा देश है और नाटो का अग्रिम सदस्य है, के प्रधानमंत्री के साथ इस विषय पर चर्चा भारत की संतुलित विदेश नीति को रेखांकित करती है। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि भारत और पोलैंड दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन में विश्वास रखते हैं।
आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच रक्षा और व्यापार के क्षेत्र में ठोस समझौतों की उम्मीद की जा रही है।