भारत-पोलैंड वार्ता: महत्वपूर्ण खनिज, रक्षा सहयोग और 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत और पोलैंड ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला, रक्षा संवाद को सुदृढ़ करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लक्ष्य पर केंद्रित उच्चस्तरीय वार्ता की। विदेश मंत्रालय (MEA) के पश्चिमी मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने 22 अक्टूबर 2026 को प्रेस वार्ता में इन चर्चाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।
यात्रा की पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
सिबी जॉर्ज ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2024 में पोलैंड का दौरा किया था, जो पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पोलैंड यात्रा थी। उसी दौरान दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया और एक्शन प्लान 2024-28 तैयार किया गया। 2024 में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ भी मनाई गई।
जॉर्ज ने कहा, 'पीएम टस्क के साथ वित्त मंत्री और बहुत बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल है, जो दोनों देशों की आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मध्य और पूर्वी यूरोप तथा यूरोपीय संघ (EU) में पोलैंड भारत का एक अहम सहयोगी है, इसलिए यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ व्यापक भारत-EU रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
दोनों देशों के बीच वर्ष 2025 में द्विपक्षीय व्यापार 6.36 अरब डॉलर तक पहुँचा, जबकि पोलैंड में भारतीय निवेश 3 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। दोनों पक्षों का स्पष्ट लक्ष्य 2030 तक व्यापार को दोगुना करना है।
जॉर्ज ने बताया कि नए उभरते क्षेत्रों में EV बैटरी, नवीकरणीय ऊर्जा, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और स्वच्छ तकनीकें प्राथमिकता में हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत भारत में निवेश के अवसर तलाशने का आमंत्रण दिया। टस्क के साथ आए व्यापार प्रतिनिधिमंडल में रक्षा, एग्रीटेक, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी, माइनिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, भारी मशीनरी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियाँ शामिल हैं।
रक्षा, खनिज और प्रौद्योगिकी सहयोग
रक्षा क्षेत्र में सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और उभरती प्रौद्योगिकियों को इस वार्ता में विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्ष गोपनीय सूचनाओं के संरक्षण और आदान-प्रदान, महत्वपूर्ण खनिजों, अभिलेखीय सहयोग तथा संस्कृति, विज्ञान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में समझौतों को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं।
विज्ञान और नवाचार को द्विपक्षीय संबंधों का मजबूत स्तंभ बताते हुए जॉर्ज ने कहा कि फरवरी में आयोजित 'AI इम्पैक्ट समिट' में पोलैंड की भागीदारी को आगे बढ़ाते हुए दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम प्रौद्योगिकियों में शोध-सहयोग पर सहमत हुए हैं। दोनों पक्ष स्टार्टअप साझेदारी और नवाचार इकोसिस्टम को भी मजबूत करने पर एकमत हैं।
आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र और भू-राजनीतिक मुद्दे
दोनों देशों के नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप आतंकी नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों और फंडिंग के खिलाफ ठोस वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया। गौरतलब है कि पोलैंड ने सुधारवादी और विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया। दोनों नेताओं ने प्रमुख क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श भी किया।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत यूरोप के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई गहराई देने की कोशिश में है। दोनों पक्षों ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते, EU के नए रणनीतिक एजेंडे, सुरक्षा-रक्षा साझेदारी और मोबिलिटी फ्रेमवर्क का स्वागत किया, जो भारत-पोलैंड संबंधों को और सुदृढ़ करेंगे। आने वाले महीनों में लंबित समझौतों को अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।