भारत-पोलैंड व्यापार 2030 तक दोगुना करना यथार्थवादी: पोलिश वित्त मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की
सारांश
मुख्य बातें
पोलैंड के वित्त मंत्री आंद्रेज डोमान्स्की ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और पोलैंड के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को कम से कम दोगुना करना एक यथार्थवादी लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यापार वृद्धि उत्साहजनक है, परंतु दोनों देशों के आर्थिक सहयोग की वास्तविक संभावनाएं इससे कहीं व्यापक हैं।
यात्रा का उद्देश्य और प्रतिनिधिमंडल
डोमान्स्की इस भारत यात्रा पर अंतरिक्ष, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और कृषि क्षेत्रों की पोलिश कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आए हैं। उन्होंने कहा, 'दोनों देशों के बीच संभावनाएं अपार हैं।' यह यात्रा व्यापार विस्तार की ठोस पहलों को आगे बढ़ाने के इरादे से की गई है।
परस्पर पूरक अर्थव्यवस्थाएं
डोमान्स्की ने रेखांकित किया कि पोलैंड यूरोपीय संघ की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उनके अनुसार दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं कई क्षेत्रों में एक-दूसरे की पूरक हैं, जिससे सहयोग की व्यापक गुंजाइश बनती है।
मुक्त व्यापार और समझौतों पर रुख
पोलिश वित्त मंत्री ने भारत-पोलैंड के बीच हुए समझौतों को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें शीघ्र लागू किए जाने की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, 'दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार भारतीय और पोलिश कंपनियों के साथ-साथ यूरोपीय कंपनियों के लिए भी लाभकारी हो सकता है।' डोमान्स्की ने वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में पोलैंड की मज़बूत स्थिति को उसकी आर्थिक प्रगति का एक प्रमुख कारक बताया। साथ ही उन्होंने व्यापार में सरकारी सब्सिडी पर आपत्ति जताते हुए कहा, 'वैश्विक व्यापार का विस्तार पोलिश अर्थव्यवस्था के हित में है।'
रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक नेतृत्व
रूस-यूक्रेन संघर्ष पर पोलैंड का रुख स्पष्ट करते हुए डोमान्स्की ने कहा, 'युद्ध की कीमत रूस को चुकानी चाहिए।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक नेतृत्व पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि मोदी एक वैश्विक नेता हैं।' डोमान्स्की ने भारत की मज़बूत अर्थव्यवस्था और बढ़ती सॉफ्ट पावर का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि भारत और पोलैंड मिलकर वैश्विक समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकते हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की विदेश नीति यूरोपीय देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नए सिरे से सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। गौरतलब है कि पोलैंड ने यूरोपीय संघ की अध्यक्षता ग्रहण की है, जिससे भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार वार्ता के संदर्भ में इस यात्रा का महत्व और बढ़ जाता है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल आने वाले हफ्तों में क्षेत्रवार सहयोग के रोडमैप को अंतिम रूप दे सकते हैं।