भारत-पोलैंड व्यापार 2030 तक तीगुना संभव: एफटीए और बिजनेस फोरम से नई उम्मीदें
सारांश
मुख्य बातें
भारत में पोलैंड के राजदूत एंटनी स्वितल्स्की ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि यदि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत मिलने वाले अवसरों का पूरा उपयोग किया जाए और दोनों देशों के बीच हुए बिजनेस फोरम की चर्चाओं को ठोस परियोजनाओं में बदला जाए, तो 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार तीगुना हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार का मौजूदा स्तर दोनों अर्थव्यवस्थाओं की वास्तविक क्षमता को नहीं दर्शाता।
बिजनेस फोरम: ऐतिहासिक भागीदारी
पोलैंड के प्रधानमंत्री की हालिया भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली और बेंगलुरु में दो बिजनेस फोरम आयोजित किए गए, जिन्हें दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े आयोजन बताया गया। स्वितल्स्की के अनुसार, इस यात्रा में 100 से अधिक पोलिश कंपनियों ने भाग लिया, जबकि लगभग 200 भारतीय कंपनियों ने चर्चाओं में हिस्सा लिया।
इस दौरान 13 अनुबंध, समझौता ज्ञापन (एमओयू) और लेटर ऑफ इंटरेस्ट (एलओआई) पर हस्ताक्षर किए गए। यह आँकड़ा दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक निकटता का संकेत है।
एफटीए पर जल्द हस्ताक्षर की उम्मीद
राजदूत स्वितल्स्की ने कहा कि पोलैंड ने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर जल्द हस्ताक्षर और उसे लागू करने की पुरजोर वकालत की है। उनके अनुसार, दिसंबर 2026 की शुरुआत तक समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है और अगले वर्ष की शुरुआत में यह लागू हो सकता है। गौरतलब है कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाज़ार तक पहुँच को काफी आसान बना सकता है।
निवेश और रक्षा सहयोग
निवेश के मोर्चे पर स्वितल्स्की ने स्वीकार किया कि पोलैंड में भारतीय निवेश पहले से उल्लेखनीय है, लेकिन भारत में पोलिश निवेश अभी भी अपनी क्षमता से कम है। उन्होंने भारतीय कंपनियों को पोलैंड को यूरोपीय बाज़ारों में प्रवेश के 'गेटवे' के रूप में इस्तेमाल करने का आमंत्रण दिया।
रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के नेताओं ने सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की हालिया वारसॉ यात्रा से नए अनुबंध और समझौतों की उम्मीद जताई जा रही है।
ऊर्जा क्षेत्र में नई साझेदारी की संभावना
ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएँ उभर रही हैं। स्वितल्स्की ने बताया कि पोलिश कंपनियाँ सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भारतीय साझेदारों के साथ काम करने में गहरी रुचि रखती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तेज़ी से बढ़ा रहा है और यूरोपीय देश इस क्षेत्र में तकनीकी रूप से उन्नत माने जाते हैं।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए और बिजनेस फोरम के परिणामों को ज़मीन पर उतारने के लिए दोनों देशों को क्रियान्वयन तंत्र को मज़बूत करना होगा। यदि दिसंबर में एफटीए पर हस्ताक्षर हो जाते हैं और परियोजनाएँ समयसीमा में आगे बढ़ती हैं, तो भारत-पोलैंड व्यापार संबंध एक नई ऊँचाई छू सकते हैं।