ईयू-इंडिया एफटीए से भारत-फिनलैंड व्यापार दोगुना होने की उम्मीद: महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम
सारांश
मुख्य बातें
फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम ने 2 जून 2026 को मुंबई में कहा कि भारत वैश्विक विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक निभा रहा है और प्रस्तावित ईयू-इंडिया मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लागू होने के बाद भारत और फिनलैंड के बीच व्यापार दोगुना तक हो सकता है। उन्होंने सर्कुलर इकोनॉमी को दोनों देशों के बीच सहयोग का सबसे संभावनाशील क्षेत्र बताया।
एफटीए की स्थिति और व्यापार संभावनाएँ
हॉलस्ट्रॉम ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एफटीए पर बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएँ अभी चल रही हैं। उनके अनुसार, समझौता लागू होते ही भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इससे फिनलैंड और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होने की संभावना है।
सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास
महावाणिज्यदूत ने कहा कि दुनिया को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकास मॉडल की ज़रूरत है। उनके अनुसार, भारत और फिनलैंड इस दिशा में स्वाभाविक साझेदार हैं क्योंकि दोनों देश समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने सर्कुलर इकोनॉमी को वैश्विक प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इसका सीधा संबंध दीर्घकालिक आर्थिक और पर्यावरणीय स्थिरता से है।
महाराष्ट्र में फिनिश निवेश और सहयोग
हॉलस्ट्रॉम ने महाराष्ट्र को आर्थिक दृष्टि से भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य बताया। उन्होंने कहा कि राज्य देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देता है और इसी कारण यह निवेश और विकास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि मुंबई के ससून डॉक के विकास से जुड़े समझौते में फिनिश कंपनियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
दावोस में हुई उच्चस्तरीय बैठकें
हॉलस्ट्रॉम ने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो की दावोस में दो बार मुलाकात हो चुकी है। इन बैठकों में दोनों पक्षों ने टिकाऊ विकास, हरित अर्थव्यवस्था और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
रणनीतिक साझेदारी की नई नींव
महावाणिज्यदूत ने बताया कि मार्च 2026 में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति स्टब ने दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, यह निर्णय आने वाले वर्षों में विज्ञान, तकनीक, व्यापार, नवाचार और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।