कर्नाटक सूखा: खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, ₹3,705 करोड़ की सहायता और केंद्रीय टीम भेजने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 3 अक्टूबर 2026 को बताया कि उन्होंने 1 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कर्नाटक में गंभीर सूखे की स्थिति में तत्काल और व्यक्तिगत हस्तक्षेप का आग्रह किया है। राज्य में सितंबर तक 58 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है और 31 लाख से अधिक किसान परिवार संकट में हैं।
सूखे की भयावहता और आर्थिक नुकसान
खड़गे ने अपने पत्र में लिखा कि कर्नाटक हाल के वर्षों में सबसे गंभीर सूखे की स्थितियों में से एक का सामना कर रहा है। व्यापक फसल नुकसान के चलते राज्य का अनुमानित नुकसान ₹18,748.23 करोड़ आँका गया है। इसके सापेक्ष, कर्नाटक सरकार ने स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (NDRF) के तहत केंद्र से ₹3,705.30 करोड़ की सहायता राशि माँगी है।
गौरतलब है कि यह सहायता अनुरोध अनुमानित कुल नुकसान का लगभग पाँचवाँ हिस्सा है, जो इस बात की गंभीरता को दर्शाता है कि राज्य सरकार केंद्रीय मदद के बिना स्वयं इस संकट से नहीं निपट सकती।
खड़गे की केंद्र से प्रमुख माँगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री के समक्ष कई ठोस माँगें रखी हैं। उन्होंने माँग की कि केंद्र सरकार औपचारिक रूप से सूखे की घोषणा करे, किसानों की सुरक्षा के लिए तत्काल आकलन कराए और पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में राज्य की सहायता करे।
खड़गे ने विशेष रूप से माँग की कि 'कल्याण कर्नाटक' क्षेत्र का दौरा करने के लिए एक केंद्रीय टीम बिना देरी के भेजी जाए, ताकि जमीनी स्तर पर सूखे की वास्तविकता की जाँच की जा सके। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि माँगी गई ₹3,705.30 करोड़ की पूरी राशि NDRF और SDRF के नियमों के तहत बिना किसी मनमानी कटौती के स्वीकृत और जारी की जाए।
किसानों और प्रभावित तालुकों का मामला
खड़गे ने छोटे और सीमांत किसानों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष माँग रखी। उन्होंने कहा कि इनपुट सब्सिडी की गणना 2015-16 की पुरानी कृषि जनगणना के आधार पर नहीं, बल्कि कर्नाटक के अद्यतन 'भूमि' भू-अभिलेखों के आधार पर की जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान सहायता से वंचित न रह जाए।
इसके अतिरिक्त, जो 11 अतिरिक्त तालुक अभी 'ग्राउंड ट्रूथिंग' की प्रक्रिया से गुज़र रहे हैं, उन्हें और आगे योग्य पाए जाने वाले किसी भी अन्य तालुक को एक ही निरंतर सूखा घटना के हिस्से के रूप में केंद्रीय सहायता दी जाए।
जल संकट और ऊर्जा की चुनौती
खड़गे ने विशेष रूप से कावेरी और पनबिजली (हाइडल) कैचमेंट क्षेत्रों में जलाशयों के ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर का उल्लेख करते हुए पीने के पानी की सुरक्षा और वैकल्पिक बिजली की बढ़ी हुई लागत के लिए अधिक केंद्रीय सहायता की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पहले से ही जल प्रबंधन को लेकर अंतर-राज्यीय विवादों में उलझा हुआ है।
राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संकट
खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि सूखे से राहत पहुँचाना एक मानवीय ज़रूरत है और इसे केंद्र तथा राज्य के बीच राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र से गुज़ारिश की कि सहायता 'राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुए बिना, योग्यता के आधार पर और पूरी तत्परता के साथ' जारी की जाए, ताकि 31 लाख से अधिक प्रभावित किसान परिवारों को भोजन, चारा, पानी और आजीविका की सुरक्षा मिल सके।
यह पत्र खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया, जिससे यह मुद्दा राष्ट्रीय विमर्श में आ गया। केंद्र की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।