24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक सूखा: सीएम शिवकुमार ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ₹3,705 करोड़ की राहत राशि का 50% अंतरिम जारी करने की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक सूखा: सीएम शिवकुमार ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, ₹3,705 करोड़ की राहत राशि का 50% अंतरिम जारी करने की मांग

सारांश

कर्नाटक के 177 तालुक सूखे की चपेट में हैं और संख्या 200 पार कर सकती है। सीएम शिवकुमार ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर ₹3,705 करोड़ की राहत राशि का 50% अंतरिम जारी करने की मांग की है — क्योंकि सरकारी मंजूरी प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और जमीनी संकट की तेज़ रफ्तार में फासला बढ़ता जा रहा है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 23 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सूखा राहत पत्र लिखा।
कर्नाटक में अब तक 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है; मानसून के अंत तक यह संख्या 200 से अधिक हो सकती है।
राज्य सरकार ने ₹3,705.30 करोड़ की राहत राशि में से 50 प्रतिशत अंतरिम सहायता के रूप में तत्काल जारी करने का अनुरोध किया।
प्रभावित फसलों का अनुमानित क्षेत्रफल 40 लाख हेक्टेयर से अधिक हो सकता है।
कावेरी बेसिन के जलाशयों का स्तर गिरने से बेंगलुरु में पेयजल संकट की आशंका।
नए क्षेत्रों के आकलन के बाद राज्य NDRF के तहत अतिरिक्त ज्ञापन केंद्र को सौंपेगा।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 23 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में गहराती सूखे की संकट की स्थिति का हवाला देते हुए मांगी गई ₹3,705.30 करोड़ की सूखा राहत राशि का 50 प्रतिशत अंतरिम वित्तीय सहायता के रूप में तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब राज्य के 177 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है और मानसून सीजन के अंत तक यह संख्या 200 से अधिक हो सकती है।

सूखे की स्थिति कितनी गंभीर

शिवकुमार ने पत्र में बताया कि राज्य सरकार ने पहले खरीफ 2026 सूखा ज्ञापन के माध्यम से 101 तालुकों के लिए ₹3,705.30 करोड़ की वित्तीय सहायता मांगी थी। इसके बाद स्थिति और बिगड़ी और सूखा प्रबंधन मैनुअल के मानकों पर वैज्ञानिक आकलन के आधार पर अतिरिक्त 76 तालुकों को भी सूखा प्रभावित घोषित करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के अंतिम चरण तक पहुँचते-पहुँचते कुल सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 200 से ऊपर जा सकती है। फसल क्षति का अनुमानित क्षेत्रफल 40 लाख हेक्टेयर से अधिक बताया जा रहा है।

जलाशय और पेयजल संकट

शिवकुमार ने कावेरी बेसिन के जलाशयों में पानी का स्तर खतरनाक रूप से नीचे जाने पर विशेष चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल की उपलब्धता पर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि जून से अगस्त के बीच होने वाली बारिश खरीफ की खेती, जलाशयों को भरने, पनबिजली उत्पादन, पशुओं के लिए चारे की आपूर्ति और भूजल स्तर बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है — और इस मानसून में इन सभी मोर्चों पर भारी कमी दर्ज की गई है।

केंद्रीय प्रक्रिया और समय की बाधा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नुकसान के मौके पर आकलन के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम के कर्नाटक दौरे का प्रस्ताव रखा गया है। इस टीम की रिपोर्ट पहले राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की उप-समिति के सामने रखी जाएगी, जिसके बाद उच्च स्तरीय समिति उसकी सिफारिशों पर विचार करेगी।

शिवकुमार ने इस प्रक्रिया की समयसीमा को लेकर चिंता जताई। उनके अनुसार, आकलन और मंजूरी की यह निर्धारित प्रक्रिया काफी समय लेने वाली है, जबकि ज़मीनी स्तर पर सूखे की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।

राहत राशि का उपयोग कहाँ होगा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अंतरिम सहायता मिलने पर राज्य सरकार तुरंत राहत कार्य शुरू कर सकेगी। इसमें मुख्य रूप से फसल नुकसान पर इनपुट सब्सिडी, पेयजल आपूर्ति, पशुधन सुरक्षा और अन्य आवश्यक राहत गतिविधियाँ शामिल हैं।

इसके अलावा शिवकुमार ने केंद्र से राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) की दूसरी किस्त में केंद्र का हिस्सा भी अग्रिम रूप से जारी करने का अनुरोध किया, ताकि राज्य के पास राहत कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें।

आगे क्या होगा

नए घोषित सूखा प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी है, और इसके पूरा होने के बाद राज्य सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत वित्तीय सहायता के लिए एक अतिरिक्त ज्ञापन केंद्र को सौंपेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, गर्मी के मौसम तक हालात और कठिन हो सकते हैं, जिससे समय पर केंद्रीय सहायता की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में सूखे की मौजूदा स्थिति क्या है?
कर्नाटक में अब तक 177 तालुकों को आधिकारिक रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 में भारी कमी के कारण फसलें, जलाशय, पशुधन और भूजल स्तर सभी प्रभावित हुए हैं, और मानसून सीजन समाप्त होते-होते प्रभावित तालुकों की संख्या 200 से अधिक हो सकती है।
सीएम शिवकुमार ने पीएम मोदी से क्या माँगा है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर राज्य के सूखा ज्ञापन में मांगी गई ₹3,705.30 करोड़ की राशि का 50 प्रतिशत यानी लगभग ₹1,852 करोड़ अंतरिम सहायता के रूप में तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष की दूसरी किस्त में केंद्र का हिस्सा भी अग्रिम जारी करने की माँग की गई है।
कर्नाटक में फसल नुकसान का अनुमान कितना है?
लगातार कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी के कारण प्रभावित फसलों का क्षेत्रफल 40 लाख हेक्टेयर से अधिक हो सकता है। अधिकारी नए घोषित सूखा प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रहे हैं।
बेंगलुरु पर सूखे का क्या असर पड़ सकता है?
कावेरी बेसिन के जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से नीचे है, जिससे आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने इस पर विशेष चिंता जताई है।
केंद्रीय सहायता मिलने की प्रक्रिया क्या है?
NDRF के तहत केंद्रीय सहायता के लिए पहले अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम राज्य का दौरा करती है, फिर उसकी रिपोर्ट राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की उप-समिति को सौंपी जाती है, और अंत में उच्च स्तरीय समिति अंतिम मंजूरी देती है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली होने के कारण शिवकुमार ने आकलन पूरा होने से पहले ही 50% अंतरिम सहायता जारी करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले