कर्नाटक सूखा राहत: CM डीके शिवकुमार ने PM मोदी को पत्र लिखकर ₹3,705 करोड़ का 50% अंतरिम सहायता के रूप में माँगा
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 23 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में गहराते सूखे संकट का हवाला देते हुए माँगी गई ₹3,705.30 करोड़ की सूखा राहत राशि का 50 प्रतिशत अंतरिम वित्तीय सहायता के रूप में तत्काल जारी करने का अनुरोध किया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 में भारी कमी के चलते अब तक 177 तालुक सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं, और यह संख्या 200 से अधिक होने की आशंका है।
सूखे की स्थिति और प्रभावित क्षेत्र
शिवकुमार ने पत्र में बताया कि राज्य सरकार ने शुरुआत में खरीफ 2026 सूखा ज्ञापन सौंपते हुए 101 तालुकों के लिए ₹3,705.30 करोड़ की वित्तीय सहायता माँगी थी। इसके बाद स्थिति और बिगड़ी, और वैज्ञानिक आकलन के आधार पर अतिरिक्त 76 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि मानसून सीजन समाप्त होते-होते सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 200 के पार जा सकती है। लगातार कम बारिश और मिट्टी में नमी की कमी के कारण प्रभावित फसलों का क्षेत्रफल 40 लाख हेक्टेयर से अधिक होने की आशंका जताई गई है।
कावेरी बेसिन और पेयजल संकट
शिवकुमार ने जलाशयों में घटते जलस्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त की, विशेष रूप से कावेरी बेसिन की स्थिति को लेकर। उनके अनुसार, इसका सीधा असर आने वाले महीनों में बेंगलुरु और आसपास के जिलों में पेयजल की उपलब्धता पर पड़ सकता है।
उन्होंने रेखांकित किया कि जून से अगस्त के बीच होने वाली बारिश खरीफ खेती, जलाशयों को भरने, पनबिजली उत्पादन, पशुओं के लिए चारे और भूजल स्तर — सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है। मौजूदा मानसून में इन सभी मोर्चों पर गंभीर कमी देखी गई है।
केंद्र से अंतरिम सहायता की माँग
पत्र में शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि आकलन और मंजूरी की निर्धारित प्रक्रिया — जिसमें अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम का दौरा, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की उप-समिति की समीक्षा और फिर उच्च स्तरीय समिति की मंजूरी शामिल है — काफी समय लेने वाली है। इस बीच ज़मीनी स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है।
उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि प्रक्रिया पूरी होने तक ₹3,705.30 करोड़ का 50 प्रतिशत अंतरिम सहायता के रूप में जारी किया जाए। इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) के तहत अतिरिक्त ज्ञापन भी सौंपने की योजना है, जब नए सूखा प्रभावित क्षेत्रों का नुकसान आकलन पूरा होगा।
राहत कार्यों की प्राथमिकताएँ
मुख्यमंत्री ने बताया कि समय पर केंद्रीय सहायता मिलने से राज्य सरकार तुरंत राहत कार्य शुरू कर सकेगी। इनमें विशेष रूप से फसल नुकसान पर इनपुट सब्सिडी, पेयजल आपूर्ति, पशुधन संरक्षण और अन्य आपातकालीन राहत गतिविधियाँ शामिल हैं।
शिवकुमार ने केंद्र से राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) की दूसरी किस्त में केंद्र का हिस्सा भी अग्रिम रूप से जारी करने का अनुरोध किया है, ताकि राज्य के आर्थिक संसाधन बढ़ें और समय पर राहत सुनिश्चित हो सके। यह ऐसे समय में आया है जब गर्मी के मौसम से पहले कर्नाटक को जलसंकट और कृषि संकट की दोहरी मार झेलने की आशंका है।