22 अक्टूबर 2026
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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 26 अक्टूबर तक बढ़ाई

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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 26 अक्टूबर तक बढ़ाई

सारांश

टाइगर श्रॉफ की कार पर 18 अक्टूबर को हुई फायरिंग के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 26 अक्टूबर तक बढ़ी। मुंबई पुलिस 9 दिन की कस्टडी चाहती थी, लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों के बाद सीमित अवधि ही मंज़ूर की।

मुख्य बातें

मुंबई एस्प्लेनेड कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2026 को चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 26 अक्टूबर तक बढ़ाई।
मुंबई पुलिस ने 9 दिन की कस्टडी माँगी थी; अदालत ने केवल 4 दिन मंज़ूर किए।
चारों आरोपियों को दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाया गया था।
फायरिंग 18 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे हुई थी; अभिनेता टाइगर श्रॉफ बाल-बाल बचे, उनके ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हुए।
बचाव पक्ष ने रिमांड रिपोर्ट में हथियार की जानकारी अधूरी होने और मोबाइल फोन पहले ही जब्त होने का हवाला दिया।

मुंबई के एस्प्लेनेड कोर्ट (किला कोर्ट) ने 22 अक्टूबर 2026 को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 26 अक्टूबर तक बढ़ा दी। मुंबई पुलिस ने नौ दिन की कस्टडी की माँग की थी, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद केवल चार दिन की हिरासत मंज़ूर की।

कोर्ट में क्या हुआ

चारों आरोपियों को दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाया गया था। एस्प्लेनेड कोर्ट में पेशी के दौरान अदालत ने आरोपियों से पूछा कि क्या उन्हें पुलिस के खिलाफ कोई शिकायत है। सभी ने बताया कि उन्हें कोई शिकायत नहीं है।

बचाव पक्ष के वकील अजिंक्य मिर्गल मधुकर ने कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपियों के मोबाइल फोन पहले ही जब्त किए जा चुके हैं, जिनसे डेटा रिकवर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आरोपियों को फिजिकल कस्टडी में रखने की आवश्यकता नहीं है।

हथियार से जुड़े सवाल

वकील अजिंक्य मिर्गल मधुकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'आरोपियों पर हथियार सप्लाई करने का आरोप है। फिर भी रिमांड रिपोर्ट में इन हथियारों के बारे में कोई खास जानकारी नहीं थी — सिर्फ एक पिस्टल का जिक्र था। पिस्टल देसी थी या विदेशी, उसके प्रकार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी।'

उन्होंने आगे कहा, 'पिस्टल जैसा हथियार कोई मामूली चीज नहीं है। वह कोई पटाखे चलाने वाला खिलौना नहीं है, जिसे कोई बस बांट दे।' अभियोजन पक्ष ने इसके जवाब में जब्त मोबाइल फोन से डेटा रिकवरी और हथियारों से जुड़ी जानकारी के लिए फिजिकल कस्टडी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 26 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी मंज़ूर की।

घटना का पृष्ठभूमि

यह घटना 18 अक्टूबर 2026 को शाम सात बजे हुई थी, जब अभिनेता टाइगर श्रॉफ अपने फुटबॉल क्लब से निकलकर घर की ओर जा रहे थे। कथित तौर पर उनकी कार पर गोलीबारी की गई, जिसमें वे बाल-बाल बच गए। हालाँकि, उनके ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए।

गौरतलब है कि मुंबई में बॉलीवुड हस्तियों से जुड़ी इस तरह की घटनाएँ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाती हैं। पुलिस ने घटना के बाद तत्परता से जाँच शुरू की और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

जाँच की आगे की दिशा

26 अक्टूबर को हिरासत की अवधि समाप्त होने पर पुलिस दोबारा अदालत का रुख कर सकती है। अभियोजन पक्ष ने 31 अक्टूबर तक हिरासत की माँग की थी, जिसे अदालत ने अभी मंज़ूर नहीं किया है। जाँचकर्ता हथियारों की आपूर्ति शृंखला और आरोपियों के मोबाइल डेटा की जाँच पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग कब और कहाँ हुई?
फायरिंग 18 अक्टूबर 2026 को शाम सात बजे मुंबई में हुई, जब टाइगर श्रॉफ अपने फुटबॉल क्लब से निकलकर घर जा रहे थे। इस हमले में वे बाल-बाल बचे, लेकिन उनके ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
इस मामले में अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्हें दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर मुंबई लाया गया और 22 अक्टूबर को एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया।
अदालत ने पुलिस को पूरी 9 दिन की कस्टडी क्यों नहीं दी?
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपियों के मोबाइल फोन पहले ही जब्त हो चुके हैं और रिमांड रिपोर्ट में हथियार की पूरी जानकारी नहीं थी। इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 26 अक्टूबर तक की ही हिरासत मंज़ूर की।
इस केस में अगली सुनवाई कब होगी?
चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 26 अक्टूबर को समाप्त होगी। उसके बाद मुंबई पुलिस आगे की हिरासत के लिए दोबारा अदालत का रुख कर सकती है; अभियोजन पक्ष ने मूल रूप से 31 अक्टूबर तक की कस्टडी माँगी थी।
बचाव पक्ष ने हथियार को लेकर क्या सवाल उठाए?
वकील अजिंक्य मिर्गल मधुकर ने कहा कि रिमांड रिपोर्ट में केवल एक पिस्टल का उल्लेख था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि वह देसी थी या विदेशी और उसका प्रकार क्या था। उन्होंने तर्क दिया कि इस अधूरी जानकारी के आधार पर लंबी हिरासत उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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