मनोज जरांगे की वायरल ऑडियो क्लिप पर उदय सामंत ने एसआईटी और फॉरेंसिक जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना के वरिष्ठ नेता और उद्योग मंत्री उदय सामंत ने 22 अक्टूबर 2026 को जालना, महाराष्ट्र में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल द्वारा सार्वजनिक की गई 32 मिनट की वायरल ऑडियो क्लिप की व्यापक जांच की माँग की। उन्होंने इस मामले में फॉरेंसिक जांच, साइबर जांच और विशेष जांच दल (एसआईटी) से जाँच कराए जाने पर जोर दिया। यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय भड़का जब जरांगे ने इस कथित ऑडियो को जारी कर मराठा आंदोलन को बदनाम करने और उसे कमज़ोर करने की साजिश का आरोप लगाया।
ऑडियो क्लिप में क्या है
कथित ऑडियो क्लिप के एक हिस्से में कहा गया है कि 'जरांगे को पहले ही ₹500 करोड़ पहुंच चुके हैं।' इसी के साथ यह भी दावा किया गया कि 'मुख्य व्यक्तिगत निशाना देवेंद्र फडणवीस और भाजपा है।' हालाँकि ये दोनों दावे अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं और इन्हें कथित तौर पर ऑडियो रिकॉर्डिंग में सुना गया बताया गया है।
उदय सामंत ने आरोप लगाया कि यह ऑडियो क्लिप उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मराठा समाज में छवि को नुकसान पहुँचाने और शिवसेना व भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गलतफहमी पैदा करने की सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकती है।
सामंत की जांच की माँग
सामंत ने कहा कि जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होना चाहिए कि रिकॉर्डिंग में आवाज़ें किसकी हैं, इसे किसने रिकॉर्ड किया, यह कहाँ रिकॉर्ड की गई और यह मनोज जरांगे पाटिल तक कैसे पहुँची। उन्होंने पुलिस, साइबर सेल, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं और एसआईटी द्वारा संयुक्त जांच की अपील की।
उन्होंने यह भी बताया कि शिवसेना का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर इन जांचों की औपचारिक माँग करेगा।
₹500 करोड़ के दावों पर प्रतिक्रिया
कथित ₹500 करोड़ के लेनदेन पर सामंत ने स्पष्ट किया कि मनोज जरांगे पाटिल स्वयं कह चुके हैं कि उन्हें कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई। एकनाथ शिंदे भी इस मामले पर अपना पक्ष सार्वजनिक कर चुके हैं। सामंत ने कहा कि अपुष्ट आर्थिक दावों पर बहस करने की बजाय उन लोगों की पहचान करना ज़रूरी है जो पर्दे के पीछे से इस पूरे मामले को संचालित कर रहे हैं।
रामदास कदम की तीखी प्रतिक्रिया
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामदास कदम ने भी ऑडियो क्लिप की सामग्री की कड़ी आलोचना की। कदम ने दावा किया कि मराठा आरक्षण को कानूनी मजबूती दिलाने में एकनाथ शिंदे की भूमिका निर्णायक रही है और मराठा समुदाय के लिए आवश्यक कानूनी रणनीतियाँ उन्हीं के नेतृत्व में तैयार की गई थीं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन पहले से ही संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। सामंत ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि कुछ तत्व — चाहे पार्टी के भीतर हों या बाहर — इस मुद्दे का फायदा उठाकर मराठा समाज और शिवसेना के बीच दूरी पैदा करना चाहते हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं। गौरतलब है कि यह कथित ऑडियो क्लिप की सत्यता अभी जांच के दायरे में है, और सभी आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं। जांच के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा पर गहरा असर डाल सकते हैं।