एकनाथ शिंदे ऑडियो विवाद: संजय निरूपम ने की निष्पक्ष जांच की मांग, AI फर्जीवाड़े की आशंका जताई
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना नेता संजय निरूपम ने 23 अक्टूबर 2026 को पुणे में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से जुड़े विवादास्पद ऑडियो क्लिप प्रकरण पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए निष्पक्ष जांच की माँग की। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक के दुरुपयोग के इस दौर में ऑडियो को तुरंत प्रामाणिक मान लेना जल्दबाजी होगी और जांच के बाद ही पार्टी कोई अंतिम टिप्पणी करेगी।
ऑडियो क्लिप पर शिवसेना का रुख
निरूपम ने कहा, 'एक ऑडियो क्लिप भी जारी की गई है, लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ तकनीक, विशेषकर एआई का व्यापक उपयोग हो रहा है। सोशल मीडिया पर अनेक पोस्ट, वीडियो और ऑडियो ऐसे होते हैं जो पूरी तरह फर्जी साबित होते हैं। इसलिए इस समय यह कहना कि यह ऑडियो पूरी तरह सही है, जल्दबाजी होगी।'
उन्होंने यह भी कहा कि जांच के बाद यह स्थापित किया जाना चाहिए कि ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाजें वास्तव में उन्हीं व्यक्तियों की हैं जिनके नाम लिए जा रहे हैं। जब तक सभी तथ्य जांच से सामने न आ जाएँ, तब तक पार्टी की ओर से कोई ठोस बयान देना उचित नहीं होगा।
ईडी-सीबीआई जांच पर पार्टी की स्थिति
मराठा नेता मनोज जरांगे के आरोपों के संदर्भ में संजय राउत की ईडी और सीबीआई जांच की माँग पर निरूपम ने कहा कि शिवसेना के नेताओं ने स्वयं मुख्यमंत्री से मिलकर इस प्रकरण की जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच राज्य सरकार की एजेंसियाँ करेंगी या केंद्रीय एजेंसियाँ, यह निर्णय मुख्यमंत्री को लेना है।
निरूपम ने कहा कि यदि राज्य की एजेंसियाँ निष्पक्ष जांच करने में सक्षम न हों, तो सीबीआई जांच की सिफारिश की जा सकती है — परन्तु यह अंतिम फैसला मुख्यमंत्री का होगा।
मराठा आरक्षण पर शिवसेना का पक्ष
निरूपम ने कहा कि शिवसेना मानती है कि महाराष्ट्र के लाखों मराठा युवाओं की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, चाहे वे रोज़गार से जुड़ी हों या शिक्षा में आरक्षण से संबंधित। उन्होंने कहा, 'जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे, तब इस दिशा में कई प्रयास किए गए और उनके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए।' इस कारण पार्टी और मनोज जरांगे पाटिल की सोच में कोई बुनियादी विरोधाभास नहीं है।
सीएम पद की चर्चा और गुलाबराव पाटिल का बयान
शिवसेना मंत्री गुलाबराव पाटिल के बयान पर निरूपम ने कहा कि यह स्वाभाविक राजनीतिक आकांक्षा है कि पार्टी के नेता और कार्यकर्ता चाहते हैं कि एकनाथ शिंदे फिर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने कहा कि शिंदे का मुख्यमंत्री कार्यकाल सराहनीय रहा है और इस इच्छा में किसी को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं है।
संजय राउत और लॉरेंस बिश्नोई प्रकरण पर प्रतिक्रिया
शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत के गृह मंत्री की तुलना कथित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से करने वाले बयान पर निरूपम ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे 'बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान' करार देते हुए कहा कि विपक्ष को कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी देश के गृह मंत्री की तुलना किसी आपराधिक गिरोह से जुड़े व्यक्ति से करना उचित राजनीतिक विमर्श नहीं है। उन्होंने कहा कि शायद इसीलिए अब लोग राउत के ऐसे बयानों को गंभीरता से नहीं लेते।
महाराष्ट्र की राजनीति में यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और महायुति गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर आंतरिक बहस भी चल रही है।