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मराठा आरक्षण विवाद: जरांगे की ऑडियो क्लिप से महायुति में भाजपा-शिवसेना आमने-सामने

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मराठा आरक्षण विवाद: जरांगे की ऑडियो क्लिप से महायुति में भाजपा-शिवसेना आमने-सामने

सारांश

मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल की ऑडियो क्लिप ने महायुति में आग लगा दी। शिवसेना के रामदास कदम ने भाजपा पर शिंदे को मोहरा बनाकर कमज़ोर करने का आरोप लगाया, तो भाजपा ने पलटवार किया। गठबंधन की एकता अब खुले सवालों के घेरे में है।

मुख्य बातें

मनोज जरांगे-पाटिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऑडियो क्लिप चलाई, जिसमें कथित भुगतान के दावे हैं।
शिवसेना नेता रामदास कदम ने आरोप लगाया कि भाजपा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश कर रही है।
कदम ने भाजपा विधायक प्रसाद लाड और जरांगे की 32 मिनट की मुलाकात की तस्वीरें पेश कीं।
भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने कदम के बयान को 'गैर-जिम्मेदाराना' करार दिया और कड़ी आलोचना की।
कदम ने PM मोदी , गृह मंत्री अमित शाह , RSS सरसंघचालक मोहन भागवत और CM देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर जाँच की माँग की।

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर उस समय तीखी जुबानी जंग छिड़ गई जब मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऑडियो क्लिप चलाई, जिसमें कथित तौर पर भुगतान के दावे किए गए हैं। इस क्लिप के सामने आने के बाद गठबंधन के दो प्रमुख साझेदारों — भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना — के बीच 23 अक्टूबर 2026 को खुला टकराव देखने को मिला।

विवाद की जड़: क्या है ऑडियो क्लिप का मामला

मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुआ मनोज जरांगे-पाटिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऑडियो क्लिप प्रस्तुत की, जिसमें कथित तौर पर भुगतान से जुड़े दावे हैं। इस क्लिप में भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर का नाम आने का भी दावा किया गया है। गौरतलब है कि यह पूरा विवाद तब और गहरा हो गया जब शिवसेना नेता और पूर्व मंत्री रामदास कदम ने सार्वजनिक रूप से भाजपा पर सीधे निशाना साधा।

कदम ने दावा किया कि यह ऑडियो क्लिप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से तैयार नहीं की गई थी, बल्कि इसका संबंध भाजपा से है। उन्होंने कहा कि उन्हें यह क्लिप मराठा समुदाय के लिए काम करने वाले एक कार्यकर्ता ने दी है और वे बिना सबूत के कोई बात नहीं करते।

शिवसेना के आरोप: 'शिंदे की पीठ में छुरा घोंपने की कोशिश'

रामदास कदम ने आरोप लगाया कि भाजपा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कमज़ोर करने के लिए जरांगे-पाटिल को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल उठाया — 'आखिर एकनाथ शिंदे को खत्म करने की कसम किसने खाई है? क्या भाजपा भी अब शिंदे से डरने लगी है?'

कदम ने भाजपा विधायक प्रसाद लाड और जरांगे-पाटिल के बीच 32 मिनट की मुलाकात की तस्वीरें भी पेश कीं। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच खाना खाने और स्वागत-सत्कार की जो राजनीतिक दोस्ती दिखती है, वह कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने इस पूरे मामले की गहन जाँच की माँग की और कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखे हैं।

भाजपा की पलटवार: 'गैर-जिम्मेदाराना बयान'

भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने कदम के बयानों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा होने के नाते एक वरिष्ठ और जिम्मेदार नेता का इस तरह की टिप्पणी करना बिल्कुल अनुचित है। उन्होंने इस बयानबाज़ी पर खुली निराशा जताई।

भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने भी कदम के आरोपों को सिरे से खारिज किया। लाड का कहना था कि ऐसे दावे करने से पहले कदम को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से बात कर लेनी चाहिए थी।

जरांगे-पाटिल पर भी निशाना

कदम ने मनोज जरांगे-पाटिल पर भी हमला बोला और उन पर निजी स्वार्थ के लिए आरोप लगाने का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा कि अब जरांगे का असली चेहरा सबके सामने आ गया है और उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें यह क्लिप कब मिली।

यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण आंदोलन पहले से ही महाराष्ट्र की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है और महायुति गठबंधन के लिए यह आंतरिक विवाद राजनीतिक रूप से नाजुक साबित हो सकता है।

आगे क्या होगा

कदम ने इस ऑडियो क्लिप की जाँच की माँग की है और देश के शीर्ष नेताओं को पत्र लिखकर मामले को उच्च स्तर पर उठाया है। आलोचकों का कहना है कि यह विवाद महायुति की आंतरिक एकता पर सवालिया निशान लगाता है और आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीतिक रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ भाजपा और शिवसेना दोनों मराठा वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखने की होड़ में हैं। शिवसेना का जरांगे-भाजपा 'गठजोड़' का आरोप एक बड़े डर की ओर इशारा करता है — कि एकनाथ शिंदे का जनाधार कहीं कट न जाए। गौरतलब है कि मुख्यधारा की कवरेज इस तनाव को केवल बयानबाज़ी तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि महायुति के तीनों दल — जो अलग-अलग आधारों पर टिके हैं — मराठा आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर एक सुर में कब तक बोल सकते हैं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज जरांगे-पाटिल की ऑडियो क्लिप में क्या है?
मनोज जरांगे-पाटिल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐसी ऑडियो क्लिप चलाई जिसमें कथित तौर पर भुगतान के दावे किए गए हैं और जिसमें भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर का नाम आने का भी दावा है। क्लिप की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और इसकी जाँच की माँग हो रही है।
रामदास कदम ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना नेता रामदास कदम ने आरोप लगाया कि भाजपा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को कमज़ोर करने के लिए जरांगे-पाटिल को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने भाजपा विधायक प्रसाद लाड और जरांगे के बीच 32 मिनट की मुलाकात की तस्वीरें भी पेश कीं।
भाजपा ने शिवसेना के आरोपों पर क्या कहा?
भाजपा विधायक प्रवीण दरेकर ने रामदास कदम के बयानों को 'गैर-जिम्मेदाराना' बताते हुए कड़ी आलोचना की। भाजपा विधायक प्रसाद लाड ने भी आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि ऐसे दावे करने से पहले कदम को मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे से बात कर लेनी चाहिए थी।
इस मामले में जाँच की माँग किसने और कहाँ की है?
शिवसेना नेता रामदास कदम ने इस पूरे मामले की गहन जाँच की माँग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, RSS सरसंघचालक मोहन भागवत और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र भेजकर इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया है।
यह विवाद महायुति गठबंधन के लिए क्यों अहम है?
यह विवाद महायुति के तीनों दलों — भाजपा, शिवसेना और NCP — की आंतरिक एकता पर सवाल उठाता है, खासतौर पर मराठा आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की खुली बयानबाज़ी गठबंधन की साझा राजनीतिक रणनीति को कमज़ोर कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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