मराठा आरक्षण पर महाराष्ट्र में सियासत तेज़: उदय सामंत बोले — जारांगे को गलत जानकारी दे रहे उनके करीबी
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी 20 अक्टूबर 2026 को नए सिरे से तेज़ हो गई, जब महायुति सरकार के मंत्रियों और शिवसेना नेताओं ने मराठा आंदोलन के अगुवा मनोज जारांगे पाटिल पर सीधे निशाना साधा। दशहरा रैली के मौके पर मंत्री उदय सामंत और प्रताप सरनाईक समेत कई नेताओं ने जारांगे पाटिल के बदले हुए रुख पर सवाल उठाए।
उदय सामंत का बयान — 'मुझे खुद उलझन है'
मंत्री उदय सामंत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कल शाम मनोज जारांगे पाटिल ने स्वयं उनसे फ़ोन पर बात की थी और रैली के दौरान लगाए गए आरोपों पर चर्चा की थी। सामंत ने कहा, 'मैंने उन्हें स्पष्ट कर दिया था कि अगर उनके पास कोई सबूत है तो मैं खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एकनाथ शिंदे साहब का पक्ष साफ कर दूंगा।'
उन्होंने कहा, 'आज रैली में एक बिल्कुल अलग मुद्दा सामने आ गया। उनके आसपास के लोग उन्हें गलत जानकारी दे रहे हैं, लेकिन इससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के बीच कोई तनाव पैदा नहीं होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है।
सरनाईक की चेतावनी — 'राजनीतिक रुख स्पष्ट करें जारांगे'
मंत्री प्रताप सरनाईक ने जारांगे पाटिल के बदले हुए स्वर पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पहले जारांगे को आम मराठा समुदाय का प्रतिनिधि माना जाता था और उनका रुख समुदाय के कार्यकर्ताओं को उचित लगता था।
सरनाईक ने कहा, 'अब वे जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उससे ऐसा लगता है मानो वे महा विकास अघाड़ी (MVA) के नेताओं की ओर से बोल रहे हों। उन्हें अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करना चाहिए।' गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सत्तारूढ़ गठबंधन ने जारांगे पाटिल पर विपक्षी कनेक्शन का आरोप लगाया हो।
दशहरा रैली का राजनीतिक संदेश
शिवसेना नेता दीपक केसरकर ने दशहरा रैली को वैचारिक जामा पहनाते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे की शिक्षा थी कि प्रयासों का 80 प्रतिशत समाज सेवा में और केवल 20 प्रतिशत राजनीति में लगाया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि एकनाथ शिंदे रैली में उन किसानों के लिए राहत उपायों की घोषणा कर सकते हैं जो सूखे और बेमौसम बारिश की मार झेल रहे हैं।
शिवसेना सांसद ज्योति वाघमारे ने रैली के दोहरे उत्सव का उल्लेख किया — बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी और शिवसेना के 60 वर्ष पूरे होने का जश्न। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा के कारण इस उत्सव पर 'दुख की छाया' भी है।
मराठा आरक्षण विवाद की पृष्ठभूमि
मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में वर्षों से जटिल बना हुआ है। मनोज जारांगे पाटिल की अगुवाई में आंदोलन ने कई बार राज्य सरकार को वार्ता की मेज़ पर बुलाया है। आलोचकों का कहना है कि सत्तारूढ़ दलों ने चुनावी नज़दीकियों के साथ-साथ जारांगे पर अपना रुख बदला है, जबकि सरकार का तर्क है कि समुदाय को भ्रामक जानकारी दी जा रही है।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में किसान संकट और ओबीसी बनाम मराठा आरक्षण की बहस एक साथ चल रही है। आने वाले दिनों में जारांगे पाटिल का अगला कदम और सरकार की आरक्षण नीति पर स्थिति राज्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकती है।