मनोज जरांगे का आंदोलन वापसी: संजय निरुपम बोले — मराठा युवाओं को मिलेगा न्याय
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 18 सितंबर 2026 को मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल के अनशन और आंदोलन वापस लेने के फैसले का स्वागत किया तथा कहा कि महाराष्ट्र सरकार मराठा युवाओं को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। निरुपम ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्य सरकार मराठा युवाओं की चिंताओं को लेकर गंभीर हैं।
मराठा आरक्षण पर सरकार का रुख
निरुपम ने कहा कि जरांगे पाटिल का आंदोलन वापस लेना एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने मुंबई में चल रहे गणपति उत्सव का संदर्भ देते हुए कहा कि इस पर्व के दौरान पुलिस पर सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने का अत्यधिक दबाव रहता है। ऐसे संवेदनशील समय में यदि आंदोलनकारी मुंबई पहुँचते, तो पुलिस-प्रशासन पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता था। यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार केंद्रीय बना हुआ है।
भारत की सेमीकंडक्टर क्रांति पर निरुपम का दावा
निरुपम ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर चिप उत्पादन के क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और अब इस मिशन का दूसरा चरण आरंभ हो गया है। उन्होंने बताया कि एक समय भारत तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण वस्तुओं के लिए आयात पर निर्भर था, किंतु अब देश में बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर उत्पादन हो रहा है। उनके अनुसार, एक दर्जन से अधिक कंपनियाँ इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। निरुपम ने इसे भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। गौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक एवं कंप्यूटर क्रांति में सेमीकंडक्टर चिप की भूमिका अत्यंत निर्णायक है और भारत अब इस क्षेत्र में निर्यातक बनने की दिशा में अग्रसर है।
शरद पवार के किसान-संबंधी पत्र पर प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों और किसानों की समस्याओं पर शरद पवार की ओर से उठाए गए मुद्दों पर निरुपम ने कहा कि पवार महाराष्ट्र के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। यदि उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों की परेशानियों को लेकर कोई पत्र लिखा है, तो उसका संज्ञान लिया जाएगा। निरुपम ने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र सरकार, मुख्यमंत्री एवं दोनों उपमुख्यमंत्री किसानों की कठिनाइयों को दूर करने के लिए आगे की योजना बनाएंगे।
दिशा सालियान मामले में जाँच की माँग
दिशा सालियान मामले पर निरुपम ने कहा कि उनकी मौत रहस्यमय परिस्थितियों में हुई थी और इसकी निष्पक्ष एवं गंभीर जाँच होनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल बनाने का आरोप लगाया। निरुपम ने कहा कि जाँच पूरी होने से पहले किसी को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती और न ही जाँच को राजनीतिक साजिश बताकर खारिज करना उचित है। आदित्य ठाकरे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वे निर्दोष हैं तो उन्हें जाँच एजेंसी के समक्ष बेगुनाही से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए।
आगे की राह
जरांगे पाटिल के आंदोलन वापस लेने से महाराष्ट्र में अस्थायी राहत तो है, लेकिन मराठा आरक्षण का मूल प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है। सरकार की प्रतिबद्धता की असली परीक्षा इस बात से होगी कि आने वाले दिनों में ठोस नीतिगत कदम उठाए जाते हैं या नहीं।