मराठा आरक्षण: भाई जगताप की माँग — जारांगे से बातचीत करे सरकार, पहले स्वीकृत माँगें लागू हों
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने 16 सितंबर को मुंबई में मराठा आरक्षण आंदोलन, यूपीआई लेनदेन शुल्क, दिशा सालियन प्रकरण और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) जैसे अहम मुद्दों पर महाराष्ट्र एवं केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने मराठा आंदोलनकारी मनोज जारांगे पाटिल की माँगों का समर्थन करते हुए सरकार से सीधे संवाद का रास्ता अपनाने और पहले स्वीकार की जा चुकी माँगों को तत्काल लागू करने की अपील की।
मराठा आरक्षण: जगताप का सरकार पर सीधा हमला
जगताप ने कहा कि मनोज जारांगे पाटिल मराठा समाज की न्यायसंगत माँगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और कांग्रेस सहित समाज के विभिन्न तबकों ने इसका खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन दावों पर सवाल उठाए जिनमें कहा जा रहा है कि जारांगे की 13 में से 12 माँगें मान ली गई हैं और एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
जगताप के अनुसार, संबंधित विषय पहले भी न्यायालय में था, किंतु चुनाव के दौरान सरकार ने उस पर निर्णय लेने में कोई संकोच नहीं किया था। उनका कहना है कि अब अदालती लंबितता की आड़ लेकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना मराठा समाज के साथ सरासर अन्याय होगा।
आंदोलन और संवाद की अपील
मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान जारांगे के आंदोलन को लेकर BJP की अपील पर जगताप ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार को स्वयं जारांगे पाटिल के पास जाकर बातचीत की पहल करनी चाहिए, न कि उन पर दबाव बनाना चाहिए। पिछले आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को बल-प्रयोग नहीं, बल्कि संवाद का मार्ग चुनना चाहिए।
जगताप ने अनशन को लोकतांत्रिक आंदोलन का एक महत्वपूर्ण और वैध माध्यम बताया और इस संदर्भ में महात्मा गांधी तथा स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण प्रस्तुत किया।
यूपीआई शुल्क: छोटे व्यापारियों पर बोझ की आशंका
यूपीआई के माध्यम से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव पर जगताप ने चिंता जताई। उनका कहना है कि फिलहाल यह शुल्क व्यापारियों पर लागू करने की बात है, लेकिन आगे चलकर इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी पहले से ही जीएसटी और अन्य करों के बोझ तले दबे हैं, और यह नया प्रस्तावित शुल्क उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
दिशा सालियन मामला और ध्यान भटकाने की राजनीति
दिशा सालियन प्रकरण पर जगताप ने कहा कि इस मामले की जाँच पहले ही पूरी हो चुकी है और सरकार अपने निर्णय ले चुकी है। उन्होंने स्वीकार किया कि इससे जुड़ी विशेष जाँच या अन्य प्रक्रियाओं की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। जगताप ने आरोप लगाया कि सरकार महाराष्ट्र के किसानों, मज़दूरों और आम नागरिकों की समस्याओं तथा महँगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे विषयों को बार-बार उठाती है।
यूसीसी पर एनडीए में दरार — जगताप का BJP को संदेश
गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी संबंधी बयान के बाद बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) — JDU — की अलग राय सामने आने पर जगताप ने कहा कि BJP को विपक्ष की प्रतिक्रिया पर बहस करने से पहले अपने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहमति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार सार्वजनिक रूप से यूसीसी को स्वीकार न करने की बात कह रहे हैं, तो गठबंधन में आंतरिक एकमत के बिना इस मुद्दे को आगे बढ़ाना राजनीतिक रूप से असंगत है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। जगताप की इस प्रेस वार्ता को इसी चुनावी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए।