छगन भुजबल का मनोज जरांगे पाटिल पर हमला — मराठा आरक्षण आंदोलन की भाषा को बताया 'बेकाबू ट्रेन'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार के मंत्री छगन भुजबल ने 16 सितंबर 2026 को मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की जा रही आक्रामक भाषा और उग्र होते विरोध प्रदर्शनों पर गहरी चिंता व्यक्त की। मुंबई में मीडिया से बातचीत में भुजबल ने स्पष्ट किया कि हाल की कैबिनेट बैठकों के बाद उनके कई मंत्री सहयोगी भी जरांगे पाटिल की बयानबाजी से नाराज हैं।
कैबिनेट की नाराजगी
भुजबल ने बताया कि कैबिनेट बैठकों के बाद एकाधिक मंत्रियों ने सामूहिक रूप से जरांगे पाटिल द्वारा नेताओं, उनके परिवारों और प्रशासनिक अधिकारियों पर किए जा रहे व्यक्तिगत हमलों पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि जरांगे पाटिल ने मुख्यमंत्री के पिता, कैबिनेट सहयोगी चंद्रकांत बावनकुले और एक महिला जिला कलेक्टर को भी निशाना बनाया है। भुजबल ने कहा, "देर आए दुरुस्त आए" — यह संकेत करते हुए कि उनके सहयोगी अब इस कटुता के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं।
बीड हिंसा और कानून व्यवस्था
भुजबल ने बीड जिले में हुई हिंसक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान विधायकों के घरों और होटलों को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि पुलिस बेबस नजर आई। उन्होंने जरांगे पाटिल के अभियान की तुलना एक "बेकाबू ट्रेन" से की। भुजबल ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोलने के अपने निर्णय का बचाव भी किया।
13 में से 12 मांगें मानीं — एक कानूनी दायरे से बाहर
भुजबल के अनुसार, सरकार ने आंदोलनकारियों की 13 में से 12 मांगें पहले ही स्वीकार कर ली हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जो एक मांग कानूनी सीमाओं से बाहर है, उसे पूरा करने के लिए सरकार कहाँ तक जा सकती है। गौरतलब है कि मराठा आरक्षण का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और संवैधानिक जटिलताओं से घिरा हुआ है।
ओबीसी हितों की रक्षा पर जोर
भुजबल ने स्पष्ट किया कि मराठा समाज के लिए आवंटित की जा रही योजनाओं और निधियों का लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय को भी समान रूप से मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार को याद दिलाया कि महायुति गठबंधन को 60 से 70 प्रतिशत OBC मतदाताओं का समर्थन मिला था। यह बयान इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि भुजबल खुद OBC नेता के रूप में पहचाने जाते हैं और मराठा आरक्षण की मांग अक्सर OBC कोटे पर असर डालने की आशंकाओं से जुड़ी रही है।
चुनावी जीत पर दावा और अन्य राजनीतिक मुद्दे
भुजबल ने उस दावे को खारिज किया कि जरांगे पाटिल ने चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मदद की थी। उन्होंने महायुति की जीत का श्रेय सरकार की कल्याणकारी योजनाओं — विशेषकर लाडकी बहिन योजना — और अजीत पवार तथा देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जरांगे पाटिल ने येवला सीट पर उन्हें हराने की विशेष कोशिश की, लेकिन वह चुनाव जीतने में सफल रहे। अन्य राजनीतिक मुद्दों पर बोलते हुए भुजबल ने कहा कि राज्य का वित्त विभाग आदर्श रूप से फिर से NCP के पास आना चाहिए, और उन्होंने धनंजय मुंडे को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का समर्थन करते हुए उन्हें एक बड़े समुदाय का प्रभावशाली नेता बताया — हालाँकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व पर छोड़ा।
यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा महायुति सरकार के लिए एक दीर्घकालिक राजनीतिक चुनौती बना हुआ है। आने वाले हफ्तों में जरांगे पाटिल के अगले कदम और सरकार की प्रतिक्रिया इस टकराव की दिशा तय करेगी।