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मराठा आरक्षण पर जारांगे की मांगें लागू करे सरकार, भाई जगताप का BJP पर हमला

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मराठा आरक्षण पर जारांगे की मांगें लागू करे सरकार, भाई जगताप का BJP पर हमला

सारांश

कांग्रेस नेता भाई जगताप ने एक साथ चार मोर्चों पर सरकार को घेरा — मराठा आरक्षण, यूपीआई शुल्क, दिशा सालियान मामला और यूसीसी। उनका सबसे तीखा सवाल यह रहा: जब NDA के अपने सहयोगी यूसीसी नहीं चाहते, तो BJP विपक्ष को जवाब देने की स्थिति में कैसे है?

मुख्य बातें

भाई जगताप ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में मनोज जारांगे पाटिल के मराठा आरक्षण आंदोलन का समर्थन किया।
उन्होंने माँग की कि सरकार जारांगे की पहले स्वीकृत माँगों को लागू करे और नई माँगों पर बातचीत शुरू करे।
₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क को छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदेह बताया।
यूसीसी पर नीतीश कुमार और जदयू की अलग राय का हवाला देते हुए BJP से NDA में पहले सहमति बनाने को कहा।
दिशा सालियान मामले की जांच को ध्यान भटकाने की राजनीति का हिस्सा बताया।

कांग्रेस नेता भाई जगताप ने 16 सितंबर 2026 को मुंबई में मराठा आरक्षण आंदोलन, यूपीआई ट्रांजैक्शन शुल्क, दिशा सालियन मामले की जांच और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर महाराष्ट्र एवं केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने मराठा आंदोलनकारी मनोज जारांगे पाटिल का खुलकर समर्थन करते हुए सरकार से माँग की कि पहले स्वीकार की गई माँगों को तुरंत लागू किया जाए और नई माँगों पर संवाद का रास्ता अपनाया जाए।

मराठा आरक्षण: जगताप ने उठाए तीखे सवाल

जगताप ने कहा कि मनोज जारांगे पाटिल मराठा समाज की न्यायसंगत माँगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और कांग्रेस सहित समाज के विभिन्न वर्गों ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन बयानों पर आपत्ति जताई जिनमें कहा जा रहा है कि जारांगे की 13 में से 12 माँगें स्वीकार की जा चुकी हैं और एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

जगताप ने कहा कि संबंधित विषय पहले भी अदालत में था, लेकिन चुनाव के दौरान सरकार ने उस पर निर्णय लिया था। उनके अनुसार, अब न्यायालय में मामला लंबित होने की आड़ में सरकार यदि जिम्मेदारी से पीछे हटती है, तो यह मराठा समाज के साथ अन्याय होगा।

बातचीत और लोकतांत्रिक आंदोलन पर जोर

मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान जारांगे के आंदोलन को लेकर BJP की अपील के संदर्भ में जगताप ने कहा कि सरकार को स्वयं जारांगे के पास जाकर बातचीत शुरू करनी चाहिए। पिछले आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि संवाद का रास्ता ही समाधान की कुंजी है।

उन्होंने अनशन को लोकतांत्रिक आंदोलन का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए महात्मा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम का उदाहरण प्रस्तुत किया, यह रेखांकित करते हुए कि शांतिपूर्ण विरोध की परंपरा को सम्मान मिलना चाहिए।

यूपीआई शुल्क: छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा बोझ

₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के प्रस्ताव पर जगताप ने कहा कि फिलहाल यह शुल्क व्यापारियों पर लागू करने की बात है, लेकिन आगे चलकर इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारी पहले से ही जीएसटी और अन्य करों के दबाव में हैं; यह नया शुल्क उनकी परेशानी और बढ़ा सकता है।

दिशा सालियान मामला और ध्यान भटकाने की राजनीति

दिशा सालियान मामले पर जगताप ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार इस मामले की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है और सरकार अपने निर्णय ले चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महाराष्ट्र के किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों की समस्याओं तथा महँगाई जैसे मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए दूसरे विषयों को उछाल रही है। उन्होंने ऐसी राजनीति की कड़ी आलोचना की।

यूसीसी पर एनडीए में दरार

गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी-संबंधी बयान के बाद बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के विरोध पर जगताप ने कहा कि BJP को विपक्ष पर टिप्पणी करने से पहले अपने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहमति बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब नीतीश कुमार और जदयू सार्वजनिक रूप से यूसीसी को अस्वीकार कर रहे हैं, तो गठबंधन में स्पष्ट राय के बिना यह मुद्दा उठाना विरोधाभासी है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब NDA के भीतर यूसीसी को लेकर असहमति की खबरें सामने आई हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यूपीआई शुल्क, दिशा सालियान और यूसीसी को एक ही बयान में पिरोना दिखाता है कि कांग्रेस महाराष्ट्र में भाजपा-नीत सरकार के खिलाफ बहु-मोर्चे का दबाव बनाने की कोशिश में है। यूसीसी पर नीतीश कुमार की असहमति को उठाना सबसे तेज तीर है — क्योंकि यह BJP के भीतरी अंतर्विरोध को सार्वजनिक करता है, विपक्ष के रुख को नहीं। असली सवाल यह है कि क्या मराठा आरक्षण का मुद्दा इन बयानों से आगे ठोस विधायी या न्यायिक हल की दिशा में बढ़ेगा, या यह चुनावी मौसम तक सिर्फ राजनीतिक हथियार बना रहेगा।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई जगताप ने मराठा आरक्षण पर क्या माँग की है?
कांग्रेस नेता भाई जगताप ने माँग की है कि सरकार मनोज जारांगे पाटिल की पहले स्वीकार की गई माँगों को तुरंत लागू करे और शेष माँगों पर सीधे बातचीत का रास्ता अपनाए। उन्होंने कहा कि अदालत में मामले का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचना मराठा समाज के साथ अन्याय है।
मनोज जारांगे पाटिल की कितनी माँगें स्वीकार हुई हैं?
BJP के बयानों के अनुसार जारांगे की 13 में से 12 माँगें स्वीकार की जा चुकी हैं और एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जगताप ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान अदालती मामले पर भी सरकार ने निर्णय लिया था, अब पीछे हटना उचित नहीं।
यूपीआई पर प्रस्तावित शुल्क से किसे नुकसान होगा?
जगताप के अनुसार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित शुल्क पहले छोटे व्यापारियों पर लागू होगा, जो पहले से जीएसटी और अन्य करों के बोझ तले हैं। उनकी आशंका है कि भविष्य में यह शुल्क आम उपभोक्ताओं तक भी पहुँच सकता है।
यूसीसी को लेकर NDA में मतभेद क्यों हैं?
गृह मंत्री अमित शाह के यूसीसी-संबंधी बयान के बाद बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से इसे अस्वीकार किया है। जगताप का कहना है कि NDA के भीतर सहमति बनाए बिना BJP का यह मुद्दा उठाना विरोधाभासी है।
दिशा सालियान मामले पर जगताप का क्या कहना है?
जगताप ने कहा कि उनकी जानकारी के मुताबिक दिशा सालियान मामले की जांच पूरी हो चुकी है और सरकार निर्णय ले चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों, मजदूरों और महँगाई जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे विषयों को उछाला जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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