क्या मराठा आरक्षण मुद्दे पर भाजपा विधायक ने स्पीकर से विशेष सत्र बुलाने की अपील की?

सारांश
Key Takeaways
- मराठा आरक्षण आंदोलन तेजी पकड़ रहा है।
- समाधान आवताडे ने विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।
- मनोज जरांगे की अगुवाई में हजारों लोग जुटे हैं।
- ओबीसी समाज की ओर से चेतावनी दी गई है।
- यह मुद्दा सामाजिक न्याय का प्रतीक है।
मुंबई, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा तेजी से बढ़ता जा रहा है। मुंबई के आजाद मैदान में मनोज जरांगे अपने हजारों समर्थकों के साथ आरक्षण की मांग को लेकर उपस्थित हैं। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक समाधान आवताडे ने इस विषय पर विधानसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की गुजारिश की।
पंढरपुर-मंगलवेधा से भाजपा विधायक समाधान आवताडे ने शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने मराठा आरक्षण मुद्दे पर चर्चा और समाधान हेतु विधानमंडल का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मनोज जरांगे पाटिल के नेतृत्व में आजाद मैदान में चल रहे आंदोलन को ध्यान में रखते हुए, मैं विनम्रता से अनुरोध करता हूं कि महाराष्ट्र विधानमंडल का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया जाए ताकि मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान किया जा सके।
आवताडे ने कहा कि आरक्षण की मांग तेजी से बढ़ रही है और पूरा मराठा समुदाय एक बार फिर जरांगे के अनिश्चितकालीन अनशन के समर्थन में एकजुट हो गया है, जो शुक्रवार सुबह से शुरू हुआ है।
वहीं, मनोज जरांगे पाटिल ने कहा कि इस बार की लड़ाई अंतिम लड़ाई है। उन्होंने कहा कि या तो सरकार हमें आरक्षण दे, या मैं चला जाऊंगा (मर जाऊंगा), इनमें से एक चीज होनी है, लेकिन इस बार आरक्षण लेकर ही जाऊंगा, यह तय है। उन्होंने कहा कि हम अपने हक का आरक्षण मांगने आए हैं। अब कोई भाषणबाजी नहीं चलेगी।
इससे पहले, ओबीसी समाज के नेता लक्ष्मण हाके ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जरांगे की मांगें मानी गईं, तो ओबीसी समाज भी राज्यभर में आंदोलन करेगा। उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मनोज जरांगे के मोर्चे को 'गैरकानूनी और असंवैधानिक' बताया। उन्होंने कहा कि मराठा समाज खुद को पिछड़ा वर्ग साबित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राष्ट्रीय या राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष कोई सबूत पेश नहीं कर सका।
हाके ने आरोप लगाया कि राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों के सांसद, विधायक और नेता मनोज जरांगे के समर्थन में खड़े हैं, जिससे यह संदेश जा रहा है कि ओबीसी समाज के आरक्षण को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मराठा समाज से अधिक ताकत ओबीसी समाज के पास है। उन्होंने दावा किया कि यदि मराठा समाज को आरक्षण दिया गया, तो महाराष्ट्र के ओबीसी समाज के 60 प्रतिशत लोग सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।