वायरल ऑडियो विवाद: शिवसेना MLC मनीषा कायंदे बोलीं — 'शिंदे की छवि धूमिल करना बर्दाश्त नहीं, फोरेंसिक जांच हो'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़े कथित ₹500 करोड़ के लेनदेन और एक वायरल ऑडियो क्लिप ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। शिवसेना की विधान परिषद सदस्य (MLC) मनीषा कायंदे ने 24 अक्टूबर 2026 को इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उनके पुत्र श्रीकांत शिंदे की छवि खराब करने की किसी भी कोशिश को शिवसैनिक सहन नहीं करेंगे।
MLC कायंदे का बयान और जांच की मांग
मनीषा कायंदे ने कहा, 'इस मुद्दे पर काफी चर्चा हो रही है। हमारे विधायकों और सांसदों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और मामले की गहन जांच की मांग की है, जिसमें यह पता लगाने के लिए फोरेंसिक जांच भी शामिल है कि यह आवाज किसकी है।' उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि सच्चाई सामने लाने के लिए तुरंत जांच शुरू की जाएगी।
कायंदे ने साफ शब्दों में कहा, 'अगर कोई एकनाथ शिंदे व श्रीकांत शिंदे की छवि बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है, तो हम शिवसैनिक इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा है।
सत्ता परिवर्तन की अटकलों पर शिवसेना की सफाई
जब कायंदे से पूछा गया कि क्या इस कथित वायरल सामग्री का उद्देश्य महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन की कोशिश से जुड़ा हो सकता है, तो उन्होंने दोहराया कि कोई भी शिंदे की छवि धूमिल करने की साजिश रचे, शिवसेना हर मोर्चे पर उसका जवाब देगी। गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति में इस प्रकार के वायरल ऑडियो-वीडियो विवाद नए नहीं हैं — पिछले विधानसभा चुनावों से पहले भी ऐसे दावे सामने आए थे।
SIR और UCC पर शिवसेना का रुख
मालेगांव में इस्लाम पार्टी द्वारा UCC (यूनिफॉर्म सिविल कोड) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को हटाने की मांग पर कायंदे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'ये लोग खुद SIR (Special Intensive Revision) का अर्थ नहीं समझते और न ही UCC को। पूरी जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NDA के साथ है।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR के तहत दस्तावेज माँगना और पहचान देना किसी भी आम नागरिक के लिए परेशानी का कारण नहीं होना चाहिए। कायंदे ने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस के शासनकाल में भी SIR हुआ था और अब CEC के नाम पर हंगामा कराने की कोशिश की जा रही है।
मतदाता सूची और SIR पर शिवसेना की दलील
कायंदे ने कहा कि प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन मतदाता सूची बिल्कुल त्रुटिमुक्त होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि पहले विपक्ष भी इसी प्रकार की माँग करता था और इसे अब राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण के साथ-साथ एक नई परत जोड़ रहा है।
आगे क्या होगा
शिवसेना की माँग के मद्देनज़र अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि फोरेंसिक जांच कब और किस एजेंसी द्वारा शुरू होगी। मनोज जरांगे पाटिल का मराठा आरक्षण आंदोलन पहले से ही महाराष्ट्र की सियासत में एक संवेदनशील मुद्दा है। इस नए विवाद का असर आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों की रणनीति पर पड़ सकता है।