किम जोंग उन का आदेश: उत्तर कोरिया की सेना को बनाएंगे दुनिया की सबसे ताकतवर फौज
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने 22 और 23 अक्टूबर 2026 को प्योंगयांग में आयोजित कोरियाई पीपुल्स आर्मी के कंपनी कमांडरों के तीसरे सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए देश की सेना को विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली सैन्य शक्ति बनाने का आह्वान किया। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, इस सम्मेलन में सैन्य इकाइयों की युद्धक क्षमता, अनुशासन और वैचारिक प्रतिबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य
केसीएनए के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किम ने कहा, 'मजबूत सैन्य इकाइयों के निर्माण के ज़रिए सबसे ताकतवर सेना तैयार करना और उत्तर कोरिया की अपनी शैली में सैन्य बदलाव को गति देना सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य है।' उन्होंने कंपनी कमांडरों से पार्टी और विचारधारा के प्रति निष्ठा बनाए रखने तथा अपनी इकाइयों को अधिक सक्षम बनाने का निर्देश दिया।
किम ने यह भी कहा, 'सेना की प्रत्येक कंपनी को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि वह विभिन्न सैन्य अभियानों को स्वतंत्र रूप से और प्रभावी ढंग से अंजाम दे सके।' उत्तर कोरिया की सैन्य संरचना में कंपनी को एक बुनियादी और महत्वपूर्ण लड़ाकू इकाई माना जाता है।
कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए
इस सम्मेलन में उत्तर कोरिया के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भाग लिया। इनमें वर्कर्स पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष पाक जोंग चोन, रक्षा मंत्री किम सोंग गी और कोरियाई पीपुल्स आर्मी के जनरल स्टाफ प्रमुख री योंग गिल प्रमुख रूप से उपस्थित थे। सैन्य और राजनीतिक संगठनों के कमांडर भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
केसीएनए के अनुसार, बैठक में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया गया और सैन्य कमांडरों के अनुभवों को दर्शाने वाले वीडियो भी प्रस्तुत किए गए।
व्यापक सैन्य नीति से जुड़ाव
गौरतलब है कि यह सम्मेलन फरवरी 2026 में वर्कर्स पार्टी की नौवीं कांग्रेस के बाद पूरी सेना के स्तर पर आयोजित पहला ऐसा आयोजन था। उस कांग्रेस में भी किम ने पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को सुदृढ़ करने और परमाणु हथियारों तथा मिसाइल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी। इस प्रकार यह सम्मेलन उत्तर कोरिया की व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण नीति की एक कड़ी है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया अपनी सैन्य गतिविधियों में लगातार वृद्धि कर रहा है और क्षेत्रीय तनाव उच्च स्तर पर बने हुए हैं।
किम के स्वास्थ्य पर अटकलें और सार्वजनिक उपस्थिति
इस बीच, सोशल मीडिया पर किम के स्वास्थ्य को लेकर फैली अफवाहों के बाद उनकी इस सार्वजनिक उपस्थिति को विशेष महत्व दिया जा रहा है। दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा ने सांसदों को जानकारी दी कि किम की मृत्यु से जुड़ी अटकलों का कोई ठोस आधार नहीं है। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया द्वारा जारी सम्मेलन की तस्वीरों ने इन अटकलों को और कमजोर कर दिया।
आने वाले समय में उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों और किम के निर्देशों के क्रियान्वयन पर क्षेत्रीय और वैश्विक निगाहें टिकी रहेंगी।