सोना-चांदी में साप्ताहिक बड़ी गिरावट: गोल्ड 3.5% और सिल्वर 7.8% फिसला, MCX पर भाव नवंबर 2025 के बाद के निचले स्तर पर
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में तीव्र साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई — सोना इस सप्ताह करीब 3.5 प्रतिशत टूटा, जो जून 2026 के बाद का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन बताया जा रहा है, जबकि चांदी 7.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ नवंबर 2025 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई। विश्लेषकों के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की सख्त मौद्रिक नीति की आशंकाओं ने इस गिरावट को गति दी है।
घरेलू बाज़ार में कीमतें
MCX पर सोने का दिसंबर वायदा भाव गिरकर ₹1,42,150 प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया। कारोबार के दौरान यह ₹1,42,079 प्रति 10 ग्राम तक फिसला, जो पिछले सत्र की तुलना में ₹1,230 यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। चांदी का दिसंबर वायदा भाव ₹1,95,408 प्रति किलोग्राम पर पहुँचा, जिसमें ₹4,191 यानी 2.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि चांदी का भाव अब ₹2 लाख प्रति किलोग्राम के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का हाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स गोल्ड शनिवार सुबह 1.24 प्रतिशत गिरकर 4,010 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुँचा; कारोबार के दौरान यह 3,989.10 डॉलर प्रति औंस तक लुढ़का, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। कॉमेक्स सिल्वर करीब 1.9 प्रतिशत गिरकर 53.96 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बुलियन बाज़ार पहले से ही डॉलर की मज़बूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज़ी से दबाव में था।
गिरावट के प्रमुख कारण
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। हूती हमलों और पश्चिम एशियाई तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 116.7 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गया है। ऊँचे तेल दाम महंगाई को बढ़ाते हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरें ऊँची रखने का दबाव बढ़ता है। चूँकि सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊँची दरों के माहौल में यह निवेशकों को कम आकर्षित करता है। गौरतलब है कि मज़बूत डॉलर और ऊँची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने भी सोने की वैश्विक माँग को कमज़ोर किया है।
फेडरल रिज़र्व बैठक पर नज़र
विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर के अंत में होने वाली फेडरल रिज़र्व बैठक में ब्याज दर वृद्धि की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दरें बढ़ाए जाने की आशंका अभी भी 80 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है। यही कारण है कि निवेशक सोने-चांदी में नई खरीदारी करने से बच रहे हैं। आगामी अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) मुद्रास्फीति आँकड़े, यूरोपीय सेंट्रल बैंक की बैठक और चीन के आर्थिक आँकड़े भी बुलियन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।
आगे क्या संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महंगाई ऊँची बनी रहती है और केंद्रीय बैंक सख्त रुख जारी रखते हैं, तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। हालाँकि किसी बड़े भू-राजनीतिक जोखिम या वित्तीय अस्थिरता की स्थिति में सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन पा सकता है। निवेशकों की नज़र अब आने वाले वैश्विक व्यापक आर्थिक आँकड़ों पर टिकी होगी।