सोना ₹1,44,196 के निचले स्तर पर, MCX पर 1.28% फिसला; चांदी में ₹5,648 की बड़ी गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 22 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतें 1.28 प्रतिशत गिरकर ₹1,44,196 प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुँच गईं, जबकि चांदी ₹5,648 यानी 2.70 प्रतिशत टूटकर ₹2,03,520 प्रति किलोग्राम के निम्नतम स्तर पर आ गई। कमज़ोर वैश्विक संकेत, रुपए की मज़बूती और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता — इन तीन कारकों ने मिलकर कीमती धातुओं पर दोहरा दबाव बना दिया है।
MCX पर कारोबारी आँकड़े
दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव ₹1,46,079 से ₹1,087 यानी 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,44,992 पर खुला। सुबह करीब 11 बजे IST तक यह ₹1,771 यानी 1.21 प्रतिशत गिरकर ₹1,44,308 पर कारोबार कर रहा था, और एक समय ₹1,44,196 के दिन के निम्नतम स्तर को छू गया।
चांदी की स्थिति और भी कमज़ोर रही। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹2,09,168 के पिछले बंद भाव से ₹3,168 यानी 1.51 प्रतिशत गिरकर ₹2,06,000 पर खुली, और दिन के कारोबार में ₹5,648 यानी 2.70 प्रतिशत टूटकर ₹2,03,520 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुँच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कमज़ोरी
वैश्विक संदर्भ में, कॉमेक्स पर गुरुवार सुबह के शुरुआती कारोबार में सोना 1.05 प्रतिशत गिरकर $4,106.40 प्रति औंस पर था, जबकि चांदी 2.24 प्रतिशत टूटकर $56.42 प्रति औंस पर आ गई। घरेलू बाज़ार में सोने का भाव गिरकर ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब और चांदी ₹2.03 लाख प्रति किलोग्राम के नज़दीक आ गई।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह भी MCX पर सोने में ₹3,581 यानी 2.4 प्रतिशत की और चांदी में ₹14,568 यानी 6.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी — यानी कीमती धातुओं पर दबाव लगातार दूसरे सप्ताह बना हुआ है।
बैंक ऑफ अमेरिका की चेतावनी और निवेशकों की सतर्कता
बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने अनुमान जताया है कि मौजूदा दबाव जारी रहने पर सोना आगे चलकर $3,700 प्रति औंस तक फिसल सकता है। भारतीय मुद्रा में यह स्तर लगभग ₹1.12 लाख प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठता है। इस पूर्वानुमान ने बाज़ार में निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी है।
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक इस समय अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की आगामी नीतिगत दिशा और अमेरिकी आर्थिक आँकड़ों पर नज़र बनाए हुए हैं। ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिल रहा है।
रुपए की मज़बूती और ऊर्जा कीमतों का प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू बाज़ार में गिरावट की एक बड़ी वजह भारतीय रुपए की मज़बूती भी है। मज़बूत रुपया आयातित सोने और चांदी की लागत को कम करता है, जिससे स्थानीय कीमतों पर सीधा दबाव पड़ता है। जानकारों के अनुसार घरेलू कीमतों में यह कमज़ोरी बड़े पैमाने पर मुद्रा विनिमय दर के प्रभाव से जुड़ी है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब $110 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। ऊर्जा की ऊँची कीमतें महँगाई को बढ़ा सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची रख सकते हैं — यह स्थिति सामान्यतः सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती है। हालाँकि दूसरी तरफ अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमज़ोरी सोने को कुछ समर्थन भी दे सकती हैं।
आगे क्या देखेंगे निवेशक
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों का ध्यान अमेरिका के आवास संबंधी आँकड़ों, उपभोक्ता भावना और PCE मुद्रास्फीति आँकड़ों पर रहेगा। इसके अतिरिक्त भारत, ब्रिटेन और अमेरिका के PMI आँकड़े, रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियाँ भी बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। कीमती धातुओं में अल्पकालिक अस्थिरता बने रहने की संभावना है।