सोना ₹1,46,000 और चांदी ₹2,09,218 पर फिसली; मिडिल ईस्ट तनाव, मजबूत डॉलर और Fed दर-बढ़ोतरी आशंका का असर
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को सोना और चांदी दोनों कीमती धातुएं दबाव में रहीं — मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों की खरीदारी पर लगाम लगाए रखी। MCX पर दिसंबर डिलीवरी का सोना ₹1,46,000 प्रति 10 ग्राम पर और चांदी ₹2,09,218 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हुआ
वैश्विक संदर्भ बिंदु कॉमेक्स पर खबर लिखे जाने तक सोना 0.23 प्रतिशत कमजोर होकर 4,133 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। चांदी इससे ज्यादा दबाव में रही और 1.03 प्रतिशत फिसलकर 57.405 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस कमजोरी की सीधी छाया घरेलू बाजार पर भी पड़ी।
MCX पर घरेलू कीमतों का विस्तृत हाल
MCX पर दिसंबर डिलीवरी का सोना ₹519 यानी 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,46,000 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। दिन की शुरुआत इसने पिछले बंद ₹1,46,519 से 0.13 प्रतिशत टूटकर ₹1,46,328 पर की, लेकिन कारोबार के दौरान यह ₹830 यानी 0.56 प्रतिशत लुढ़ककर ₹1,45,689 प्रति 10 ग्राम के दिन के निचले स्तर तक पहुँच गया।
चांदी की स्थिति और चुनौतीपूर्ण रही। MCX पर यह ₹2,267 यानी 1.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹2,09,218 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई। दिन की शुरुआत पिछले बंद ₹2,11,485 से ₹1,085 यानी 0.51 प्रतिशत नीचे ₹2,10,400 पर हुई थी, लेकिन एक समय यह ₹2,684 यानी 1.26 प्रतिशत फिसलकर ₹2,08,801 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर भी पहुँची।
मिडिल ईस्ट तनाव और कच्चे तेल का प्रभाव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेला था। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदारों पर लगने वाले अतिरिक्त टैरिफ हटाने के फैसले ने भी वैश्विक कमोडिटी बाजारों को प्रभावित किया। गौरतलब है कि ऊर्जा बाजार की यह अनिश्चितता निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर धकेलती है, लेकिन मजबूत डॉलर और दर-बढ़ोतरी की आशंका इस रुझान को काट रही है।
फेडरल रिज़र्व बैठक और ब्याज दर की संभावनाएँ
आर्थिक जानकारों के मुताबिक, निवेशकों की नजर 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत बैठक पर टिकी है। अनुमान है कि अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना करीब 16 प्रतिशत है, जबकि दिसंबर में यह संभावना लगभग 90 प्रतिशत मानी जा रही है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण घट जाता है — यही वजह है कि निवेशक फिलहाल नई खरीदारी से परहेज कर रहे हैं।
आगे क्या देखें निवेशक
आने वाले सत्रों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अगले सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी व्यक्तिगत उपभोग व्यय (PCE) मुद्रास्फीति आंकड़ों पर निर्भर करेगी, जिन्हें फेडरल रिज़र्व महंगाई नापने का प्राथमिक पैमाना मानता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि महंगाई अनुमान से अधिक रही, तो ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका और पुख्ता होगी तथा कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है। इसके विपरीत, महंगाई के नरम संकेत मिलने पर खरीदारी लौट सकती है।