डॉ. सज्जन सिंह यादव बने जम्मू-कश्मीर के नए मुख्य सचिव, गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 24 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर 1995 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. सज्जन सिंह यादव को जम्मू-कश्मीर का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया। सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद एजीएमयूटी कैडर के इस अनुभवी अधिकारी को नई दिल्ली से जम्मू-कश्मीर स्थानांतरित किया गया है। वे 1 नवंबर 2026 से, अथवा कार्यभार ग्रहण की तिथि — जो भी बाद में हो — से इस पद पर विधिवत तैनात माने जाएंगे।
नियुक्ति का आदेश और वितरण
गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस आदेश की प्रति दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, गोवा, चंडीगढ़ और लद्दाख के मुख्य सचिवों को भेजी गई है। इसके अतिरिक्त डीएनएच एवं डीडी तथा लक्षद्वीप के प्रशासक के सलाहकार और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के सचिव को भी इसकी प्रति प्रेषित की गई है। यह व्यापक वितरण सूची इस नियुक्ति की प्रशासनिक महत्ता को रेखांकित करती है।
डॉ. यादव का प्रशासनिक अनुभव
डॉ. सज्जन सिंह यादव ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से सीधी भर्ती से भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया था। उनका गृह राज्य हरियाणा है। अपने 31 वर्ष के सुदीर्घ प्रशासनिक कार्यकाल में वे 17 अलग-अलग स्थानों पर 23 पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनके करियर में औसतन प्रत्येक पोस्टिंग लगभग 1 साल 4 महीने की रही है।
उनकी सबसे लंबी तैनाती वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में 4 साल 8 महीने तक रही। इससे पहले वे नई दिल्ली में वित्त व्यय विभाग में संयुक्त सचिव तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्यरत रहे। रिकॉर्ड के अनुसार, वे अपनी पिछली तैनाती में 19 अगस्त 2026 तक वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर थे।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
डॉ. यादव ने एनिमल हसबेंडरी में शिक्षा प्राप्त की है और दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से फाइनेंस में एमबीए किया है। सेवाकाल के दौरान उन्होंने 9 प्रशिक्षण कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं। वित्त और प्रशासन में उनकी गहरी विशेषज्ञता उन्हें जम्मू-कश्मीर के जटिल प्रशासनिक ढाँचे के लिए उपयुक्त बनाती है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है जहाँ मुख्य सचिव की भूमिका प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जाती है। 1 नवंबर 2026 से कार्यभार संभालने के बाद डॉ. यादव के सामने इस क्षेत्र की विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी।